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मंगलवार, 9 मार्च 2021

देखभाल

 

          मेरे मित्र जब यूरोप के सबसे निर्धन देशों में से एक, मोलदोवा, में रहते थे, तब वे वहाँ के लोगों, विशेषकर मसीही विश्वासियों के द्वारा, उनका गर्मजोशी और खुले दिल के साथ स्वागत-सत्कार देखकर बहुत प्रभावित हुए। एक बार वे अपने चर्च के एक दंपति के घर उनसे मिलने गए और साथ में उनके लिए कुछ कपड़े और भोजन-सामग्री भी ले गए। जिनसे वे मिलने गए थे, वे बहुत गरीब थी, लेकिन उन्होंने कई बच्चों को उनकी देखभाल के लिए गोद ले रखा था। उस दंपति ने मेरे उन मित्रों के साथ बहुत आदरणीय मेहमानों के समान व्यवहार किया, उनके बहुत मना करने के बाद भी उन्हें मीठी चाय और साथ में कुछ खाने के लिए भी दिया। जब मेरे मित्र उनके घर से उन्हें अपने द्वारा लाई गई सामग्री को उन्हें देने के बाद वहाँ से जाने लगे, तो वे उन्हें मिले उस अतिथि सत्कार से बहुत प्रभावित थे।

          उन विश्वासियों ने वह साक्षात कर के दिखाया, जिसकी आज्ञा परमेश्वर ने अपने लोगों, इस्राएलियों को दी थी। परमेश्वर ने उनसे कहा था,और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे” (व्यवस्थाविवरण 10:12)। इस्राएलियों को इसका पालन कैसे करना था? उत्तर इससे कुछ आगे के पदों में दिया गया है: “इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे” (व्यवस्थाविवरण 10:19)। परमेश्वर के दृष्टिकोण से, अजनबियों का स्वागत और सत्कार करने के द्वारा वे परमेश्वर की सेवा और आदर करेंगे; और उन्हें प्रेम तथा देखभाल दिखाने के द्वारा, वे परमेश्वर में अपने विश्वास को भी व्यक्त करेंगे।

          हमारी परिस्थितियाँ उन मोलदोविया के लोगों से भिन्न हो सकती हैं, किन्तु हम भी प्रभु परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को औरों के प्रति अपने अतिथि सत्कार के द्वारा दिखा सकते हैं। चाहे हम उनका अपने घरों में स्वागत करें, या मार्ग में चलते समय मिलने वाले लोगों का मुस्कराहट के साथ अभिनंदन करें, हम इस अकेलेपन और दुखों से भरे संसार को परमेश्वर की प्रेम भरी देखभाल को दिखा सकते हैं। - एमी बाउचर पाई

 

सत्कार के वरदान के उपयोग के द्वारा मसीही विश्वासी परमेश्वर के प्रेम को प्रकट करते हैं।


पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है। - इब्रानियों 13:2

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 10:12-19

व्यवस्थाविवरण 10:12 और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे,

व्यवस्थाविवरण 10:13 और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो?

व्यवस्थाविवरण 10:14 सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है;

व्यवस्थाविवरण 10:15 तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है।

व्यवस्थाविवरण 10:16 इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो।

व्यवस्थाविवरण 10:17 क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान्‌ पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है।

व्यवस्थाविवरण 10:18 वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्र देता है।

व्यवस्थाविवरण 10:19 इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 8-10
  • मरकुस 11:19-33

सोमवार, 8 मार्च 2021

कोमल और शक्तिशाली


          दूसरे विश्व-युद्ध के समय में , जैसे-जैसे नीदरलैंड पर शत्रु का कब्ज़ा बढ़ता गया, ऐनी फ्रैंक और उनके परिवार ने अपने छिपने का एक गुप्त स्थान बनाया और फिर उसमें जाकर रहने लगे। वे दो वर्ष तक वहाँ छिप कर रहे; किन्तु अन्ततः पकड़े गए और उन्हें बंदी शिविरों में रहने के लिए भेज दिया गया। ऐनी ने अपने इन अनुभवों को एक डायरी में लिखा, जो Diary of a Young Girl के नाम से प्रकाशित हुई, और बहुत प्रसिद्ध भी हुई। ऐनी ने अपने अनुभवों के आधार पर कहा, “लम्बे समय तक स्थिर बने रहने के लिए जो सबसे उपयोगी हथियार होता है, वह है एक कोमल और कृपालु आत्मा।”

          दिन-प्रति-दिन के वास्तविक जीवन के साथ संघर्ष करने में, कोमलता एक जटिल विषय हो सकती है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह 40 में हमें परमेश्वर के दोनों स्वरूप देखने को मिलते हैं। उसके विषय लिखा है “देखो, प्रभु यहोवा सामर्थ्य दिखाता हुआ रहा है, वह अपने भुजबल से प्रभुता करेगा” और फिर इससे अगले ही पद में उसके लिए आया है “वह चरवाहे के समान अपने झुण्ड को चराएगा, वह भेड़ों के बच्चों को अंकवार में लिये रहेगा और दूध पिलाने वालियों को धीरे धीरे ले चलेगा” (यशायाह 40:10-11)। वह शक्तिशाली और सामर्थी है, किन्तु दुर्बलों की सुरक्षा करने में कोमल भी है।

          प्रभु यीशु के बारे में सोचिए, जब उन्होंने एक कोड़ा बनाया और मन्दिर में से सर्राफों की चौकियां उलट दीं और उन्हें बाहर खदेड़ दिया; साथ ही वे बच्चों के प्रति बहुत कोमल भी थे। उन्होंने मत्ती 23 में दोगले फरीसियों की कड़े शब्दों में भर्त्सना भी की, किन्तु व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री को अपनी कोमल दया में क्षमा भी किया (यूहन्ना 8:1-10)।

          यद्यपि ऐसे समय भी हो सकते हैं जब दुर्बलों की सहायता के लिए शक्तिशाली होकर खड़े होने के आवश्यकता होती है, परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल हमें “तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है” (फिलिप्पियों 4:5) के निर्वाह के लिए भी कहती है। जब हम अपने प्रभु परमेश्वर की सेवा में लगे होते हैं, तब अकसर हमारा सबसे शक्तिशाली होना, ज़रूरतमंदों के प्रति हमारी कोमलता का प्रदर्शन होता है। - डेव ब्रैनन

 

कोमलता के द्वारा हम अपनी बात को बिना कटुता उत्पन्न किए रख सकते हैं।


जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:5

बाइबल पाठ: यशायाह 40:9-17

यशायाह 40:9 हे सिय्योन को शुभ समाचार सुनाने वाली, ऊंचे पहाड़ पर चढ़ जा; हे यरूशलेम को शुभ समाचार सुनाने वाली, बहुत ऊंचे शब्द से सुना, ऊंचे शब्द से सुना, मत डर; यहूदा के नगरों से कह, अपने परमेश्वर को देखो!

यशायाह 40:10 देखो, प्रभु यहोवा सामर्थ्य दिखाता हुआ रहा है, वह अपने भुजबल से प्रभुता करेगा; देखो, जो मजदूरी देने की है वह उसके पास है और जो बदला देने का है वह उसके हाथ में है।

यशायाह 40:11 वह चरवाहे के समान अपने झुण्ड को चराएगा, वह भेड़ों के बच्चों को अंकवार में लिये रहेगा और दूध पिलाने वालियों को धीरे धीरे ले चलेगा।

यशायाह 40:12 किस ने महासागर को चुल्लू से मापा और किस के बित्ते से आकाश का नाप हुआ, किस ने पृथ्वी की मिट्टी को नपवे में भरा और पहाड़ों को तराजू में और पहाडिय़ों को कांटे में तौला है?

यशायाह 40:13 किस ने यहोवा की आत्मा को मार्ग बताया या उसका मन्त्री हो कर उसको ज्ञान सिखाया है?

यशायाह 40:14 उसने किस से सम्मति ली और किस ने उसे समझाकर न्याय का पथ बता दिया और ज्ञान सिखा कर बुद्धि का मार्ग जता दिया है?

यशायाह 40:15 देखो, जातियां तो डोल की एक बून्द या पलड़ों पर की धूल के तुल्य ठहरीं; देखो, वह द्वीपों को धूल  के किनकों सरीखे उठाता है।

यशायाह 40:16 लबानोन भी ईंधन के लिये थोड़ा होगा और उस में के जीव-जन्तु होमबलि के लिये बस न होंगे।

यशायाह 40:17 सारी जातियां उसके सामने कुछ नहीं हैं, वे उसकी दृष्टि में लेश और शून्य से भी घट ठहरीं हैं।

 

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18

रविवार, 7 मार्च 2021

शोर

 

          कुछ वर्ष पहले, एक कॉलेज की अध्यक्षा ने विद्यार्थियों को निमंत्रण दिया कि वे उनके साथ एक शाम शांत होकर समय बिताएँ। यद्यपि विद्यार्थी मान तो गए, किन्तु उन्होंने बड़े संकोच के साथ अपने मोबाइल फोन बन्द किए, उन्हें एक ओर रखा, और प्रार्थना-घर में आकर बैठे। अगले एक घंटे तक वे प्रार्थना और आराधना तथा स्तुति के संगीत में समय बिताते रहे। इसके बाद वहाँ सम्मिलित लोगों में से एक ने कहा कि उसका यह समय शांत हो जाने और जीवन में से शोर को हटा देने का एक अद्भुत अवसर और अनुभव था।

          कभी-कभी अनचाहे शोर से बच पाना बहुत कठिन होता है। हमारे अन्दर और बाहर के संसारों का कोलाहल हमें बहरा कर देने वाला हो सकता है। परन्तु हम जब शांत होने के लिए तैयार होते हैं, हम परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार के द्वारा परमेश्वर को जानने के लिए शान्त हो जाने की आवश्यकता (भजन 46:10) के लिखे जाने को समझने लगते हैं। हम 1 राजाओं 19 में देखते हैं कि जब एलिय्याह भविष्यद्वक्ता प्रभु परमेश्वर की खोज में था, तो उसे प्रभु आँधी, भूकंप, या आग के दिल दहला देने वाले शोर में नहीं मिला (पद 9-13)। वरन एलिय्याह ने परमेश्वर की कोमल आवाज़ को फुसफुसाहट के समान शांत वातावरण में पाया (पद 12)।

          किसी भी समारोह में, परिवार जनों के साथ एकत्रित होने में, अतिरिक्त शोर का होना निश्चित होता है। वह समय उत्तेजना के साथ वार्तालाप, ठहाकों, आवश्यकता से अधिक भोजन, और प्रेम की मनोहर अभिव्यक्तियों का समय होता है। परन्तु जब हम अपने मनों को शांत कर के परमेश्वर के साथ बैठते हैं, तो वह शान्ति का समय इन सभी बातों से कहीं अधिक मनोहर और लाभदायक होता है।  एलिय्याह के समान ही, हमें भी परमेश्वर किसी भी प्रकार के शोर में नहीं, वरन शान्ति के वातावरण में मिलेगा। और यदि हम अपने जीवन के शोर को एक ओर करके, उसकी आवाज़ को सुनना चाहें, तो परमेश्वर हमसे भी उस शान्ति में फुसफुसा कर बातें करेगा। - सिंडी हैस कैस्पर

 

परमेश्वर की आवाज़ सुनने के लिए शांत हो जाना अनिवार्य है।


चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन संहिता 46:10

बाइबल पाठ: 1 राजाओं 19:9-13

1 राजा 19:9 वहां वह एक गुफा में जा कर टिका और यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?

1 राजा 19:10 उस ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं।

1 राजा 19:11 उसने कहा, निकलकर यहोवा के सम्मुख पर्वत पर खड़ा हो। और यहोवा पास से हो कर चला, और यहोवा के सामने एक बड़ी प्रचण्ड आन्धी से पहाड़ फटने और चट्टानें टूटने लगीं, तौभी यहोवा उस आन्धी में न था; फिर आन्धी के बाद भूंईडोल हुआ, तौभी यहोवा उस भूंईडोल में न था।

1 राजा 19:12 फिर भूंईडोल के बाद आग दिखाई दी, तौभी यहोवा उस आग में न था; फिर आग के बाद एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाई दिया।

1 राजा 19:13 यह सुनते ही एलिय्याह ने अपना मुंह चद्दर से ढांपा, और बाहर जा कर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ। फिर एक शब्द उसे सुनाई दिया, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52

शनिवार, 6 मार्च 2021

बाँटना

 

          वर्ष 1995 में, अमेरिका के स्टॉक मार्किट में निवेश करने वालों को सबसे अधिक लाभ, औसतन 37.6 प्रतिशत, प्राप्त हुआ। फिर  वर्ष 2008 में निवेशकों को लगभग उतने ही की हानि हुई, 37.0 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इन दोनों वर्षों के मध्य की अवधि में निवेशकों को लाभांश में बहुत उतर-चढ़ाव देखने पड़े, और उन्हें चिंता लगी रही कि उनके लगाए हुए धन का क्या होगा?

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आश्वस्त किया, कि उनके द्वारा प्रभु में अपने जीवन निवेश करने से उन्हें अद्भुत लाभ मिलेंगे। उन्होंने प्रभु के पीछे हो लेने के लिए अपने घर, परिवार, नौकरियाँ, ओहदे, आदि सब कुछ छोड़ दिया था, अपना सब कुछ प्रभु यीशु के शिष्य होने में लगा दिया था। किन्तु जब उन्होंने एक धनी युवक को प्रभु के पीछे हो लेने के लिए अपने सांसारिक धन के छोड़ने की आवश्यकता के साथ संघर्ष करते देखा, तो प्रभु के शिष्यों के मन में प्रश्न उठे कि उन का क्या होगा; क्या उन्होंने सही निर्णय लिया था? प्रभु यीशु ने उन्हें उनके लाभांश के विषय आश्वस्त किया कि “और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन” (मरकुस 10:30)। यह संसार के किसी भी स्टॉक मार्किट से मिलने वाले लाभांश से कहीं अधिक बेहतर लाभ है।

          हमें परमेश्वर के राज्य में किए गए हमारे आत्मिक निवेश पर मिलने वाले “ब्याज की दर” की कभी चिंता नहीं करनी चाहिए; उसके समान कोई अन्य लाभांश है ही नहीं, और वह भी पूर्णतः सुरक्षित और निश्चित। पैसे के साथ तो उद्देश्य हमारे द्वारा लगाए गए पैसे से और पैसा कमाना होता है, जो अन्ततः नश्वर है। लेकिन परमेश्वर में किए गए निवेश के लाभांश को सांसारिक धन से नहीं नापा जा सकता है; उसे तो उस अविनाशी आनन्द और आशीष से देखा जा सकता है जो प्रभु परमेश्वर को जानने, उसकी निकटता में बढ़ते जाने से मिलती है, और अनन्तकाल तक मिलती रहेगी। सबसे अद्भुत बात, हम अपने इस निवेश को जितना अधिक औरों के साथ बाँटते हैं, यह उतना ही अधिक बढ़ता भी जाता है, उतना ही अधिक लाभ भी लाता जाता है। इसलिए उसे बढ़ाते जाने के लिए, प्रभु में अपने निवेश को औरों के साथ बाँटें। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

प्रभु परमेश्वर के लिए जीना, जीवन का एक उत्तम निवेश है।


और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा। - 1 यूहन्ना 2:17

बाइबल पाठ: मरकुस 10:17-31

मरकुस 10:17 और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरु, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं?

मरकुस 10:18 यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर।

मरकुस 10:19 तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।

मरकुस 10:20 उसने उस से कहा, हे गुरु, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं।

मरकुस 10:21 यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।

मरकुस 10:22 इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था।

मरकुस 10:23 यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!

मरकुस 10:24 चेले उस की बातों से अचम्भित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालकों, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!

मरकुस 10:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है!

मरकुस 10:26 वे बहुत ही चकित हो कर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है?

मरकुस 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।

मरकुस 10:28 पतरस उस से कहने लगा, कि देख, हम तो सब कुछ छोड़कर तेरे पीछे हो लिये हैं।

मरकुस 10:29 यीशु ने कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं, जिसने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या लड़के-बालों या खेतों को छोड़ दिया हो।

मरकुस 10:30 और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन।

मरकुस 10:31 पर बहुतेरे जो पहिले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, वे पहिले होंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31

शुक्रवार, 5 मार्च 2021

भूमिका

 

          मेरे एक मित्र ने अपने फेसबुक पर पृष्ठ पर, उसे सौंपे गए एक कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लेने के बारे में लिखा। औरों ने उसे इस बात के लिए बधाइयां दीं, लेकिन उसकी इस सफलता से मेरे दिल पर छुरियाँ चल गईं। वह कार्य मुझे मिलना चाहिए था, उस पर मेरा अधिकार था; लेकिन मेरी अनदेखी करते हुए, वह कार्य मेरे उस मित्र को दे दिया गया, और मुझे पता भी नहीं है कि मेरे साथ ऐसा क्यों किया गया।

          बेचारा यूसुफ! परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने उसे नहीं चुना, और वह जानता था कि क्यों। प्रभु यीशु मसीह के मृतकों में से पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद, उसके शिष्यों ने प्रभु को धोखे से पकड़वाने वाले यहूदा इस्करियोती के स्थान पर किसी और को नियुक्त करना चाहा। चेलों ने इसके विषय प्रार्थना की, परमेश्वर से उसकी इच्छा पूछी, और उनके सामने दो नाम, यूसुफ और मत्तियाह आए, और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किसे चुनना है। उन्होंने परमेश्वर से प्रार्थना में इसके बारे में पूछा और दोनों के नाम पर चिट्ठी डाली, जिससे फिर मत्तियाह का नाम सामने आया; यूसुफ को वह स्थान नहीं मिला।

          मैं सोचता हूँ, जब शिष्य मत्तियाह को बधाई दे रहे होंगे, तब यूसुफ की क्या प्रतिक्रिया रही होगी? उसने इस चुने न जाने को कैसे लिया होगा? क्या उसने अपने आप को ठुकराया हुआ अनुभव किया होगा? क्या वह अपने आप पर तरस खाकर, अपने को औरों से अलग करके कहीं एक ओर जाकर पड़ गया होगा? या, क्या उसने परमेश्वर पर भरोसा रखते हुए, उसके इस निर्णय को सहर्ष लिया होगा, और दूसरों के साथ मिलकर शिष्यों में अपनी सहायक भूमिका का निर्वाह करता रहा होगा?

          यदि मैं यूसुफ के स्थान पर होता तो मैं यह जानता हूँ कि मेरे लिए कौन सा विकल्प सर्वोत्तम होता, और मैं कौन सा विकल्प लेता। मैं तो कहता ‘ठीक है; मुझे शर्मिंदा किया गया है। यदि तुम्हें मेरे महत्व का एहसास नहीं है, तो न सही! अब देखते हैं कि अब से तुम्हारे साथ मेरे न रहने के बाद तुम लोग कार्य कैसे करने पाते हो?’ यह भावना रखना स्वयं को अच्छा तो लग सकता है, परन्तु केवल इसलिए क्योंकि यह स्वार्थी भावना है।

          पवित्र शास्त्र में यूसुफ का फिर कहीं कोई उल्लेख नहीं आया है, इसलिए हमें नहीं पता है कि उसकी वास्तविक प्रतिक्रिया क्या थी। लेकिन हमारे लिए अधिक महत्वपूर्ण यह है कि यदि किसी बात के लिए हमारी अनदेखी की जाती है, तब हम क्या प्रतिक्रिया देते हैं? हम कभी इस बात को न भूलें के सबसे अधिक महत्व प्रभु यीशु के राज्य और कार्य का है, न कि हमारी व्यक्तिगत सफलता अथवा प्रशंसा का। इसलिए वह हमें जो भी भूमिका निभाने के लिए देता है, हम सहर्ष उसे स्वीकार करें और पूरी लगन तथा आनन्द के साथ उस भूमिका को निभाएं। हमारे प्रतिफल उसके हाथों में हैं। - माइक व्हिटमर

 

हे प्रभु परमेश्वर, चाहे कोई भी भूमिका हो, मैं सदा आपके लिए कार्य कर सकूँ।


देख, मैं शीघ्र आने वाला हूं; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है। - प्रकाशितवाक्य 22:12

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:15-26

प्रेरितों 1:15 और उन्‍हीं दिनों में पतरस भाइयों के बीच में जो एक सौ बीस व्यक्ति के लगभग इकट्ठे थे, खड़ा हो कर कहने लगा।

प्रेरितों 1:16 हे भाइयों, अवश्य था कि पवित्र शास्त्र का वह लेख पूरा हो, जो पवित्र आत्मा ने दाऊद के मुख से यहूदा के विषय में जो यीशु के पकड़ने वालों का अगुवा था, पहिले से कही थीं।

प्रेरितों 1:17 क्योंकि वह तो हम में गिना गया, और इस सेवकाई में सहभागी हुआ।

प्रेरितों 1:18 (उसने अधर्म की कमाई से एक खेत मोल लिया; और सिर के बल गिरा, और उसका पेट फट गया, और उस की सब अन्‍तडिय़ां निकल पड़ी।

प्रेरितों 1:19 और इस बात को यरूशलेम के सब रहने वाले जान गए, यहां तक कि उस खेत का नाम उन की भाषा में हकलदमा अर्थात लहू का खेत पड़ गया।)

प्रेरितों 1:20 क्योंकि भजन संहिता में लिखा है, कि उसका घर उजड़ जाए, और उस में कोई न बसे और उसका पद कोई दूसरा ले ले।

प्रेरितों 1:21 इसलिये जितने दिन तक प्रभु यीशु हमारे साथ आता जाता रहा, अर्थात यूहन्ना के बपतिस्मा से ले कर उसके हमारे पास से उठाए जाने तक, जो लोग बराबर हमारे साथ रहे।

प्रेरितों 1:22 उचित है कि उन में से एक व्यक्ति हमारे साथ उसके जी उठने का गवाह हो जाए।

प्रेरितों 1:23 तब उन्होंने दो को खड़ा किया, एक यूसुफ को, जो बर-सबा कहलाता है, जिस का उपनाम यूसतुस है, दूसरा मत्तिय्याह को।

प्रेरितों 1:24 और यह कहकर प्रार्थना की; कि हे प्रभु, तू जो सब के मन जानता है, यह प्रगट कर कि इन दोनों में से तू ने किस को चुना है।

प्रेरितों 1:25 कि वह इस सेवकाई और प्रेरिताई का पद ले जिसे यहूदा छोड़ कर अपने स्थान को गया।

प्रेरितों 1:26 तब उन्होंने उन के बारे में चिट्ठियां डालीं, और चिट्ठी मत्तिय्याह के नाम पर निकली, सो वह उन ग्यारह प्रेरितों के साथ गिना गया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50

गुरुवार, 4 मार्च 2021

साथ


          उसका सारा ध्यान उस सबसे ऊपर वाली शेल्फ पर केन्द्रित था, जहाँ पर स्पैघेटी के साथ खाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की चटनी की बोतलें रखी हुई थीं। मैं भी दुकान में परचून के समान वाले भाग में उसी के पास खड़ा हुआ था, और मैं भी उसी शेल्फ पर लगी बोतलों को देख रहा था, अपने लिए खरीदने के लिए चुनाव करने का प्रयास कर रहा था, किन्तु उसे मेरी उपस्थिति का ज़रा सा भी आभास नहीं था; वह तो बस अपनी ही आवश्यकता में खोई हुई थी। अब, मैं कद में काफी लंबा हूँ, इसलिए दुकानों की सबसे ऊपर की शेल्फ पर रखे सामान तक पहुँचने में मुझे कोई समस्या नहीं होती है, लेकिन वह छोटे ही कद की थी, उसके लिए वह ऊपर की शेल्फ तक पहुँचना समस्या थी। इसलिए मैंने उसे सहायता देने का प्रस्ताव दिया, और मेरी आवाज़ सुन कर वह चौंक गई, और बोली, “अरे! मैंने तो आपको यहाँ खड़े हुए भी नहीं देखा। हाँ, कृपया मेरी सहायता कीजिए।”

          परमेश्वर के वचन बाइबल में शिष्यों के सामने भी के बड़ी समस्या थी – भूखे लोगों की एक बड़ी भीड़, आबादी से दूर स्थित क्षेत्र, और ढलता हुआ दिन। उन्होंने प्रभु यीशु से कहा – “देख देर होती जा रही है; इस भीड़ को विदा कर, जिससे के वे समय रहते गाँवों तक पहुँच सकें और अपने लिए भोजन खरीद सकें” (मत्ती 14:15)। जब प्रभु ने उन शिष्यों से कहा कि भीड़ को भेजने की बजाए, वे ही उस भीड़ के लिए रोटी का इंतज़ाम करें, तो उनका प्रत्युत्तर था, “हमारे पास तो ...” (पद 17)। उन्हें केवल अपनी घटी का ही ध्यान था; जबकि उनके साथ प्रभु यीशु खड़ा था, जो न केवल रोटी का स्त्रोत था, वरन स्वयं जीवन की रोटी भी था।

          हम भी अपनी ही चुनौतियों के समाधान स्वयं निकालने की चिंताओं तथा जीवन के प्रति अपने सीमित दृष्टिकोण में इतने लिप्त हो सकते हैं कि सदैव हमारे साथ बने रहने वाले हमारे प्रभु यीशु मसीह की उपस्थिति की अनदेखी कर देते हैं। चाहे वीरान पहाड़ी स्थान हों या परचून की दुकान में रखा सामान हो, और इन सबके मध्य जो कुछ भी और हो सकता है वह सभी हो, वह इम्मानुएल – परमेश्वर हमारे साथ, हमारी हर परिस्थिति में सहायता करने के लिए हमारे साथ विद्यमान है। - जॉन ब्लेज़

 

हम चाहे जहाँ हों, और सामने चुनौती चाहे कुछ भी हो, हमारा प्रभु सदा हमारे साथ है।


जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। -  यशायाह 43:2

बाइबल पाठ: मत्ती 14:13-21

मत्ती 14:13 जब यीशु ने यह सुना, तो नाव पर चढ़कर वहां से किसी सुनसान जगह एकान्‍त में चला गया; और लोग यह सुनकर नगर नगर से पैदल उसके पीछे हो लिए।

मत्ती 14:14 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी; और उन पर तरस खाया; और उसने उन के बीमारों को चंगा किया।

मत्ती 14:15 जब सांझ हुई, तो उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा; यह तो सुनसान जगह है और देर हो रही है, लोगों को विदा किया जाए कि वे बस्तियों में जा कर अपने लिये भोजन मोल लें।

मत्ती 14:16 यीशु ने उन से कहा उन का जाना आवश्यक नहीं! तुम ही इन्हें खाने को दो।

मत्ती 14:17 उन्होंने उस से कहा; यहां हमारे पास पांच रोटी और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है।

मत्ती 14:18 उसने कहा, उन को यहां मेरे पास ले आओ।

मत्ती 14:19 तब उसने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पांच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को।

मत्ती 14:20 और सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरी हुई बारह टोकरियां उठाईं।

मत्ती 14:21 और खाने वाले स्त्रियों और बालकों को छोड़कर पांच हजार पुरुषों के अटकल थे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29


बुधवार, 3 मार्च 2021

उद्देश्य

 

          जब सियु फेन को पता चला कि उसके गुर्दों ने काम करना बन्द कर दिया है, और इस कारण उसे अपनी शेष सारी उम्र डायलिसिस करवाते रहना पड़ेगा, तो उसने हार मान कर बैठ जाना चाहा। वह अकेली थी, सेवा निवृत्त हो चुकी थी, और लम्बे समय से प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करती थी, इसलिए उसे मृत्योपरांत अपने अनन्त जीवन को लेकर कोई अनिश्चितता या भय नहीं था, और वह अपने जीवन को कृत्रिम साधनों से लंबा खींचने में कोई उद्देश्य नहीं समझ रही थी। फिर भी उसके मित्रों ने उसे समझाया और तैयार किया कि वह डायलिसिस के लिए जाए, और परमेश्वर द्वारा सहायता मिलते रहने की आशा बनाए रखे।

          दो वर्ष के बाद, उसने अपने इन अनुभवों को तब काम का होते देखा, जब वह अपने चर्च के एक मित्र से मिलने गई, जिसे शरीर को दुर्बल कर देने की बीमारी थी। वह महिला अपने आप को अकेली अनुभव कर रही थी, क्योंकि शायद ही कोई था जो उसकी तकलीफ और जिस परिस्थिति से होकर वह निकल रही थी, समझ पा रहा था। किन्तु सियु फेन को उसके शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा को समझ पाने में कोई कठिनाई नहीं हुई, और वह उस महिला के साथ उसके दुखों में व्यक्तिगत रीति से संबंधित हो सकी। सियु फेन के अपने अनुभवों ने उसे उस महिला के साथ चल पाने, और ऐसी शान्ति तथा ढाढ़स दे पाने के लिए सक्षम किया जो कोई और नहीं दे पा रहा था। सियु फेन ने कहा, “अब मैं देखने पाती हूँ कि इसमें भी परमेश्वर का उद्देश्य है और वह मुझे अभी भी प्रयोग कर सकता है।”

          हमें दुखों का सामना क्यों करना पड़ता है, यह समझना कठिन हो सकता है। लेकिन परमेश्वर हमारे दुखों और सम्बन्धित अनुभवों का प्रयोग अनपेक्षित तरीकों से कर सकता है। जब हम अपने परीक्षाओं और परेशानियों के मध्य में परमेश्वर की ओर उसके ढाढ़स, शान्ति, और प्रेम के लिए मुड़ते हैं, तो यह हमें औरों की सहायता करने के लिए भी सक्षम कर सकता है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि पौलुस ने भी अपने दुखों में एक उद्देश्य देखा; उन दुखों से उसे अवसर मिला कि वह परमेश्वर के ढाढ़स और शान्ति को प्राप्त करे, जिसे वह फिर औरों को आशीष देने के लिए प्रयोग कर सकता था (2 कुरिन्थियों 1:3-5)।

          हमें अपने दुखों और परेशानियों की अवहेलना करने के लिए नहीं कहा गया है, परन्तु उनमें परमेश्वर के उद्देश्यों को समझने के लिए कहा गया है; उन उद्देश्यों को जिनसे परमेश्वर औरों की भलाई करवा सकता है। - लेस्ली कोह

 

हे प्रभु मैं हर परिस्थिति में आपके प्रति भरोसे को बनाए रखूँ; 

और हर परिस्थिति का उपयोग आपके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए करूं।


और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:3-7

2 कुरिन्थियों 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्ति का परमेश्वर है।

2 कुरिन्थियों 1:4 वह हमारे सब क्लेशों में शान्ति देता है; ताकि हम उस शान्ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्लेश में हों।

2 कुरिन्थियों 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है।

2 कुरिन्थियों 1:6 यदि हम क्लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।

2 कुरिन्थियों 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्ति के भी सहभागी हो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 28-30
  • मरकुस 8:22-38