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रविवार, 28 मार्च 2021

घेरे हुए

 

          एक व्यस्त हवाई अड्डे में, एक छोटे बच्चे को लिए हुए युवा माँ, जो बढ़ी हुई गर्भावस्था में भी थी, अपने छोटे बच्चे को संभालने के लिए संघर्ष कर रही थी; किन्तु वह बच्चा उसकी सुनने के बजाए चिल्ला रहा था, हाथ-पैर पटक रहा था, और हवाई-जहाज़ में चढ़ने जाने के लिए मना कर रहा था। आखिरकार, परेशान और थकी हुई, वह महिला वहीं फर्श पर बैठ गई और अपना मुँह अपने हाथों में छुपा कर सुबकने लगी।

          तुरंत ही आस-पास बैठे हुए लोगों में से छः या सात स्त्रियाँ उठीं, सभी एक दूसरे और उस महिला से बिलकुल अजनबी थीं, उन्होंने उसे और उसके बच्चे को घेर लिया, और मिलकर उन्हें सम्भालने लगीं, दिलासा देने लगीं। किसी ने उन्हें कुछ खाने-पीने की वस्तुएँ दीं, किसी ने पानी दिया, किसी ने बच्चे और माँ को आलिंगन में लेकर शांत किया, और एक तो बच्चों के लोकप्रिय गाने भी बच्चे के लिए गाने लगी। थोड़ी ही देर में परिस्थिति नियंत्रण में आ गई; वह माँ और उसका बच्चा शांत हो गए, बच्चा हवाई जहाज़ में चढ़ने के लिए तैयार हो गया, और वे सभी स्त्रियाँ, अपनी-अपनी सीट पर चली गईं। किसी ने किसी अन्य के साथ कोई चर्चा नहीं की, किन्तु सभी जानती थीं कि उन सभी की सहायता और सहयोग से उस युवा माँ को सही समय पर वह सहारा और हिम्मत मिली जिसकी उसे उस परिस्थिति में आवश्यकता थी।

          यह परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 125 में लिखे एक मनोहर सत्य, “जिस प्रकार यरूशलेम के चारों ओर पहाड़ हैं, उसी प्रकार यहोवा अपनी प्रजा के चारों ओर अब से ले कर सर्वदा तक बना रहेगा” (पद 2) ,का सुन्दर चित्रण है। यह पद स्मरण करवाता है कि जिस प्रकार वह व्यस्त और हलचल से भरा शहर यरूशलेम, पहाड़ों से घिरा हुआ है, जिनमें जैतून का पहाड़, सिय्योन पर्वत, और मोरिय्याह पर्वत भी हैं, वैसे ही परमेश्वर के जन भी सदा उसके घेरे में बने रहते हैं।

          परमेश्वर भी अपने लोगों को घेरे रहता है – उन्हें सहारा दिए रहता है, उनकी सुरक्षा बनाए रखता है, और उनकी देखभाल करता रहता है, अभी और हर समय। इसलिए जब कोई दिन या समय कठिन हो तो जैसा भजनकार भजन 121:1 में कहता है, आप भी अपनी दृष्टि पर्वतों की ओर उठाएँ। परमेश्वर की सामर्थी सहायता, अटल आशा, और अनन्त प्रेम सदा उसके बच्चों के साथ बने रहते हैं, उसकी उपस्थिति उन्हें हमेशा घेरे रहती है। - पेट्रीशिया रेबोन

 

प्रभु हमारे कठिन समयों में हमें घेरे हुई आपकी उपस्थिति का एहसास करवाएँ।

मैं [प्रभु यीशु] तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। - यूहन्ना 14:18

बाइबल पाठ: भजन 125:1-5

भजन 125:1 जो यहोवा पर भरोसा रखते हैं, वे सिय्योन पर्वत के समान हैं, जो टलता नहीं, वरन सदा बना रहता है।

भजन 125:2 जिस प्रकार यरूशलेम के चारों ओर पहाड़ हैं, उसी प्रकार यहोवा अपनी प्रजा के चारों ओर अब से ले कर सर्वदा तक बना रहेगा।

भजन 125:3 क्योंकि दुष्टों का राजदण्ड धर्मियों के भाग पर बना न रहेगा, ऐसा न हो कि धर्मी अपने हाथ कुटिल काम की ओर बढ़ाएं।

भजन 125:4 हे यहोवा, भलों का, और सीधे मन वालों का भला कर!

भजन 125:5 परन्तु जो मुड़ कर टेढ़े मार्गों में चलते हैं, उन को यहोवा अनर्थकारियों के संग निकाल देगा! इस्राएल को शान्ति मिले!

 

एक साल में बाइबल: 

  • न्यायियों 4-6
  • लूका 4:31-44

शनिवार, 27 मार्च 2021

कार्य

 

          मेरे पास मेरे पिता की सबसे अच्छी स्मृतियाँ उनके बाहर कुछ-न-कुछ काम करते रहने की हैं। वे या तो कहीं कोई ठोका-पीटी कर रहे होते थे, या बागबानी में लगे होते थी, या नीचे तहखाने में अपनी कार्यशाला में, जहाँ उनके अनेकों अद्भुत औज़ार और यंत्र रखे हुए थे, कुछ बना रहे होते थे।

          अपने पिता को स्मरण करने से मुझे मेरे स्वर्गीय पिता और सृष्टिकर्ता परमेश्वर का ध्यान आता है, जो, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, सदा ही कार्य करता रहता है। आरंभ में, परमेश्वर ने पृथ्वी की नींव रखी, उसके तथा सितारों और नक्षत्रों के आकार, चाल, घेरे और स्थान आदि को निर्धारित किया, और उसके कार्य को देखकर स्वर्गदूत आनन्द से गाने लगे (अय्यूब 38:4-7)। परमेश्वर ने जो कुछ भी बनाया वह कला का एक उत्कृष्ट नमूना था। उसने एक विस्मयकारी सुन्दर संसार बनाया और उसे “बहुत अच्छा” कहा (उत्पत्ति 1:31)।

          मैं और आप भी उसके इस अद्भुत, सुन्दर, बहुत अच्छे, संसार का एक भाग हैं। परमेश्वर ने हमें विस्मयकारी और अद्भुत रीति से अपने ही स्वरूप में रचा है (भजन 139:13-16), और अपने ही समान हमारे अन्दर भी कार्य करने की इच्छा डाली है जिससे कि हम उद्देश्यों को पूरा कर सकें। इन कार्यों तथा उद्देश्यों का एक भाग पृथ्वी और उसके जीव-जन्तुओं, वनस्पति आदि की देखभाल करना और उन पर प्रभुता रखना भी है (उत्पत्ति 1:26-28; 2:15)। हम चाहे जो भी कार्य करें – हमारे व्यवसाय में, या हमारे आराम के समय में -  परमेश्वर हमें सामर्थ्य तथा संसाधन देता है कि हम उसके लिए पूरा मन लगाकर कार्य करें।

          हम जो भी कार्य करें, उसे प्रसन्न करने और उसकी महिमा के लिए करें। - एलिसन कीड़ा

 

परमेश्वर ने जिस कार्य के लिए बुलाया है, उसके लिए तैयार भी किया है।


सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये करो। - 1 कुरिन्थियों 10:31

बाइबल पाठ: अय्यूब 38:1-11

अय्यूब 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया,

अय्यूब 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है?

अय्यूब 38:3 पुरुष के समान अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे।

अय्यूब 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे।

अय्यूब 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा?

अय्यूब 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई,  या किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया,

अय्यूब 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे?

अय्यूब 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानो वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया;

अय्यूब 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया,

अय्यूब 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़ लगा दिए, कि

अय्यूब 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?

 

एक साल में बाइबल: 

  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30

शुक्रवार, 26 मार्च 2021

धैर्य

 

          अंग्रजी में बच्चों की कहानियों की एक श्रृंखला के एक जाने-पहचाने पात्र, विनी-द-पूह की कही एक बात काफी प्रसिद्ध रही है, “जिस व्यक्ति से आप बात कर रहे हैं, यदि वह आप की बात को सुनता हुआ प्रतीत नहीं होता है, तो उसके प्रति धैर्य रखें। बहुत संभव है कि उसके कान में कुछ रुई पड़ी हुई हो।”

          अपने वर्षों के अनुभव से मैंने सीखा है कि विनी की बात में कुछ दम हो सकता है। यदि कोई आपकी बात सुन ही नहीं रहा है, चाहे आपकी बात सुनने और मानने से उसे लाभ होगा, तो संभव है कि उसके सुन न पाने का कोई साधारण सा कारण हो, जैसे कि उसके कान में पड़े रुई के कुछ रोएँ। इसलिए उस पर क्रोधित होने से पहले, कारान को पहचान कर उसका निवारण कर लें। या फिर बाधा कुछ और गंभीर भी हो सकती है: कुछ लोगों के लिए सुनना और ध्यान देना इसलिए कठिन होता है क्योंकि वे निराश, हतोत्साहित, और अन्दर से टूटे हुए हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा कहता है कि उसने इस्राएल के लोगों से बातें कीं, लेकिन उन्होंने उसकी बात नहीं सुनी क्योंकि उनकी आत्माएं टूटी हुई थीं और उनके जीवन कठिन थे (निर्गमन 6:9)। इब्रानी भाषा के जिस शब्द का अनुवाद ‘निराशा’ किया गया है, उसका शब्दार्थ होता है “पूरी साँस न ले पाना”; मिस्र के कठोर दासत्व के कारण उन लोगों की “साँस फूली हुई थी।” इस कारण, मूसा में होकर परमेश्वर द्वारा दिए गए निर्देशों को इस्राएल के ध्यानपूर्वक न सुनने के लिए, परमेश्वर ने उनके साथ धैर्य पूर्ण व्यवहार किया, और इस अवहेलना के लिए उनकी भर्त्सना या ताड़ना नहीं की।

          हमें क्या करना चाहिए जब लोग हमारी बात न सुनें? विनी के कही गई बात में बुद्धिमत्ता है; “धैर्य रखें।” परमेश्वर ने अपने वचन में कहा है, “प्रेम धैर्यवान है, प्रेम दयालु है” (1 कुरिन्थियों 13:4); वह प्रतीक्षा करता है। परमेश्वर उन लोगों को तुरंत ही त्याग नहीं देता है, जो उसकी अवहेलना या अनसुनी करते हैं। वह अभी भी उनमें कार्य कर रहा है, उनके दुःख में होकर, उनके प्रति हमारे प्रेम और हमारी प्रार्थनाओं के द्वारा भी। संभव है कि अपने समय में, अपने तरीके से, वह उनके कान खोलेगा कि वे सुन सकें। धैर्य रखें। - डेविड एच. रोपर

 

धैर्य रखें; अभी परमेश्वर का कार्य ज़ारी है।


वह [प्रेम] सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। - 1 कुरिन्थियों 13:7

बाइबल पाठ: निर्गमन 6:1-9

निर्गमन 6:1 तब यहोवा ने मूसा से कहा, अब तू देखेगा कि मैं फिरौन से क्या करूंगा; जिस से वह उन को बरबस निकालेगा, वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकाल देगा।

निर्गमन 6:2 और परमेश्वर ने मूसा से कहा, कि मैं यहोवा हूं।

निर्गमन 6:3 मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ।

निर्गमन 6:4 और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात कनान देश जिस में वे परदेशी हो कर रहते थे, उसे उन्हें दे दूं।

निर्गमन 6:5 और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है।

निर्गमन 6:6 इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा,

निर्गमन 6:7 और मैं तुम को अपनी प्रजा बनाने के लिये अपना लूंगा, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया।

निर्गमन 6:8 और जिस देश के देने की शपथ मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से खाई थी उसी में मैं तुम्हें पहुंचाकर उसे तुम्हारा भाग कर दूंगा। मैं तो यहोवा हूं।

निर्गमन 6:9 और ये बातें मूसा ने इस्राएलियों को सुनाईं; परन्तु उन्होंने मन की बेचैनी और दासत्व की क्रूरता के कारण उसकी न सुनी।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू 22-24
  • लूका 3

गुरुवार, 25 मार्च 2021

आशीष

 

          मैं अपनी सहेली और उसके नाती-पोतों के साथ टहलने के लिए निकली थी। छोटे बच्चों को बैठाकर चलने वाली पहिया गाड़ी को धक्का देते समय, मेरी सहेली ने कहा कि उसका चलना व्यर्थ हो रहा है क्योंकि उसके द्वारा चलने में उठाए गए कदमों की संख्या गिनी नहीं जा रही है। उसने अपनी कलाई पर हाथ-घड़ी के समान एक यंत्र पहना हुआ था जो चलने में हाथों के आगे पीछे हिलने के द्वारा चले गए कदमों की गिनती करता रहता था। अब क्योंकि उसके हाथ उस बच्चा-गाड़ी को धक्का देने के लिए गाड़ी पर थे, इसलिए वह चल तो रही थी, किन्तु हाथ आगे-पीछे न हिलने के कारण उसके द्वारा उठाए गए कदमों की संख्या कहीं दर्ज नहीं की जा रही थी। मैंने उसे ध्यान दिलाया कि चाहे कदमों की संख्या दर्ज न हो रही हो, फिर भी उसके चलने से होने वाला लाभ तो उसके शरीर को हो ही रहा है। उसने हँसते हुए कहा, “हाँ, यह तो है; किन्तु मुझे निर्धारित संख्या पूरी करने पर मिलने वाले सुनहरे सितारे के निशान रूपी प्रतिफल को पाने की बहुत लालसा है।”

          मैं समझ सकती हूँ कि उसे कैसा लग रहा होगा! बिना तुरंत उसके भले परिणाम प्राप्त किए, किसी उद्देश्य के लिए कार्य करते चले जाना, निराशाजनक हो सकता है। किन्तु यह आवश्यक भी नहीं है कि प्रतिफल हमेशा ही तुरंत मिल जाएँ, या दिखाई देने वाले हों।

          जब ऐसा होता है तो यह भावना आ जाना सहज होता है कि जो भले कार्य हम कर रहे हैं वे व्यर्थ है; वह चाहे किसी मित्र की सहायता करना, या किसी अजनबी की भलाई करना ही क्यों न हो। लेकिन हमें पौलुस द्वारा गलातिया के मसीही विश्वासियों को लिखी गई बात को स्मरण रखना चाहिए कि “मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा” (गलातियों 6:7)। इसलिए हमें “हम भले काम करने में साहस न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे” (पद 9)। भलाई करना, उद्धार पाने का मार्ग तो नहीं है, और न ही पौलुस ने यह लिखा है कि हम जो बो रहे हैं उसका प्रतिफल अभी इस पृथ्वी पर ही प्राप्त करेंगे या परलोक में; परन्तु हम इस बात से आश्वस्त हो सकते हैं चाहे यहाँ, या वहाँ, या दोनों ही स्थानों में, लेकिन आशीष की कटनी काटेंगे अवश्य।

          भलाई करना अपने आप में कठिन कार्य है, विशेषकर तब जब हम न तो देख सकते हैं कि प्रतिफल क्या होगा, और न यह जान सकते हैं कि वह कहाँ पर मिलेगा। परन्तु जिस प्रकार से मेरी सहेली को अपने टहलने का प्रतिफल मिला तो अवश्य, चाहे उसकी गिनती कहीं दर्ज नहीं हो सकी, उसी प्रकार से हमें भी आशीष का प्रतिफल मिलेगा अवश्य – यह निश्चित है। - जूली स्क्वाब

 

सभी प्रतिफल तुरंत और दिखाई देने वाले नहीं होते हैं।


सो हे मेरे प्रिय भाइयों, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है। - 1 कुरिन्थियों 15:58

बाइबल पाठ: गलातियों 6:7-10

गलातियों 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।

गलातियों 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा।

गलातियों हम भले काम करने में साहस न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।

गलातियों 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू 19-21
  • लूका 2:25-52

बुधवार, 24 मार्च 2021

संगीत

 

          बीसवीं सदी के आरंभिक समय में इंग्लैंड में हुए वेल्श मसीही-पुनर्जागरण के समय में बाइबल शिक्षक और लेखक जी. कैम्पबेल मॉर्गन ने जो होते हुए देखा, उसका वर्णन किया। उनका मानना था कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा, “पवित्र भजनों की उफनती हुई लहरों” पर होकर लोगों में कार्य कर रहा था। मॉर्गन ने लिखा कि उन्होंने उन सभाओं में संगीत के एकता लाने वाले प्रभाव को देखा था, जिन में स्वेच्छा से प्रार्थना करना, पाप अंगीकार करना, और भजन गाना प्रोत्साहित किया जाता था। यदि कोई भावनाओं में बहकर बहुत लंबी प्रार्थना करने लगता था, या ऐसा बोलने लगता था जो उस माहौल में औरों के साथ तालमेल नहीं रखता था, तो कोई भी जन धीरे से कोई भजन गाना आरंभ कर देता था। धीरे धीरे अन्य लोग भी उस भजन के गाने में जुड़ते चले जाते थे, और शीघ्र ही उस संगीत की आवाज़ इतनी ऊँची हो जाती थी कि उस में अन्य सभी आवाजें दब जाती थीं।

          मॉर्गन ने संगीत के द्वारा जिस पुनः जागृत होने का वर्णन किया है, उसका आधार परमेश्वर के वचन बाइबल में से है, जहाँ पर संगीत की कई बातों में प्रमुख भूमिका दिखाई गई है। बाइबल में हम देखते हैं कि संगीत का प्रयोग विजय के उत्सव मनाने के लिए किया गया (निर्गमन 15:1-21); आराधना के साथ मंदिर के परमेश्वर को समर्पित किए जाने के लिए किया गया (2 इतिहास 5:12-14); और शत्रुओं पर विजयी होने के लिए सैनिक रणनीति के समान किया गया (2 इतिहास 20:21-23)। बाइबल के ठीक मध्य में हम 150 भजनों के संकलन की पुस्तक, भजन संहिता, को पाते हैं। और पौलुस ने इफिसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें एक दूसरे के साथ वार्तालाप में भी भजनों का प्रयोग करने के लिए लिखा (इफिसियों 5:19)।

          चाहे संघर्ष हों, चाहे आराधना करनी हो, जीवन की चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न हो, हमारे मसीही विश्वास का संगीत हम सभी को एक स्वर में होकर बोलने वाला बना सकता है। नए और पुराने गीतों और भजनों के द्वारा, हम बारंबार पुनः जागृत किए जाते हैं – न तो बल से, न शक्ति से, परन्तु परमेश्वर के आत्मा और परमेश्वर की स्तुति के संगीत के द्वारा। - मार्ट डीहान

 

जिनके पास सुनने के कान हों, उनके लिए पवित्र आत्मा के पास उपयुक्त संगीत है।


और आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के सामने गाते और कीर्तन करते रहो। - इफिसियों 5:19

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 5:7-14

2 इतिहास 5:7 तब याजकों ने यहोवा की वाचा का सन्दूक उसके स्थान में, अर्थात भवन की भीतरी कोठरी में जो परम पवित्र स्थान है, पहुंचा कर, करूबों के पंखों के तले रख दिया।

2 इतिहास 5:8 सन्दूक के स्थान के ऊपर करूब तो पंख फैलाए हुए थे, जिससे वे ऊपर से सन्दूक और उसके डंडों को ढांपे थे।

2 इतिहास 5:9 डण्डे तो इतने लम्बे थे, कि उनके सिरे सन्दूक से निकले हुए भीतरी कोठरी के सामने देख पड़ते थे, परन्तु बाहर से वे दिखाई न पड़ते थे। वे आज के दिन तक वहीं हैं।

2 इतिहास 5:10 सन्दूक में पत्थर की उन दो पटियाओ को छोड़ कुछ न था, जिन्हें मूसा ने होरेब में उसके भीतर उस समय रखा, जब यहोवा ने इस्राएलियों के मिस्र से निकलने के बाद उनके साथ वाचा बान्‍धी थी।

2 इतिहास 5:11 जब याजक पवित्रस्थान से निकले ( जितने याजक उपस्थित थे, उन सभों ने तो अपने अपने को पवित्र किया था, और अलग अलग दलों में हो कर सेवा न करते थे;

2 इतिहास 5:12 और जितने लेवीय गवैये थे, वे सब के सब अर्थात पुत्रों और भाइयों समेत आसाप, हेमान और यदूतून सन के वस्त्र पहने झांझ, सारंगियां और वीणाएँ लिये हुए, वेदी के पूर्व की ओर खड़े थे, और उनके साथ एक सौ बीस याजक तुरहियां बजा रहे थे।)

2 इतिहास 5:13 तो जब तुरहियां बजाने वाले और गाने वाले एक स्वर से यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, और तुरहियां, झांझ आदि बाजे बजाते हुए यहोवा की यह स्तुति ऊंचे शब्द से करने लगे, कि वह भला है और उसकी करुणा सदा की है, तब यहोवा के भवन में बादल छा गया,

2 इतिहास 5:14 और बादल के कारण याजक लोग सेवा-टहल करने को खड़े न रह सके, क्योंकि यहोवा का तेज परमेश्वर के भवन में भर गया था।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू 16-18
  • लूका 2:1-24

मंगलवार, 23 मार्च 2021

भरोसा

 

          नवम्बर 2016 में एक बहुत ही कम दिखाई देने वाली अद्भुत खगोलीय घटना हुई – चन्द्रमा अधिक बड़ा और तेज़ चमकता हुआ दिखाई दिया। पृथ्वी के चारों और घूमने की अपनी परिधि में चाँद साठ वर्षों में पहली बार पृथ्वी के निकट से होकर निकला, और इसलिए सामान्य से अधिक बड़ा तथा अधिक चमकीला दिखाई दिया। परन्तु मेरे लिए तो उस दिन आकाश अंधियारा ही रहा – मेरे रहने के स्थान के ऊपर घने बादल छाए हुए थे, इसलिए मैं तो केवल भरोसा ही कर सकी कि चाँद वैसा ही दिख रहा होगा जैसा अन्य स्थानों से मेरे मित्रों ने उसकी फोटो लेकर मुझे भेजी थीं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपने मसीही विश्वास के जीवन में अनेकों कठिनाइयों और परेशानियों का सामना किया था; किन्तु उसका दृष्टिकोण यही थी कि जो अभी अदृश्य है, वह चिरस्थाई है, अनन्तकाल तक बना रहेगा। उसने कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा, “क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है” (2 कुरिन्थियों 4:17)। इस प्रकार से वह अपनी दृष्टि “देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं” पर लगाए रख सका क्योंकि जो अनदेखा है, वह अनन्त और चिरस्थाई भी है (पद 18)। पौलुस की लालसा थी कि कोरिन्थ के उन मसीही विश्वासियों का, और हमारा मसीही विश्वास भी, और अधिक बढ़े तथा उन्नति कर सके। और चाहे हमें अपने मसीही विश्वास के लिए दुःख भी उठाने पड़ें, फिर भी हम उस के समान परमेश्वर में भरोसा बनाए रखें। हम आज चाहे परमेश्वर को अपनी शारीरिक आँखों से देख नहीं पा रहे हैं, परन्तु हमारा भरोसा है कि वह हमें दिन-प्रति-दिन और नया एवं बेहतर करता जा रहा है (पद 16)।

          उस दिन जब उस चाँद को देखने की लालसा से मैं बादलों की ओर देख रही थी, यह जानते हुए कि चाहे मुझे वह अद्भुत चाँद दिखा नहीं रहा है किन्तु वह विद्यमान है, तब मुझे यह भी ध्यान आया कि इसी प्रकार से परमेश्वर चाहे दिखाई न दे, किन्तु हमारे साथ विद्यमान है। और मेरी आशा है कि अगली बार जब मैं यह सोचने के प्रलोभन में पड़ूँ कि परमेश्वर मुझसे कहीं दूर और मेरी परिस्थिति से अनभिज्ञ है, तब मैं अपना ध्यान अदृश्य पर लगाऊँ और उसकी मेरे साथ उपस्थिति पर भरोसा बनाए रखूँ। - एमी बाउचर पाई

 

चाहे हम परमेश्वर की उपस्थिति अनुभव करें या न करें, वहाँ सदा अपने बच्चों के साथ बना रहता है।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:13-18

2 कुरिन्थियों 4:13 और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय में लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं।

2 कुरिन्थियों 4:14 क्योंकि हम जानते हैं, जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने सामने उपस्थित करेगा।

2 कुरिन्थियों 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।

2 कुरिन्थियों 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।

2 कुरिन्थियों 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।

2 कुरिन्थियों 4:18 और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56

सोमवार, 22 मार्च 2021

अनुग्रह

 

          जनवरी 30, 2018 को मलकॉल्म एलेग्जेंडर को निरपराध और स्वतंत्र घोषित किया जाकर, जेल में लगभग अड़तीस वर्ष बिताने के बाद, रिहा कर दिया गया। डीएनए के प्रमाण के द्वारा एलेग्जेंडर पर लगे अभियोग हटाए जा सके, यद्यपि इस सारे समय एलेग्जेंडर यह कहता रहा था कि वह दोषी नहीं है। उसके विरुद्ध चली जाँच और न्यायालय की प्रक्रिया में कई खामियाँ थीं – सरकारी वकील अयोग्य था (वह बाद में पद से बरखास्त कर दिया गया था), जो प्रमाण प्रस्तुत किए गए वो संदेहास्पद थे, जाँच करने के लिए जिन तरीकों को अपनाया गया वो भी ठीक नहीं थे। इन सभी का परिणाम यही हुआ कि एक निर्दोष व्यक्ति को दोषी बताया गया और जेल में डाल दिया गया, जहाँ पर वह लगभग चर दशक तक पड़ा रहा। अन्ततः जब उसे मुक्त किया गया, तो एलेग्जेंडर ने अद्भुत अनुग्रह दिखाते हुए कहा, “आप क्रोधित नहीं हो सकते हैं; क्रोधित होने के लायक समय ही नहीं है।”

          एलेग्जेंडर के शब्दों से गहरे अनुग्रह का प्रमाण मिलता है। यदि अन्याय पूर्वक हम से हमारे जीवन के अड़तीस वर्ष छीन लिए जाते, और हमारी इज्ज़त बर्बाद कर दी जाती, तो संभवतः हम अवश्य ही खिसियाए हुए और क्रोधित होते। यद्यपि एलेग्जेंडर ने अनेकों लम्बे, दिल तोड़ने वाले वर्ष अपने ऊपर जबरन थोपे गए अनुचित दोष का बोझ उठाए और उनके अनुचित परिणाम भोगते हुए बिताए थे, किन्तु वह उस अन्याय के कारण टूट नहीं गया। बजाए इसके कि वह अपनी शक्ति बदला लेने में लगाता, उसने परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना अधिक उचित और उपयुक्त समझा। अपने मसीही विश्वास के कारण अनुचित और अन्यायपूर्ण सताव और ताड़ना झेल रहे लोगों को पतरस ने अपनी पहली पत्री में लिखा, “बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो” (1 पतरस 3:9)।

          पवित्र शास्त्र इससे एक कदम और आगे जाता है, जब पतरस इससे आगे लिखता है कि प्रतिशोध की बजाए हम मसीही विश्वासियों को अपने सताने वालों को आशीष देनी चाहिए (पद 9)। जिन्होंने हमारे साथ अनुचित और अन्यायपूर्ण व्यवहार किया है, हमें उनकी ओर क्षमा और उनकी भलाई की कामना का भाव रखना चाहिए। ऐसा करने से हम उनके अनुचित कार्यों को उचित नहीं ठहराते हैं, वरन परमेश्वर के अनुग्रह और प्रेम से उनका परिचय करवाते हैं। कलवरी के क्रूस पर प्रभु यीशु मसीह ने हमारी बुराइयों और पापों के दोष को अपनी ऊपर ले लिया और उनका दण्ड सह लिया, जिससे कि हम परमेश्वर के अनुग्रह के न केवल भागी हों, वरन उसे औरों तक पहुँचाए भी – उन तक भी जिन्होंने हमारे प्रति अनुचित किया है। - विन्न कोलीएर

 

हे परमेश्वर अपने सताने वालों के लिए उनके किए के अनुसार 

सताने की कामना न करना बहुत कठिन होता है; 

मेरी सहायता करें कि मैं आपके अनुग्रह और दया को जी कर दिखा सकूँ।


परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। - मत्ती 5:44

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-14

1 पतरस 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करुणामय, और नम्र बनो।

1 पतरस 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।

1 पतरस 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे।

1 पतरस 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्न में रहे।

1 पतरस 3:12 क्योंकि प्रभु की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।

1 पतरस 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है?

1 पतरस 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56