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शनिवार, 19 मई 2018

महान साहित्य



   हाल ही में मैंने एक लेख पढ़ा जिसमें समझाया गया था कि महान साहित्य के गुण क्या होते हैं। लेखक का कहना था कि महान साहित्य वह है जो “आपके अन्दर परिवर्तन लाता है; उसे पढ़ने और स्वीकार करने के बाद, आप एक भिन्न व्यक्ति हो जाते हैं।”

   इस परिभाषा की कसौटी पर, परमेश्वर का वचन बाइबल सदा ही “महान साहित्य” रहेगी। बाइबल को पढ़ना हमें बेहतर बनने के लिए चुनौती देता है। बाइबल के नायकों की जीवनियाँ और घटनाएँ हमें साहसिक तथा दृढ़ एवँ धैर्यवान बनने की प्रेरणा देती हैं। उसमें की बुद्दिमता तथा भाविष्यद्वकताओं की पुस्तकें हमें अपने पतित स्वभाव के अनुसार जीवन बिताने के खतरे से आगाह करती हैं। परमेश्वर ने कुछ लोगों के द्वारा हमारे मार्गदर्शन के लिए भजन लिखवाए हैं। प्रभु यीशु मसीह की शिक्षाएँ हमारे चरित्र और व्यवहार को प्रभु के चरित्र एवँ व्यवहार के अनुरूप ढालने के लिए प्रेरित करती हैं। पौलुस तथा अन्य प्रेरितों की लिखी पत्रियां एवँ पुस्तकें पवित्र जीवन जीने के लिए हमारे हृदयों को तैयार करती हैं, मार्ग दिखाती हैं। जब हम बाइबल अध्ययन में समर्पण के साथ प्रभु परमेश्वर के चरणों में बैठते हैं, उससे व्यावहारिक जीवन के लिए समझ-बूझ माँगते हैं, तो परमेश्वर का पवित्र-आत्मा बाइबल की इन बातों और गुणों को हमारे जीवनों में कार्यकारी करता है और हमारे जीवनों को परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप जीवन में बदलने का कार्य करता है।

   भजन 119 के लेखक ने परमेश्वर के वचन तथा उसके प्रभावों पर यह भजन लिखा है। उसने पहचाना कि मूसा द्वारा दिए गए प्राचीन लेखों से लेकर बाद तक के परमेश्वर के वचन के सभी भाग उसे अपने शिक्षकों से भी अधिक बुद्धिमान और समझदार बनाते हैं (पद 99); उसे बुराई से बचाए रखते हैं (पद 101)। इसलिए इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि भजनकार ने  कहा, “अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है”; तथा “तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!” (पद 97, 103)।

   महान साहित्य के प्रति प्रेम के आनन्द में; विशेषकर परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन की आशीषों में आपका स्वागत है। - जो स्टोवेल


परमेश्वर का पवित्र-आत्मा, परमेश्वर के वचन बाइबल के द्वारा, 
परमेश्वर के लोगन के जीवनों को संवारता और सुधारता है।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमुथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: भजन 119:97-104
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है।
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं।
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है।
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं।
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं।
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है।
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 6:22-44



शुक्रवार, 18 मई 2018

रोटी



   मैंने प्रभु की प्रार्थना करना अपने बचपन में ही, प्रात्मिक विद्यालय के छात्र होने के समय में सीख लिया था। वह प्रार्थना बोलते समय, मैं जब भी उसकी पंक्ति, “हमारी दिन भर की रोटी हर दिन हमें दिया कर” (लूका 11:3) पर आता, तो मेरा ध्यान अवश्य ही उस पावरोटी पर चला जाता जिसे खाने का अवसर हमें कम ही मिलता था। हमें वह पावरोटी तब ही खाने को मिलती थी जब पिताजी शहर के दौरे से लौटते समय उसे साथ लेकर आते थे। इसलिए परमेश्वर से रोज की रोटी देने की प्रार्थना करना मेरे लिए प्रासंगिक प्रार्थना थी।

   वर्षों बाद जब मैंने पुस्तिका Our Daily Bread को देखा तो मैं बहुत उत्सुक्त हुआ। मैं यह तो समझ गया कि उस पुस्तिका का यह शीर्षक प्रभु की प्रार्थना से आया था, साथ ही मैं यह भी समझा गया कि उस पुस्तिका में रोटी पकाने वालों की दुकान से आने वाले पावरोटी के बारे में तो नहीं लिखा होगा। जब मैंने उसे नियमित पढ़ना आरंभ किया तब मैं समझने पाया कि उसका शीर्षक “रोटी” से कैसे संबंधित था। उस पुस्तिका में दिए गए लेख और परमेश्वर के वचन बाइबल के खण्ड हमारी आत्मा के लिए आत्मिक भोजन हैं, इसी लिए वह रोज़ की रोटी थी।

   बाइबल के नए नियम खण्ड में प्रभु यीशु के साथ घटी एक घटना में भी हम इस आत्मिक भोजन के महत्व को देखते हैं। प्रभु यीशु को मार्था और मरियम ने अपने घर में आमंत्रित किया। मरियम ने आत्मिक भोजन ग्रहण करना चुना और प्रभु के चरणों पर बैठकर ध्यान से उनकी बातें सुनने लगी; जबकि उसकी बहन मार्था शारीरिक भोजन और आव-भगत में लगकर थक गई, खिसिया गई। इस बात को लेकर प्रभु ने मार्था को समझाया कि जो मरियम ने चुना वह ही उत्तम तथा चिरस्थाई था (लूका 10:42)।

   हम भी अपने दिनचर्या में प्रभु यीशु के साथ बिताने के लिए समय निकालना आरंभ करें। प्रभु यीशु हमारे लिए जीवन की रोटी है (यूहन्ना 6:35); केवल वही है जो आत्मिक भोजन से हमारे हृदयों को पोषित कर सकता है, संतुष्ट कर सकता है। - लॉरेंस दरमानी


आत्मिक पोषण और संतुष्टि के लिए जीवन की रोटी प्रभु यीशु मसीह को 
अपने जीवन का दैनिक भाग बना लीजिए।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: लूका 10:38-11:4
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी।
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे।
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है।
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।
Luke 11:1 फिर वह किसी जगह प्रार्थना कर रहा था: और जब वह प्रार्थना कर चुका, तो उसके चेलों में से एक ने उस से कहा; हे प्रभु, जैसे यूहन्ना ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखलाया वैसे ही हमें भी तू सिखा दे।
Luke 11:2 उसने उन से कहा; जब तुम प्रार्थना करो, तो कहो; हे पिता, तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए।
Luke 11:3 हमारी दिन भर की रोटी हर दिन हमें दिया कर।
Luke 11:4 और हमारे पापों को क्षमा कर, क्योंकि हम भी अपने हर एक अपराधी को क्षमा करते हैं, और हमें परीक्षा में न ला।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 6:1-21



गुरुवार, 17 मई 2018

बढ़ने का समय



   डेब्बी के नए घर में, उसे रसोई के एक कोने में पड़ा एक सूखा-मुरझाया हुआ पौधा मिला। उसके सूखे और बदहाल पत्तों से आभास हो रहा था कि वह मौथ ऑर्किड का पौधा है, और डेब्बी ने कल्पना की कि जब उसमें फूल आएँगे तो वह कितना सुन्दर दिखाई देगा। उसने पौधे के गमले को उठाकर खिड़की के पास रखा, जहाँ उसे हवा और धूप लग सके, पुराने पत्तों को काट कर हटा दिया, उसे नियमित पानी देने लगी, और उसकी जड़ों में उपयुक्त खाद लाकर डाल दी। वह कई सप्ताह तक उस पौधे की ऐसे ही देखभाल करती रही, परन्तु उसमें से कोई भी नई कोंपलें निकलती नहीं दिखाई दीं। तब उसने अपने पति से कहा, मैं एक माह और प्रतीक्षा एवँ प्रयास करूँगी; अगर तब तक इसमें कुछ नहीं हुआ तो फिर यह फेंक दिया जाएगा।

   एक माह पश्चात, जब निर्णय लेने का समय आया, तो डेब्बी को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ, पौधे में दो नई कोंपलें दिखनी आरंभ हो गईं थी! जिस पौधे को वह मरा हुआ समझ बैठी थी, वह जीवित था, और पनपने लगा था।

   क्या अपनी आत्मिक बढ़ोतरी को लेकर क्या आप निराश हो जाते हैं? हो सकता है कि आप अति शीघ्र क्रोधित हो जाते हों, या कुछ मसालेदार चटपटी बातों में मज़ा लेते रहते हों, जिन्हें फिर आगे किसी और को सुनाने से अपने आप को रोक नहीं पाते हैं। या हो सकता है कि बहुत प्रयास करने की बाद भी आप परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने तथा उसपर मनन करने के लिए प्रातः समय से न उठ पाते हों।

   क्यों न अपने किसी विश्वासयोग्य मित्र को इसके बारे में बताएँ और उससे निवेदन करें कि वह आपके लिए प्रार्थना करे, आपको प्रोत्साहित करे, ज़िम्मेदार होने के लिए उभारे। धैर्य रखें। पवित्र-आत्मा को कार्य करने का समय दें, वह आपके अन्दर नए जीवन का संचार करेगा, आत्मिक बढ़ोतरी आएगी। प्रार्थना और धैर्य के साथ अपने बढ़ने के समय की प्रतीक्षा करें। - मेरियन स्ट्राउड


विश्वास में उठाया गया प्रत्येक छोटा कदम भी बढ़ोतरी के लिए एक महान कदम है।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: गलतियों 6:1-10
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे।
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा।
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 5:25-47



बुधवार, 16 मई 2018

भला



   मेरी सहेली ने मुझ से कहा, “मुझे नहीं लगता कि परमेश्वर भला है।” उसे अपने जीवन से संबंधित कुछ कठिन बातों के बारे में प्रार्थना करते हुए अनेकों वर्ष हो गए थे, परन्तु कुछ नहीं बदला था। परमेश्वर की चुप्पी को लेकर उसका क्रोध और कड़ुवाहट बढ़ते जा रहे थे। मैं उसे भली-भांति जानती थी, इसलिए मैं अनुभव कर सकती थी कि अपने मन की गहराईयों में वह मानती थी कि परमेश्वर भला है, परन्तु उसके मन में लगातार बनी हुई पीड़ा, और उसके प्रति परमेश्वर की प्रतीत होने वाली उदासीनता उसके मन में शंका उत्पन्न कर रही थी। उसके लिए अपनी उदासी को सहन करते रहने से अधिक सरल, अपनी परिस्थितियों के लिए क्रोधित हो जाना था।

   परमेश्वर की भलाई पर शक करना आदम और हव्वा जितना पुराना है (उत्पत्ति 3)। यही विचार सर्प ने हव्वा के मन में डाला था, जब उसने हव्वा को सुझाया कि परमेश्वर उन्हें फल खाने से इसलिए रोक रहा है क्योंकि, “परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे”(पद 5)। अपने अहम में फंस कर आदम और हव्वा ने सोचा कि उनके लिए क्या भला है और क्या बुरा, इसे निर्धारित करने का अधिकार स्वयं उन्हें है, न कि परमेश्वर को।

   अपनी पुत्री की मृत्यु के वर्षों पश्चात,जेम्स ब्रायन स्मिथ ने जाना कि वह परमेश्वर की भलाई की पुष्टि कर सकता है। अपनी पुस्तक The Good and Beautiful God में स्मिथ ने लिखा, “परमेश्वर की भलाई पर निर्णय मैं नहीं ले सकता हूँ। मैं तो मनुष्य हूँ और मेरी समझ बहुत सीमित है।” स्मिथ की यह अद्भुत टिप्पणी भोलेपन से नहीं है; वरन वर्षों तक अपनी पीड़ा पर विचार करते रहने और परमेश्वर के मन को जानने के गहन प्रयास का परिणाम है।

   निराशा के समयों में, हम एक-दूसरे की सुनें, और एक दूसरे को प्रोत्साहित करें कि हम इस सच्चाई पर बने रह सकें कि परमेश्वर भला है। - ऐनी सेटास


यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है। - भजन 145:9

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-8
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस वाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना?
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस वाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं।
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष वाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे,
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया।
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।
Genesis 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय वाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी वाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 24-25
  • यूहन्ना 5:1-24



मंगलवार, 15 मई 2018

देख-भाल


अनुभवी संवाददाता, स्कॉट पेल्ले जब भी किसी यात्रा पर निकलते हैं तो अपने साथ कुछ वस्तुओं को अवश्य ही लेकर चलते हैं – शोर्ट-वेव रेडियो, कैमरा, न टूटने वाला सूटकेस, लैप-टॉप कम्प्यूटर, फोन, और आकस्मिक स्थित में उनके स्थान को बताने वाला यंत्र जो कहीं भी काम कर सकता है। उन्हें इस यंत्र के एंटीना को खोलकर दो बटन दबाने होते हैं और वह यंत्र उनकी उपस्थिति की जानकारी नैशनल ओशैनिक एण्ड ऐटमौस्फियारिक एडमिनिस्ट्रेशन के पास सैटलाईट सिग्नल के माध्यम से भेजा देता है। इस जानकारी में वे कौन हैं, तथा कहाँ पर और किस देश में हैं का विवरण होता है। जिस देश में वे उस समय हों, उसके अनुसार यदि संभव होता है तो वहाँ उन्हें बचाने के लिए बचाव टीम भेजी जाती है। पेल्ले को कभी इस यंत्र को प्रयोग करने का अवसर नहीं हुआ है, परन्तु वे इसके बिना कभी यात्रा नहीं करते हैं।

   परन्तु जब परमेश्वर के साथ हमारे संबंध और संपर्क की बात आती है तो हमें रेडियो, फोन, या इमरजेंसी यंत्रों की आवश्यकता नहीं होती है। हमारी परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विकट क्यों न हों, वह सदा यह जानता है कि हम कौन हैं, कहाँ हैं, और किस हाल में हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने इस बात के संबंध में लिखा, “हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है। तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है” (भजन 139:1-3)। न तो हमारी आवश्यकताएँ परमेश्वर से कभी छिपी रहती हैं और ना ही हम कभी उसकी देख-भाल से दूर होते हैं।

   आज हम पूर्ण विश्वास के साथ भजनकार के साथ यह कह सकते हैं कि, “यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा” (पद 9-10)। प्रभु परमेश्वर भली-भांति जानता है कि हम कौन हैं, कहाँ हैं, और हमारी आवश्यकताएँ क्या हैं।

   हम अपनी देख-भाल के लिए उसपर पूरा भरोसा रख सकते हैं। -डेविड मैक्कैस्लैंड


हम सदा परमेश्वर की नज़रों में रहते हैं।

यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। - नीतिवचन 15:3

बाइबल पाठ: भजन 139:1-18
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा,
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं।
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।
Psalms 139:17 और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।
Psalms 139:18 यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 22-23
  • यूहन्ना 4:31-54


सोमवार, 14 मई 2018

कार्य



   बीच दोपहर का समय था, प्रभु यीशु पैदल यात्रा से थके हुए, याकूब के कुएँ के निकट बैठ गए। उनके शिष्य भोजन लाने के लिए वहीं स्थित सूखार नगर को चले गए। कुएँ से पाने लेने के लिए एक महिला नगर से निकल कर आई ... और वहाँ उसने अपने मसीहा को पा लिया। परमेश्वर के वचन बाइबल का यह वृतान्त आगे बताता है कि प्रभु यीशु से बातचीत करने के तुरंत बाद वह महिला नगर को गई और प्रभु यीशु की बातें सुनने के लिए उसने वहाँ के लोगों को यह कहते हुए आमंत्रित किया “आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है?” (यूहन्ना 4:29)।

   प्रभु के शिष्य भी भोजन लेकर वापस कुएँ पर आ गए। जब शिष्यों ने प्रभु से आग्रह किया कि वे भी भोजन करें, तो प्रभु ने उन्हें उत्तर दिया, “...मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं” (पद 34)। अब मेरा आपसे एक प्रश्न है – उस समय प्रभु यीशु भला क्या कार्य कर रहे थे? वे तो कुएँ के निकट बैठे विश्राम तथा प्रतीक्षा कर रहे थे।

   मुझे इस घटना से बहुत प्रोत्साहन मिलता है, क्योंकि मैं भी शारीरिक दुर्बलताओं के साथ जीवन व्यतीत कर रहा हूँ। यह खण्ड मुझे बताता है कि प्रभु के लिए उपयोगी होने के लिए मुझे इधर-उधर भागा-दौड़ी करने की आवश्यकता नहीं है; उसकी इच्छा को पूरा करने, उसके लिए कार्य करने के लिए चिन्तित रहने की आवश्यकता नहीं है। जीवन के इस भाग में आकर, मैं विश्राम और प्रतीक्षा कर सकता हूँ और मेरा परमेश्वर पिता मेरे लिए उपयुक्त कार्य मेरे पास स्वयं लेकर आएगा।

   इसी प्रकार आपके लिए भी आपका छोटा सा निवास-स्थान, आपका सीमित कार्य-स्थल, आपका बंदीगृह का कमरा, या आपका अस्पताल का बिस्तर ही आपके लिए ‘याकूब का कूआँ’ बन सकता है – एक विश्राम और प्रतीक्षा का स्थान, जहाँ परमेश्वर पिता आपके पास आपके लिए उपयुक्त कार्य को लेकर आएगा, आपको अपने लिए इस्तेमाल करेगा। न जाने आज किसे वह आपके पास ले आए? – डेविड रोपर


यदि आपको परमेश्वर के लिए कार्य-स्थल चाहिए, तो आपने आस-पास देखिए।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:4-14
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था।
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था।
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई।
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 19-21
  • यूहन्ना 4:1-30



रविवार, 13 मई 2018

त्यागा नहीं



   अपनी माँ के 50वें जन्मदिन के उत्सव के समय, सैंकड़ों लोगों की उपस्थिति में, पहलौठी बेटी कुकुआ ने लोगों को बताया कि उसकी माँ ने उसके लिए क्या कुछ किया था। समय बहुत कठिन थे, घर में पैसे की कमी थी, परन्तु पिता के न होते हुए भी, उसकी एकल माँ ने अपने व्यक्तिगत आराम का त्याग किया, अपने जेवर और अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ बेचीं और कुकुआ को हाई स्कूल की पढाई करवाई। आँखों में आंसुओं के साथ कुकुआ ने स्मरण किया कि परिस्थितियां चाहे जितनी भी कठिन क्यों न रही हों, उनकी माँ ने अपने बच्चों को कभी नहीं छोड़ा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने अपने लोगों के प्रति अपने प्रेम की तुलना एक माँ के अपने बच्चों के प्रति प्रेम से की। जब अपने विस्थापित होने पर इस्राएल के लोगों को लगा कि परमेश्वर ने उन्हें त्याग दिया है, और उन्होंने शिकायत की, “...यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है”(यशायाह 49:14); तब परमेश्वर ने उत्तर दिया, “क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता” (पद 15)।

   हम जब कठिनाईयों में हों, परिस्थितियाँ समझ में न आ रही हों; समाज, परिवार और मित्रों द्वारा त्यागा हुआ अनुभव करें, तब भी विश्वास रखें कि परमेश्वर हमें कभी नहीं त्यागता है। यह बहुत प्रोत्साहन की बात है कि परमेश्वर हमें यह दिखाने के लिए कि वह हमें कितनी गहराई से जानता, चाहता और हमारी रक्षा करता है, इस बात द्वारा आश्वस्त करता है कि, “देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है” (पद 16)।

   चाहे सँसार के लोग हमें छोड़ दें, त्याग दें, किन्तु परमेश्वर अपने लोगों को कभी नहीं त्यागेगा। - लॉरेंस दरमानी


परमेश्वर कभी नहीं भूलता है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: यशायाह 49:13-21
Isaiah 49:13 हे आकाश, जयजयकार कर, हे पृथ्वी, मगन हो; हे पहाड़ों, गला खोल कर जयजयकार करो! क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है और अपने दीन लोगों पर दया की है।
Isaiah 49:14 परन्तु सिय्योन ने कहा, यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है।
Isaiah 49:15 क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता।
Isaiah 49:16 देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है।
Isaiah 49:17 तेरे लड़के फुर्ती से आ रहे हैं और खण्डहर बनाने वाले और उजाड़ने वाले तेरे बीच से निकले जा रहे हैं।
Isaiah 49:18 अपनी आंखें उठा कर चारों ओर देख, वे सब के सब इकट्ठे हो कर तेरे पास आ रहे हैं। यहोवा की यह वाणी है कि मेरे जीवन की शपथ, तू निश्चय उन सभों को गहने के समान पहिल लेगी, तू दुल्हिन के समान अपने शरीर में उन सब को बान्ध लेगी।
Isaiah 49:19 तेरे जो स्थान सुनसान और उजड़े हैं, और तेरे जो देश खण्डहर ही खण्डहर हैं, उन में अब निवासी न समाएंगे, और, तुझे नष्ट करने वाले दूर हो जाएंगे।
Isaiah 49:20 तेरे पुत्र जो तुझ से ले लिये गए वे फिर तेरे कान में कहने पाएंगे कि यह स्थान हमारे लिये सकेत है, हमें और स्थान दे कि उस में रहें।
Isaiah 49:21 तब तू मन में कहेगी, किस ने इन को मेरे लिये जन्माया? मैं तो पुत्रहीन और बांझ हो गई थी, दासत्व में और यहां वहां मैं घूमती रही, इन को किस ने पाला? देख, मैं अकेली रह गई थी; फिर ये कहां थे?
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 17-18
  • यूहन्ना 3:19-36