ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 23 जनवरी 2010

आकार और बढ़ाइए

आम तौर पर किसी लोकप्रीय होटल में अपने खाने की चीज़ों का ऑर्डर देने के बाद, पैसे लेने वाले क्लर्क अक्सर पूछते हैं "क्या आप अपने चयन को और बढ़ाना चाहते हैं?" उनके पूछने का अर्थ है कि क्या आप अपने ऑर्डर की मात्रा या विविधा बढ़ाना चहते हैं?

शायद जब हम प्रार्थना में परमेश्वर के सामने उपस्थित होते हैं, मेरा विश्वास है, वह पूछता है कि "क्या तू मेरे बारे में अपनी समझ को और विशाल करना चाहता है?"

यशायाह का एक ऐसा अनुभव था। उसके जीवन में एक दुखदाई अनुभव के द्वारा, यशायाह ने प्रभु को "ऊँचे पर विराजमान देखा" (यशायाह ६:१)। इस मुलाकात से परमेश्वर ने यशायह के मन में अपनी पवित्रता का ज्ञान बढ़ाया। उसने परमेश्वर की संपूर्ण नैतिक महानता देखी, जिसमें उसकी दूसरी सब विशेषताएं एकीकृत हुई।

परमेश्वर ने यशायाह का स्वयं का पाप-बोध भी बढ़ाया (पद ५)। इससे परमेश्वर की संपूर्ण पाप क्षमा और पवित्रीकरण के विष्य में भी उसकी समझ बढ़ी (पद ६,७)। जब यशायाह को अपने पापों की गहराई की सच्ची अनुभूति होती है, तभी वह परमेश्वर की क्षमा और शुद्धता ग्रहण कर सका। इस अनुभव ने उसे परमेश्वर के सामने समर्पण करने और उसके द्वारा निर्देशित कार्य को करने के लिए कटिबद्ध कर दिया, जिससे परमेश्वर उसका प्रयोग दूसरों को समझाने और मदद करने में कर सका।

आज हम परमेश्वर से माँगें कि उसकी महानता के विषय में वह हमारी समझ को और बढ़ाए। - मार्विन विलियम्स

परमेश्वर के विष्य में जानना आकर्षक हो सकता है, लेकिन परमेश्वर को व्यक्तिगत रीति से जानना जीवन बदल देता है।

बाइबल पाठ: यशायाह ६:१-२०

जिस वर्ष उज्जियाह राजा मरा, मैं ने प्रभु को बहुत ही ऊंचे सिंहासन पर विराजमान देखा; और उसके वस्त्र के घेर से मंदिर भर गया।-यशायाह ६:१

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ७,८
  • मत्ती १५:१-२०

शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

विजय का परमेश्वर

यूनानी गाथाओं में नाईकी विजय की देवी थी। नईकी ने ओलिम्पियाई देवतों के पक्ष में सामर्थी टाईटन्स से युद्ध किया और विजय प्राप्त की। नाईकी की सामर्थ केवल युद्ध में ही नहीं प्रकट थी, वह खेल प्रतियोग्यताओं में जीतने के अभिलाषी खिलाड़ियों की भी इष्ट देवी थी। रोमियों ने उसे अपनी पूजा विधानों में स्थान दिया और उसका नाम विक्टोरिया कर दिया।

यूनानी-रोमी संसकृति में विजय को बड़ा महत्त्व मिलता था। इसलिए पौलुस ने मसीही सिद्धांतों की शिक्षा देने को ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जो उसके श्रोता समझते थे। अपने पत्रों में उसने मसीह को विजय की सैनिक यात्रा के नेता के रूप में चित्रित किया (२ कुरिन्थियों २:१४-१७)। उसने मसीही जीवन की तुलना पुराने ओलिम्पिक खेलों के शिक्षण से की (१ कुरिन्थियों ९:२४-२७)।

उसने हमारी हानि करने वालों के प्रति हमारे व्यवहार के संदर्भ में भी ’जीतने’ का प्रयोग किया; उसने कहा "भलाई से बुराई को जीत लो" (रोमियों १२:२१)। इसका अर्थ हुआ कि निंदा को दया से और दुरव्यवहार को शिष्टता से जीत लो। इन दोनो बातों को करने में हम अपनी शक्ति के बल पर प्रेम उत्पन्न नहीं कर सकते; परन्तु मसीह में हमें ऐसा करने की दिव्य सामर्थ मिलती है, जो गैरमसीही नहीं पाते।

यीशु मसीह वास्तव में विजय का परमेश्वर है। - डेनिस फिशर

अगर हम परमेश्वर के पक्ष में युद्ध करते हैं, तो वह हमें जयवन्त करता है।


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों २:१४-१७

बुराई से न हारो, परन्तु भलाई से बुराई को जीत लो। - रोमियों १२:२१

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ४-६
  • मत्ती १४:२२-३६

गुरुवार, 21 जनवरी 2010

परिपूर्ण वाक्य

जब मैं बालिका थी तो प्रतिदिन अपनी डायरी लिखती थी, तब मेरी अभिलाषा एक परिपूर्ण वाक्य बनाने की रहती थी। वह कैसा होगा? उसमें एक अच्छी क्रिया होगी और सुन्दर विशेषण।

परिपूर्ण वाक्य लिखने की मेरी अभिलाषा शायद कभी पूरी नहीं होगी, परन्तु निर्गमन ३:१४ वाक्य में मैंने एक परिपूर्ण कथन देखा। परमेश्वर ने जलती झाड़ी में से मूसा को बुलाया और कहा कि मिस्त्र से इस्त्रालियों को निकाल ले आने को वह चुना गया है (पद १०)। मूसा इस दायित्व के विष्य में बहुत चिंतित था कि अगर इस्त्रायली उसपर सन्देह करें और उससे पूछें कि उसे किसने भेजा तो वह क्या कहेगा?

परमेश्वर ने मूसा से कहा, "मैं जो हूँ सो हूँ" (पद १४)। अपने अनुपम नाम का प्रयोग करके यहोवा ने मूसा को एक वाक्य में अपने अनन्त अस्तित्व का परिचय दिया। आप कह सकते हैं कि यह परिपूर्ण वाक्य है।

बाइबल व्याख्याकर्ता जी. बुश परमेश्वर द्वारा दिए गए अपने परिचय के बारे में लिखते हैं, "वह जो दूसरों से अलग है, एकमात्र सच्चा परमेश्वर है, जो है....अनन्त, स्वयं-भू, अप्रिवर्तनशील परमेश्वर जो हमेशा था और हमेशा रहेगा।"

परमेश्वर कहता है, "मैं जो हूँ सो हूँ"। वह और उसका नाम परिपूर्ण हैं। हमें आदर और भक्ति से उसके सामने सिर झुकाना है। - ऐन्नि सेटास

संपूर्ण्ता खोजते हो? यीशु की ओर देखो।



बाइबल पाठ: निर्गमन ३:१३-१८

हे यहोवा, देवताओं में तेरे तुल्य कौन है? तू तो पवित्रता के कारण महाप्रतापी और अपनी स्तुति करने वालों के भय के योग्य और आश्चर्य कर्म का करता है।-निर्गमन १५:११

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १-३
  • मत्ती १४:१-२१



बुधवार, 20 जनवरी 2010

शिष्टता के नियम

अमेरिका के राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए अगर आपको उनके निवास "व्हाईट हाउस" में जाने का निमंत्रण मिले तो शायद आप अवश्य जाएंगे, चाहे उनके बारे में आपकी राय कुछ भी हो। वहाँ पहले आपसे एक अफसर मिलेगा जो आपको राष्ट्रपति से मिलने के उचित शिष्टाचार के नियम समझाएगा। वह बताएगा के जब आप उनसे मिलें और हाथ मिलाएं तो कोई ओछि हरकत, उनसे नाम मात्र की पहचान का दिखावा या कोई अनुचित आलोचना नहीं करनी है।

परमेश्वर के सन्मुख प्रवेश करने के भी नियम है, जिन्हे परमेश्वर के वचन में स्पष्ट किया गया है। इब्रानियों ११:६ में आपसी उचित संपर्क का एक पहलू दिया गया है। "परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए कि वो है और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है।" परमेश्वर चाहता है कि हम उसके पूरे भक्त हों। अगर हमारे मन में आलोचना, अविश्वास और सन्देह भरे हैं तो वह हम से व्यक्तिगत रूप से दुखी होता है।

याकूब कहता है कि हम परमेश्वर से बुद्धि माँगें तो उसका उत्तर हमारे "विश्वास से माँगने" पर निर्भर है (पद ६)। हम दृढ़ विश्वास के साथ परमेश्वर के पास जाएं तो वह प्रसन्न होता है।

सन्देह छोड़ो और नियमों का अनुसरण करो। विश्वास से भरे हृदय लेकर परमेश्वर से माँगो तो वह प्रसन्न होकर तुम्हें अवश्य बुद्धि देगा। - जो स्टोवैल

सन्देह की अतृप्ति को परमेश्वर पर विश्वास की तृप्ति से अदल-बदल कर लो।

बाइबल पाठ: याकूब १:१-८

विश्वास से मांगे औरे कुछ सन्देह न करे, क्योंकि सन्देह करने वाला समुद्र की लहर की तरह है जो हवा से बहती और उछलती है।- याकूब १:६


एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ४९,५०
  • मत्ती १३:३१-५८

मंगलवार, 19 जनवरी 2010

अद्‍भुत सृष्टि

जॉर्ज मैकडोनल्ड की पुस्तक "डेविड एलगिनब्रोड" का एक उद्धरण उन लोगों को शिक्षा देता है जो सोचते हैं कि उनकी सृष्टि क्यों ऐसी हुई है और जो आग्रह करते हैं कि वे किसी दूसरे के जैसे होते तो कितना अच्छा होता।

एमिली कहती है,"मारग्रेट, काश मैं तुम होती"।

मारग्रेट उत्तर देती है, "मैं अगर आपकी जगह होती तो यही इच्छा करती कि मैं वही होउँ जो परमेश्वर चाहता है। अपनी इच्छा के अनुसार मैं महान जीव नहीं होना चाहती। परमेश्वर के अद्‍भुत विचारों में मेरी सृष्टि हुई, मेरे लिए यह विचार ही सबसे श्रेष्ट और मूल्यवान है।"

मैकडोनल्ड के मन में भजन १३९:१७ रहा होगा, "मेरे लिए तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं।" इस भजन में दाउद अपनी उत्पत्ति के विष्य में सोचता है कैसे परमेश्वर के प्रेम का पात्र होने के लिए वह माता के गर्भ में रचा गया, कैसे एक अनुपम और विशिष्ट व्यक्ति बनाया गया।

यह विचार बहुत सुखदायक है कि हम गल्ती से नहीं बने, परन्तु "परमेश्वर के विचारों में" एक विशेष रूप से उत्पन्न हुए। दाउद का कहना सही है "मैं भयानक और अद्‍भुत रीति से रचा गया हूँ" (पद १४)। तू परमेश्वर के लिए प्रिए महान और मूल्यवान सृष्टि है। - डेविड रोपर

आप अपने समान एक ही हैं, और इसलिए रचे गए हैं कि परमेश्वर की ऐसी महिमा करें, जो केवल आप ही कर सकते हैं।


मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिए कि मैं भयानक और अद्‍भुत रीति से रचा गया हूँ। - भजन १३९:१४

बाइबल पाठ: भजन संहिता १३९:७-१६

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ४३, ४५
  • मत्ती १३:१-३०

सोमवार, 18 जनवरी 2010

असंभव?

बाइबल पाठ: मत्ती ५:३८-४२
तुम सुन चुके हो कि कहा गया था कि आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत। परन्तु मैं तुमसे यह कहता हूँ कि बुरे का सामना न करना। - मत्ती ५:३८, ३९

जब नॉबल पुरुस्कार समिति के प्रधान, गुन्नार जॉन ने, मार्टिन लूथर किंग के १९६४ शांति पुरुस्कार वितरण के समय के भाषण में यीशु के वचनों का हवाला दिया: "जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे उसकी ओर दुसरा भी फेर दे" (मत्ती ५:३९)। गुन्नार जॉन ने कहा "एक अल्पसंख्यक जाति को समानता के संघर्ष में नेतृत्व देने के कारण मार्टिन लूथर किंग को कीर्ति नहीं मिली....उसका नाम संघर्ष चलाने के अपनाए गए तरीके के काराण मशहूर हुआ"।

१९५५ में किंग ने एक साल तक बसों में पृथकत्त्व के विरुद्ध शांतिपूर्वक बहिष्कार का संघर्ष चलाया। उसे उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। उसके घर पर बमबारी की गई। उसपर आक्रमण हुआ और वह गिरिफतार किया गया। उसने कभी बदला नहीं लिया। आखिरकर उसकी हत्या कर दी गई।

डॉ० किंग की शांति का उदाहरण मेरे शरीर के स्वभाव के कितना विपरीत है। मैं तुरंत न्याय और तत्काल बदला चहता हूँ। मैं गलती करने वालों को उनके किये की सज़ा मिल्ती देखना चाहता हूँ, विशेष्तया तब जब गलती मेरे विरुद्ध की गई हो। मैं अपना दूसरा गाल दिखाना कभी भी नहीं चाहता, कि उसको दुसरी बार वार करने का कोई मौका मिले।

हेड्डन रोबिन्सन यीशु के पहाड़ी पर के उपदेशों में (मत्ती ५-७) दिये गए महान मापदण्डों पर टिपण्णी करते हुए कहते हैं कि ये शिक्षाएं "लक्षय हैं, न कि असंभव आदर्ष", यीशु चाहता है कि उसके शिष्य इन लक्ष्यों की तरफ बढ़ने के परिश्रम में अपने नये जीवन को सिद्ध करें।" जीवन के अन्यायों के बीच, हमें दूसरा गाल दिखाने की हिम्मत, विश्वास और शक्ति हो। - टिम गुस्ताफ्सन



बदला न लेने के लिये सच्ची शक्ति की ज़रूरत है।
एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ४६ - ४८
  • मत्ती १३:१-३०

रविवार, 17 जनवरी 2010

समुद्र में भाईचारा

बाइबल पाठ: इफिसियों २:१४-२२

इसलिए तुम अब... पवित्र लोगों के संगी स्वदेशी हो गए। - इफिसीयों २:१९

अगस्त ८, २००५ को संसार ने नाटकीय रीति से बचाए गए सात रूसी नाविकों के बारे में जाना। ये नाविक एक छोटी पन्डुब्बी में थे, जो मछली पकड़ने के जाल में उलझ गई। इन नाविकों ने तीन दिन समुद्र के नीचे की ठंड और अंधेरे में बिताए, उन्हें ज़िन्दा रखने के लिए ६ घंटे से कम समय की ऑकसीजन ही बाकी रह गई थी। ऊपर रूसी, जापानी, ब्रिटिश और अमेरिकन रक्षक उनकी रक्षा करने का मिला जुला प्रयत्न कर रहे थे। अंत में पन्डुब्बी जाल की उलझन से छुड़ाई गई। रूसी सुरक्षा मंत्री ने सब के मिले जुले प्रयास की सराहना की, "हमने शब्दों में नहीं, कामों में समुन्द्र में भाईचारा देखा।"

"इफिसियों" की पत्री में विश्वासियों की यीशु में प्राप्त एकता के बारे में लिखा है, जिसे "परमेश्वर के घराने" (२:१९) की एकता कहा गया है। अन्य जाति के लोग जो कभी मसीह से बेगाने और अजनबी (पद १२) थे, वे अब "मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए" (पद १३)। वे यहूदी भाईयों और बहिनों के साथ एक हुए। मसीही समाज के हर कार्य में यही एकता दिखनी चाहिये।

यीशु के विश्वासियों को एक बहुत ज़रूरी बचाव में लगने के लिये ज़िम्मेदारी दी गई है। यीशु में विश्वास को जाने बिना लोग मर रहे हैं। परमेश्वर की स्तुति हो कि कई मिशन मिलकर संसार भर के निराश लोगों को आशा, उद्धार, शिक्षा और आराम देने का काम कर रहे हैं। मसीह के भाईचारे ऐसे ही मिल जुल कर कार्य करने का नाम है। - डेविड एग्नर


एक स्वस्थ कलीसिया एक दुखी संसार के लिए सर्वोत्तम साक्षी है।
एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ४१, ४२
  • मत्ती १२:१-२३