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शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

ब्लोफिश जैसी पृवर्ती

एक समुद्री मछली - ब्लोफिश, मछुआरों के लिये कोई उपयोगिता नहीं रखती। ब्लोफिश का मुँह तो बड़ा सा होता है लेकिन शरीर जीर्ण चमड़े जैसा दिखने वाला और झुर्रीदार होता है। जब इस उलटा करके उसे ज़रा सा गुदगुदाओ तो वह अपने अन्दर हवा भर कर गेंद की तरह बड़ा सा गोलाकार स्वरूप ले लेती है।

कुछ लोग भी ऐसे ही हो सकते हैं - अपनी बघारने के लिये बड़ा मुँह किंतु अनाकर्षक जीवन। उनकी ज़रा सी प्रशंसा कीजिये, थोड़ा सा उनके अहम को गुदगुदाइये और वे फूल कर कुप्पा हो जाते हैं, घमंड से भर जाते हैं। वे फूली हुई ब्लोफिश के समान ही होते हैं - केवल दिखने में बड़े परन्तु अन्दर से केवल हवा। उनमें कुछ भी सार्थक नहीं होता।

यह व्याधि और भी कई रूप ले लेती है जिनके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं। उदाहरण स्वरूप उन मसीही लोगों को देखिये जिन्हें पौलुस प्रेरित ने १ कुरिन्थियों ५ अध्याय में संबोधित किया - वे व्यभिचार से समझौता करे बैठे थे। अपने मध्य में विद्यमान ऐसे पाप पर दुखी होने कि बजाए, वे उसपर घमंड कर रहे थे (१ कुरिन्थियों ५:२)। यह उनकी आत्मिक अपरिपक्क्वता और उनमें विद्यमान शारीरिकता के लक्षण थे - उन बातों के लिये गर्व करना जिनके लिये दुखी होना चाहिये।

परमेश्वर चाहता है कि हम मसीह में बने रहें न कि घमंड में। परमेश्वर की सन्तान का व्यवहार लगातार वैसा होना चाहिये जैसा पौलुस ने फिलिप्पियों को लिखा था। उसने कहा "विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो।" (फिलिप्पियों २:३)

यदि हम इस बात को गंभीरता से लेंगे और मानेंगे तो हमारे जीवनों में ब्लोफिश जैसी पृवर्ती नहीं होगी। - पौल वैन गौर्डर


हम अपना आकार जितना छोटा करेंगे, अपना काम करने के लिये परमेश्वर को उतना स्थान अधिक मिलेगा।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। - फिलिप्पियों २:३


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१-८

सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
तो मेरा यह आनन्‍द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो।
हर एक अपनी ही हित की नहीं, बरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे।
जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा।
वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १९-२०
  • मत्ती १८:२१-३५

गुरुवार, 27 जनवरी 2011

आपका मार्गदर्शक कौन है?

अंग्रज़ी भाषा की एक मशहूर कविता "Invictus" में एक जगह कहा गया है "अपने भाग्य का स्वामी मैं स्वयं हूं; अपनी आत्मा का मर्गदर्शक भी मैं ही हूं।" यह मनोहर कविता तो हो सकती है परन्तु बहुत खतरनाक विचारधारा है। यदि हम अपने जीवनों को स्वयं नियंत्रित करने का प्रयास करेंगे तो अन्त विनाश ही होगा।

एक युवक लड़कपन से ही नाविक बन गया और अपने इस व्यवसाय में बहुत शीघ्र उन्नति भी प्राप्त करता गया, और कुछ समय में ही उसे एक पानी के जहाज़ का कपतान बना दिया गया। एक यात्रा के अन्त में, जब वह तट के निकट पहुंच रहा था तो एक यात्री, जो पानी के जहाज़ के संचालन की विधियों को जानता था, उसके पास आया और उससे कहा कि "क्या यह बेहतर नहीं होगा कि अभी लंगर डाल कर, बन्दरगाह में प्रवेश करने के लिये सहायता ले ली जाए।" उस युवक कपतान ने कहा "मेरे लिये नहीं। मैं स्वयं अपना संचालक हूं। प्रातः के ज्वार के प्रवाह के साथ मैं बन्दरगाह में प्रवेश कर जाऊंगा।" यह जान कर कि अपनी बात को रखने के लिये उसे शेष दूरी जल्दी तय करनी पड़ेगी, उसने बन्दरगाह में प्रवेश के लिये कम दूरी पर स्थित एक संकरा मुहाना चुना। उसके साथ के अनुभवी नाविकों ने अचंभे में अपना सिर हिलाया, साथ के अन्य यात्रियों ने भी चौड़ा मुहाना चुनने की सलाह दी। लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी, वरन उन पर हंस कर प्रातः के ज्वार के साथ तट पर होने के अपने दावे को दोहरया। प्रातः होने पर वह तट पर तो था, लेकिन उस का जहाज़ टूट गया था और उसका अपना जीवन नष्ट हो गया था, पानी में बहकर उसकी लाश ही तट पर पहुंची थी। इस बड़े और दुखदायी विनाश कारण केवल उसका हठीला दंभ ही था।

समय के सागर पर होकर अनन्तकाल के तट की ओर हमारी जीवन यात्रा भी किसी अनुभवी संचालक की सहायता के बिना बहुत जोखिम से भरी है। उसे ही अपना संचालक बनाईये जो मृत्यु के पार होकर वापस आया है। वह ही इस लोक और परलोक का मार्ग जानता है तथा आपको सुरक्षित पार उतार सकता है। यदि प्रभु यीशु आपका मार्गदर्शक नहीं है तो स्वर्गीय तट पर आपका पहुंचना असंभव है। इस सृष्टि के रचियता के हाथों में अपने इस लोक और परलोक की बागडोर देकर सुरक्षित हो जाईये। - पौल वैन गौर्डर


जो अपना मार्गदर्शन स्वयं करते हैं उनका अनुयायी भी एक मूर्ख ही होता है।

नाश होने से पहिले मनुष्य के मन में घमण्ड, और महिमा पाने से पहिले नम्रता होती है। - नीतिवचन १८:१२


बाइबल पाठ: १ शमुएल २:१-१०

और हन्ना ने प्रार्थना करके कहा, मेरा मन यहोवा के कारण मगन है, मेरा सींग यहोवा के कारण ऊंचा, हुआ है। मेरा मुंह मेरे शत्रुओं के विरूद्ध खुल गया, क्योंकि मैं तेरे किए हुए उद्धार से आनन्दित हूं।
यहोवा के तुल्य कोई पवित्र नहीं, क्योंकि तुझ को छोड़ और कोई है ही नहीं; और हमारे परमेश्वर के समान कोई चट्टान नहीं है।
फूल कर अहंकार की और बातें मत करो, और अन्धेर की बातें तुम्हारे मुंह से न निकलें क्योंकि यहोवा ज्ञानी ईश्वर है, और कामों को तौलने वाला है।
शूरवीरों के धनुष टूट गए, और ठोकर खाने वालों की कटि में बल का फेंटा कसा गया।
जो पेट भरते थे उन्हें रोटी के लिये मजदूरी करनी पड़ी, जो भूखे थे वे फिर ऐसे न रहे। वरन जो बांझ थी उसके सात हुए, और अनेक बालकों की माता घुलती जाती है।
यहोवा मारता है और जिलाता भी है, वही अधोलोक में उतारता और उस से निकालता भी है।
यहोवा निर्धन करता है और धनी भी बनाता है, वही नीचा करता और ऊंचा भी करता है।
वह कंगाल को धूलि में से उठाता और दरिद्र को घूरे में से निकाल खड़ा करता है, ताकि उनको अधिपतियों के संग बिठाए, और महिमायुक्त सिंहासन के अधिकारी बनाए। क्योंकि पृथ्वी के खम्भे यहोवा के हैं, और उस ने उन पर जगत को धरा है।
वह अपने भक्तों के पावों को सम्भाले रहेगा, परन्तु दुष्ट अन्धियारे में चुपचाप पड़े रहेंगे क्योंकि कोई मनुष्य अपने बल के कारण प्रबल न होगा।
जो यहोवा से झगड़ते हैं वे चकनाचूर होंगे, वह उनके विरूद्ध आकाश में गरजेगा। यहोवा पृथ्वी की छोर तक न्याय करेगा और अपने राजा को बल देगा, और अपने अभिषिक्त के सींग को ऊंचा करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १६-१८
  • मत्ती १८:१-२०

बुधवार, 26 जनवरी 2011

स्वस्थ नज़रिया

जब कभी भी हम दूसरों को नीचा दिखाकर अपने आप को ऊंचा उठाना चाहते हैं, तो अन्ततः नतीजा हानिकारक ही होता है। यह बात एक नीतिकथा द्वारा स्पष्ट करी गई है: अपने तालाब में से एक बैल को पानी पीते देख कर एक छोटा मेंढक घबरा गया और तुरंत फुदक कर अपने दादा जी के पास उन्हें बताने के लिये पहुंचा। दादा जी ने उसकी बात सुनकर ठान लिया कि उनके पोते की दृष्टि में उसके दादा से बड़ा कोई नहीं होना चाहिये। इसलिये उस बुज़ुर्ग मेंढक ने अपने आप को फुलाया और पोते से पूछा, "क्या वह इससे भी बड़ा था?" पोते ने उत्तर दिया, "जी हां दादा जी, और भी बहुत बड़ा।" दादा जी ने अपने को और फुलाया और फिर वही प्रशन किया, और वही उत्तर मिला। बुजुर्ग मेंढक यह बर्दाशात नहीं कर सका, अपने आप को बड़ा बनाने के लिये वह स्वयं को इतना फूलाता गया कि वह फट गया।

अपने बारे में एक स्वस्थ नज़रिया रखना अच्छा है, लेकिन स्वस्थ और सच्चा नज़रिये और घमंड से फूल जाने में बहुत अन्तर है। परमेश्वर द्वारा जैसा और जितना हमें बनाया गया है, अपने आप को उससे अधिक आंकना खतरनाक साबित हो सकता है। अपने अहम को नियंत्रण में रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम जो कुछ करें, हमारी जो भी उपलबधी हो, हम उसे अपने प्रति परमेश्वर के अनुग्रह का प्रतिफल जाने। ऐसा करने से ही हम व्यर्थ फूलने और अपने अहम को बढ़ाने की मूर्खता से बचे रहेंगे।

पौलुस प्रेरित ने इसे बहुत स्पष्ट रीति से कहा: "क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।" (रोमियों १२:३)

यदि हम अपने आप को फुलाते ही रहेंगे तो परिमाण से बाहर होकर फट पड़ेंगे। - पौल वैन गौर्डर


उपयोग होने लायक छोटा रहना ही परमेश्वर की दृष्टि में बड़ा होना है।

क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। - गलतियों ६:३


बाइबल पाठ: गलतियों ६:१-५

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १४-१५
  • मत्ती १७

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

मधु से मीठा

मोनटाना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस धारणा को चुनौती दी कि व्यायाम से पहले शक्कर की अधिक मात्रा वाला नाशता लेने से शरीर को शीघ्र उर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने लम्बी दूरी की दौड़ में भाग लेने वाले धावकों का व्यायाम के लिये उपयोग होने वाली स्थावर साईकिलों पर परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि जिन धावकों ने परीक्षण से पहले शक्कर रहित पेय पिये थे वे, उनके मुकाबले जिन्होंने शक्कर युक्त पेय लिये थे, २५ प्रतिशत अधिक देर तक साईकिल चला सके। उनके परीक्षणों का निष्कर्ष था कि खिलाड़ियों के लिये बेहतर होगा यदि वे व्यायाम से पहले किसी शक्कर युक्त नाशते का उपयोग न करें।

राजा सुलेमान ने भी शहद के अत्याधिक सेवन के उदाहरण को लिया, एक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचने के लिये - आत्मप्रशंसा के मधुर स्वाद में रत हो जाना। नीतिवचन के २५वें अध्याय में इस बुद्धिमान राजा ने आत्मप्रशंसा और घमंड के लिये दो चेतावनियां दीं (पद १४, २७)। लोगों में अपनी महिमा के प्रयास में लगे रहना निकट भविष्य के संदर्भ में तो अच्छा लग सकता है, लेकिन दीर्घ कालीन संदर्भ में यह हानिकारक ही होता है।

आत्मप्रशंसा और घमंड के भोजन को निरंतर लेते रहने से अधिक किसी अन्य में हमें अन्दर से कमज़ोर करने की क्षमता नहीं। कितना भला हो यदि हम मधु से मीठे इस आत्मप्रशंसा और घमंड के भोजन को तज कर परमेश्वर के प्रति विश्वास और अनुशासन में बने रहें। ऐसा करने से ही हम जीवन की चुनौतियों का सामना करने की सच्ची भीतरी सामर्थ पा सकते हैं। - मार्ट डी हॉन


जब घमंड जीवन से बाहर निकलता है, तब ही परमेश्वर पर विश्वास अन्दर आता है।

जैसे बहुत मधु खाना अच्छा नहीं, वैसे ही स्वयं की महिमा ढूंढना भी अच्छा नहीं। - नीतिवचन २५:२७


बाइबल पाठ: नीतिवचन २५:१४-२८

जैसे बादल और पवन बिना वृष्टि निर्लाभ होते हैं, वैसे ही झूठ-मूठ दान देने वाले का बड़ाई मारना होता है।
धीरज धरने से न्यायी मनाया जाता है, और कोमल वचन हड्डी को भी तोड़ डालता है।
क्या तू ने मधु पाया? तो जितना तेरे लिये ठीक हो उतना ही खाना, ऐसा न हो कि अधिक खाकर उसे उगल दे।
अपने पड़ोसी के घर में बारम्बार जाने से अपने पांव को रोक ऐसा न हो कि वह खिन्न होकर घृणा करने लगे।
जो किसी के विरूद्ध झूठी साक्षी देता है, वह मानो हथौड़ा और तलवार और पैना तीर है।
विपत्ति के समय विश्वासघाती का भरोसा टूटे हुए दांत वा उखड़े पांव के समान है।
जैसा जाड़े के दिनों में किसी का वस्त्र उतारना वा सज्जी पर सिरका डालना होता है, वैसा ही उदास मन वाले के साम्हने गीत गाना होता है।
यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसको रोटी खिलाना, और यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना;
क्योंकि इस रीति तू उसके सिर पर अंगारे डालेगा, और यहोवा तुझे इसका फल देगा।
जैसे उत्तरीय वायु वर्षा को लाती है, वैसे ही चुगली करने से मुख पर क्रोध छा जाता है।
लम्बे चौड़े घर में झगड़ालू पत्नी के संग रहने से छत के कोने पर रहना उत्तम है।
जैसा थके मान्दे के प्राणों के लिये ठण्डा पानी होता है, वैसा ही दूर देश से आया हुआ शुभ समाचार भी होता है।
जो धर्मी दुष्ट के कहने में आता है, वह गंदले सोते और बिगड़े हुए कुण्ड के समान है।
जैसे बहुत मधु खाना अच्छा नहीं, वैसे ही स्वयं की महिमा ढूंढना भी अच्छा नहीं।
जिसकी आत्मा वश में नहीं वह ऐसे नगर के समान है जिसकी शहरपनाह नाका करके तोड़ दी गई हो।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १२-१३
  • मत्ती १६

सोमवार, 24 जनवरी 2011

एंड्रोमिडा का दृष्टिकोण

बीसवीं सदी के आरंभिक समय में अमेरिका के राष्ट्रपति थियोडोर रूज़्वेल्ट अपने मित्र के साथ प्रति रात्रि एक नियत कार्य करते थे। लेखक लेस्ली बी. फ्लिन ने इस के बारे में लिखा कि "रात को अपने विचार-विमर्श और बातचीत पूरी करने के बाद, यदि आसमान साफ होता तो वे दोनों बाहर जाते और आकाश के एक विशेष भाग पर अपनी दृष्टि करके खोजते रहते जब तक उन्हें एक धुंधला सा प्रकाश पुंज नहीं दिख जाता। जब वह दिख जाता तो वे दोनो एक साथ यह दोहराते ’वह छोटा सा दिखने वाला प्रकाश बिंदु एंड्रोमिडा नक्षत्र पुंज में स्थित स्पाइरल नक्षत्र समूह है। वह अकेला बिंदु हमारी आकाश गंगा नक्षत्र समूह जितना बड़ा है। वह करोड़ों नक्षत्र समूहों में से एक है और उसमें करोड़ों ऐसे सूर्य हैं जो हमारे सूर्य से कहीं बड़े हैं।’ फिर वे अन्त में कहते, ’अब जब हमने अपनी औकात समझ ली है, तो चलो अब दिन की समाप्ति करके सोने चलते हैं।’"

अहंकार सदा मसीही विश्वासी का शत्रु बना रहता है। उसके मन से गुपचुप भाव निकलते रहते हैं कि "मैं कितना महत्वपूर्ण हूं", या "मैं दूसरों से कितना अच्छा हूं।" हमें ऐसे सुझावों के फेर में आकर घमंड में गिर पड़ने से बचे रहना है, इससे पहले कि ऐसा कोई भी सुझाव मन में घर बनाए, उसे मन से उखाड़ फेंकना चाहिये। लगातार प्रार्थना, सदैव पवित्र आत्मा पर निरभर्ता और बाइबल के निरंतर अध्ययन से ही हम अपने संबंध में सही दृष्टिकोण रखने पाएंगे।

पौलूस एक ऐसा व्यक्ति था जिसके पास घमंड करने के लिये हम सब से अधिक करण थे, लेकिन उसने चिताया कि हम कभी अपने आप को हकीकत से अधिक बढ़ चढ़ कर न समझें (रोमियों १२:३)। राष्ट्रपति रूज़्वेल्ट के उदाहरण का अनुसरण करना अच्छा होगा। ’एंड्रोमिडा का दृष्टिकोण’ रखने से हम घमंड में गिरने से बचे रह सकते हैं। - डेव एगनर


मसीह की परछाईं में खड़े होने से हम अपने सही कद को देख सकते हैं।

विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है। - नीतिवचन १६:१८


बाइबल पाठ: नीतिवचन १६:१६-२२

बुद्धि की प्राप्ति चोखे सोने से क्या ही उत्तम है! और समझ की प्राप्ति चान्दी से अति योग्य है।
बुराई से हटना सीधे लोगों के लिये राजमार्ग है, जो अपने चालचलन की चौकसी करता, वह अपने प्राण की भी रक्षा करता है।
विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है।
घमण्डियों के संग लूट बांट लेने से, दीन लोगों के संग नम्र भाव से रहना उत्तम है।
जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है।
जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है।
जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ९-११
  • मत्ती १५:२१-३९

रविवार, 23 जनवरी 2011

औकात एवं घमंड

ब्रिटिश संसद के लिये एक नवनिर्वाचित व्यक्ति अपने परिवार को लंडन शहर दिखाने लाया, और बड़े घमंड से उन्हें लंडन का दौरा करवाने लगा। जब वे लंडन की भवय और विशाल वेस्टमिनिस्टर ऐब्बी में पहुंचे तो उसकी ८ वर्षीय पुत्री उस भवन की सुन्दरता और विशाल आकार देखकर भौंचक रह गई। उसकी इस प्रतिक्रिया पर उसके पिता ने गर्व से पूछा, "बेटी, तुम किस सोच में पड़ गईं?" उसने कहा, "पिताजी मैं सोच रही थी कि अपने घर में आप तो आप कितने बड़े लगते हैं लेकिन यहां इस भवन में कितने छोटे लग रहे हैं!"

घमंड अनजाने ही हमारे जीवनों मे घर बना लेता है और हमें पता भी नहीं चलता। जैसा हमें अपने आप को सोचना चाहिये, उस से अधिक कभी न सोचें (रोमियों १२:३)।

जब हम अपने ही दायरों में रहते हैं तो घमंडी हो जाना आसान होता है, लेकिन हमें अपनी औकात का पता तब ही चलता है जब हमें बड़े कामों, बड़ी परिस्थितियों, बड़ी चुनौतियों और बड़ी प्रतियोगिताओं का सामना करना पड़ता है। जैसे छोटे तालाबों में बड़ी बड़ी लगने वाली मछलियां सागर में पहुंच कर अपना असली आकार समझने पाती हैं, वैसे ही ऐसी बड़ी बातों के सम्मुख ही हमें अपनी असली औकात का पता चलता है।

परमेश्वर के वचन में जो एक बात स्पष्ट है वह यह कि उसे घंडियों से घृणा है। भजनकार ने परमेश्वर की अगुवाई में उसके संबंध में लिखा "...जिसकी आंखें चढ़ी हों और जिसका मन घमण्डी है, उसकी मैं न सहूंगा।" (भजन १०१:५); तथा याकूब ने कहा "...इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।" (याकूब ४:६)

यदि हम परमेश्वर के आत्मा के आगे दीन होकर उससे अनुरोध करें, तो वह हमारी वास्तविक स्थिति हमें दिखाने में हमारी सहायता करेगा और हमें घमंड से भी बचाए रखेगा। - रिचर्ड डी हॉन


जो परमेश्वर को जानते हैं वे नम्र रहेंगे, जो स्वयं अपनी हकीकत को जानते पहचानते हैं वे कभी घमंडी नहीं होंगे।

क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़ कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। - रोमियों १२:३


बाइबल पाठ: याकूब ४:१-१०

तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्‍या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?
तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं, तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्‍त नहीं कर सकते, तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं।
तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्‍छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो।
हे व्यभिचारिणयों, क्‍या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है।
क्‍या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्‍त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उस ने हमारे भीतर बसाया है, क्‍या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो?
वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।
इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा।
परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो।
दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्‍द उदासी में बदल जाए।
प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ७-८
  • मत्ती १५:१-२०

शनिवार, 22 जनवरी 2011

ऊंचा नाम करने की लालसा

एक साहसी व्यक्ति ने शिकागो शहर में स्थित १,४५४ फुट उंची स्टील और कांच से बनी इमारत ’सीयर्स टावर” पर उसकी बाहरी सतह पर से चढ़कर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसे करने के लिये उसे ५० पौंड वज़न चढ़ाई की सामग्री ढोनी पड़ी और ४० किलोमीटर प्रति घंटा की रफतार से चलती हवा का सामना करके भी स्थिर रहना पड़ा। जब तक वह इमारत के शिखर पर पहुंचा, उसका नाम चारों ओर फैल चुका था। लेकिन शिखर पर पहुंचते ही पुलिस ने उसे पकड़ कर अनुचित व्यवहार तथा दूसरे की सम्पत्ति में बिना आज्ञा घुसने और नुकसान पहुंचने के अपराध में पकड़ कर जेल में डाल दिया। उसकी ख्याति कुछ ही पल की थी।

इस घटना ने मुझे बाइबल में उत्पत्ति ११ अध्याय में वर्णित लोगों की याद दिलाई जिन्होंने बेबल की मीनार बनाना आरंभ किया। उन बलवाई लोगों ने अपना नाम ऊंचा करने की ठान रखी थी। वह मीनार प्रतीक थी उनकी महत्वकांक्षाओं और परमेश्वर के विरुद्ध एक जुट होने की। उन्होंने ठाना था कि "...आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बात करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े।" (उत्पत्ति ११:४) लेकिन परमेश्वर ने उनके स्वार्थी और परमेश्वर विरोधी इरादे सफल नहीं होने दिये। उसने उनकी भाषा में गड़बड़ी डाल दी जिससे उनका आपसी संबंध टुट गया और मीनार का बनना रुक गया।

कई बार मसीही विश्वासी भी अपना नाम ऊंचा करने की महत्वकांक्षा में पड़कर अपने जीवन में से परमेश्वर को उसके उचित स्थान से उतार देते हैं। ऐसा तब होता है जब वे परमेश्वर से अपना ध्यान खींच कर, अपनी सामर्थ पर भरोसा करके अपने व्यवसाय, अपनी धार्मिकता या समाज में अपना स्थान बनाने में संलगन हो जाएं और परमेश्वर के कार्यों को नज़रंदाज़ कर दें। यदि एक विश्ववासी के जीवन में परमेश्वर आदर नहीं पाएगा, तो उसका स्वयं का भी आदर जाता रहेगा।

सदा ध्यान रखिये, जब जब आप अपने जीवन में परमेश्वर को ऊंचा उठाएंगे, वह भी आपको संसार में ऊंचा करेगा; और यदि आपके जीवन में परमेश्वर का सम्मान नहीं रहेगा, तो परमेश्वर द्वारा संसार में आपका सम्मान भी जाता रहेगा। - मार्ट डी हॉन


यदि ऊंचा उठना चाहते हैं तो झुकना और नम्र होना सीखिये।

फिर उन्होंने कहा, आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बात करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े। - उत्पत्ति ११:४


बाइबल पाठ: उत्पत्ति ११:१-९

सारी पृथ्वी पर एक ही भाषा, और एक ही बोली थी।
उस समय लोग पूर्व की और चलते चलते शिनार देश में एक मैदान पाकर उस में बस गए।
तब वे आपस में कहने लगे, कि आओ हम ईंटें बना बना के भली भांति आग में पकाएं, और उन्होंने पत्थर के स्थान में ईंट से, और चूने के स्थान में मिट्टी के गारे से काम लिया।
फिर उन्होंने कहा, आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बात करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े।
जब लोग नगर और गुम्मट बनाने लगे तब इन्हें देखने के लिये यहोवा उतर आया।
और यहोवा ने कहा, मैं क्या देखता हूं, कि सब एक ही दल के हैं और भाषा भी उन सब की एक ही है, और उन्होंने ऐसा ही काम भी आरम्भ किया; और अब जितना वे करने का यत्न करेंगे, उस में से कुछ उनके लिये अनहोना न होगा।
इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।
इस प्रकार यहोवा ने उनको, वहां से सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया और उन्होंने उस नगर का बनाना छोड़ दिया।
इस कारण उस नगर का नाम बाबुल पड़ा क्योंकि सारी पृथ्वी की भाषा में जो गड़बड़ी है, सो यहोवा ने वहीं डाली, और वहीं से यहोवा ने मनुष्यों को सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ४-६
  • मत्ती १४:२२-३६