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मंगलवार, 2 सितंबर 2014

दोतरफा संवाद


   क्या कभी आप ऐसे वार्तालाप में फंसे हैं जहाँ कोई व्यक्ति केवल अपने बारे में ही बोले चला जा रहा हो? हो सकता है कि आपने शिष्टाचार के नाते किसी से कोई प्रश्न कर के वार्तालाप आरंभ तो किया हो, लेकिन वह दूसरा व्यक्ति वार्तालाप आरंभ होने से लेकर निरंतर अपने ही बारे में बोले चला जा रहा हो, कभी आपके बारे में ना तो कोई प्रश्न पूछे और ना ही आपको कोई बात कहने का अवसर प्रदान करे। आपको यह व्यवहार कैसा लगेगा, और आप कब तक इसे बर्दाशत करेंगे? अब ज़रा परमेश्वर के साथ अपने वार्तालाप, अर्थात अपने प्रार्थना के समय के बारे में विचार कीजिए!

   ज़रा विचार कीजिए कि परमेश्वर को कैसा लगता होगा जब हम अपने प्रार्थना के समय में उसके साथ संगति करने तो आएं, लेकिन फिर अपने ही बारे में आरंभ हो जाएं। हो सकता है कि हम ने प्रार्थना से पहले परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग पढ़ा हो, लेकिन प्रार्थना की बारी आते ही उस भाग को हम नज़रन्दाज़ कर देते हैं और बस अपनी आवश्यकताओं के वर्णन में आरंभ हो जाते हैं। हम परमेश्वर से किसी समस्या के समाधान के लिए सहायता माँगते हैं, अपनी किसी आर्थिक आवश्यकता की पूर्ति का साधन माँगते हैं, या किसी शारीरिक बीमारी से स्वस्थ होने की माँग करते हैं - बस हमारी बातें और हमारी आवश्यकताएं या वह जो हमारी नज़रों में महत्वपूर्ण अथवा आवश्यक है, वही चलता रहता है। लेकिन बाइबल से पढ़ा गया वह खण्ड हमारी प्रार्थनाओं में कहीं स्थान नहीं पाता; उस खण्ड में होकर जो परमेश्वर ने हम से कहा है, हमें सिखाया है वह सब अन्देखा कर दिया जाता है।

   किंतु भजन 119 के लेखक का दृष्टिकोण ऐसा कतई नहीं था; वरन उसने परमेश्वर से उसके वचन को समझने की सामर्थ माँगी: "मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं" (भजन 119:18) और अपनी प्रार्थना में परमेश्वर के वचन को बहुमूल्य तथा अपने लिए सुखमूल एवं मन्त्रणा देने वाला कहा (पद 24)। भजनकार के समान ही हम मसीही विश्वासियों को भी यह अनुशासन विकसित करना चाहिए कि हम परमेश्वर के वचन के अनुसार प्रार्थनाएं करें - यह हमारे परमेश्वर के साथ संगति तथा प्रार्थना के समय को बदल देगा। बाइबल पढ़ना और प्रार्थना करना हमारे लिए परमेश्वर के साथ दोतरफा संवाद का समय होना चाहिए ना कि केवल अपनी ही बात कहते रहने का। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के वचन की सुनिए, और फिर उसके अनुसार परमेश्वर से प्रार्थना कीजिए।

मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। - कुलुस्सियों 3:16

बाइबल पाठ: भजन 119:17-24; 97-100
Psalms 119:17 अपने दास का उपकार कर, कि मैं जीवित रहूं, और तेरे वचन पर चलता रहूं। 
Psalms 119:18 मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं। 
Psalms 119:19 मैं तो पृथ्वी पर परदेशी हूं; अपनी आज्ञाओं को मुझ से छिपाए न रख! 
Psalms 119:20 मेरा मन तेरे नियमों की अभिलाषा के कारण हर समय खेदित रहता है। 
Psalms 119:21 तू ने अभिमानियों को, जो शापित हैं, घुड़का है, वे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटके हुए हैं। 
Psalms 119:22 मेरी नामधराई और अपमान दूर कर, क्योंकि मैं तेरी चितौनियों को पकड़े हूं। 
Psalms 119:23 हाकिम भी बैठे हुए आपास में मेरे विरुद्ध बातें करते थे, परन्तु तेरा दास तेरी विधियों पर ध्यान करता रहा। 
Psalms 119:24 तेरी चितौनियां मेरा सुखमूल और मेरे मन्त्री हैं।

Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50-52


सोमवार, 1 सितंबर 2014

एकता


   जुलाई 2010 में मिच मिलर के देहाँत के बाद, लोगों ने उसे ऐसे व्यक्ति के रूप में स्मरण किया जो सभी को साथ गाने के लिए आमंत्रित करता था। मिच द्वारा 1960 के दशक में टी. वी. पर आयोजित लोकप्रीय कार्यक्रम, Sing Along With Mitch में पुरुषों की गीत मण्डली लोकप्रीय गाने प्रस्तुत करती थी, साथ ही टी. वी. के पर्दे पर गीत के बोल लिखे हुए दिखाए जाते थे, जिससे देखने वाले सभी दर्शक गाने वाली मण्डली के गायकों के साथ वे गाने गा सकें। एक अखबार, Los Angeles Times, में छपी मिच की निधन-सूचना तथा उसके साथ लिखे सन्देश में इस कार्यक्रम के लोकप्रीय होने के लिए मिच के विचार भी बताए गए; मिच का कहना था कि "मैं सदा ही इस बात का ध्यान रखता हूँ कि जिन लोगों को गीत मण्डली बनाकर अपने कार्यक्रम में गाने के लिए मैं किराए पर बुलाता हूँ वे लम्बे, नाटे, गन्जे, मोटे, अर्थात समाज में सामान्य दिखने वाले लोग हों जिन्हें कोई आम आदमी प्रतिदिन अपनी दिनचर्या में देखता रहता है"। उस भिन्नता की एकता से ऐसा मधुर संगीत निकलता था जिससे सभी प्रसन्न होते थे और साथ गाने के लिए आमंत्रित होते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों के 15वें अध्याय में प्रेरित पौलुस ने भी मसीह के अनुयायियों में एकता रखने का आहवान किया, "ताकि तुम एक मन और एक मुंह हो कर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो" (रोमियों 15:6)। पौलुस ने बाइबल के पुराने नियम खण्ड से कई परिच्छेदों से दिखाया कि यहूदियों और गैर-यहूदियों को एक साथ मिलकर परमेश्वर की स्तुति एवं प्रशंसा करनी चाहिए (रोमियों 15:9-12)। यहूदियों और गैर-यहूदियों की परस्पर एकता जो असंभव समझी जाती थी, संभव हो सकी जब उन लोगों ने जो परस्पर बड़ी गहराई से विभाजित थे, एक साथ मिलकर परमेश्वर की आराधना करनी और मसीह यीशु में होकर प्रकट हुई उसकी करुणा के लिए एक साथ धन्यवाद करना आरंभ किया।

   उनके समान ही आज हम भी आशा, आनन्द और शान्ति से परमेश्वर के पवित्र आत्मा के द्वारा भरे जाते हैं (पद 13), और एक ही स्तुति-गान मण्डली के अंग बनाए जाते हैं, भिन्न होते हुए भी मसीह यीशु में हम सब मसीही विश्वासी एक कर दिए गए हैं। मसीह यीशु में मिली इस एकता में होकर हमें यह आदर भी मिला है कि एक साथ मिलकर परमेश्वर की स्तुति और धन्यवाद करें। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासियों में एकता मसीह यीशु के साथ एक हो जाने से ही आती है।

और विश्वास करने वालों की मण्‍डली एक चित्त और एक मन के थे यहां तक कि कोई भी अपनी सम्पति अपनी नहीं कहता था, परन्तु सब कुछ साझे का था। - प्रेरितों 4:32

बाइबल पाठ: रोमियों 15:5-13
Romans 15:5 और धीरज, और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। 
Romans 15:6 ताकि तुम एक मन और एक मुंह हो कर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो। 
Romans 15:7 इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो। 
Romans 15:8 मैं कहता हूं, कि जो प्रतिज्ञाएं बाप दादों को दी गई थीं, उन्हें दृढ़ करने के लिये मसीह, परमेश्वर की सच्चाई का प्रमाण देने के लिये खतना किए हुए लोगों का सेवक बना। 
Romans 15:9 और अन्यजाति भी दया के कारण परमेश्वर की बड़ाई करें, जैसा लिखा है, कि इसलिये मैं जाति जाति में तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम के भजन गाऊंगा। 
Romans 15:10 फिर कहा है, हे जाति जाति के सब लोगों, उस की प्रजा के साथ आनन्द करो। 
Romans 15:11 और फिर हे जाति जाति के सब लागो, प्रभु की स्तुति करो; और हे राज्य राज्य के सब लोगो; उसे सराहो। 
Romans 15:12 और फिर यशायाह कहता है, कि यिशै की एक जड़ प्रगट होगी, और अन्यजातियों का हाकिम होने के लिये एक उठेगा, उस पर अन्यजातियां आशा रखेंगी। 
Romans 15:13 सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 47-49


रविवार, 31 अगस्त 2014

पलट


   बाइबल कॉलेज में मेरा एक मित्र था, बिल, जो एक बहुत ही घिनौने और पापमय जीवन से निकल कर मसीह यीशु में आया था। उसने अपने जीवन की एक घटना बताई: "मैं ब्रैन्डी पीते हुए सड़क पर गाड़ी चलाते हुए जा रहा था, और किसी दूसरे की पत्नी मेरे बगल में बैठी थी; मैंने देखा कि कुछ मसीही विश्वासी सड़क के किनारे खड़े हुए आने-जाने वाले लोगों को प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा और उद्धार के बारे में बता रहे थे। मैं उनके पास से होकर निकला और उनको संबोधित करते हुए ज़ोर से चिल्लाया, ’मूर्खों’। लेकिन इसके कुछ ही सप्ताह के बाद मैं एक चर्च में अपने घुटनों पर पड़ा प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा माँग रहा था और उसे अपने जीवन का उद्धारकर्ता तथा प्रभु बनने का आग्रह कर रहा था।" बिल ने प्रभु यीशु पर विश्वास लाने के द्वारा अपने पुराने जीवन तथा आदतों से छुटकारा और प्रभु यीशु मसीह में एक नया जीवन प्राप्त किया था। यह उसके लिए एक जीवन बदलने वाला अनुभव था जिसने उसके मन और जीवन मार्ग की दिशा को बिलकुल पलट दिया।

   सच्चा पश्चाताप, जिसकी पहल परमेश्वर के पवित्र आत्मा के द्वारा होती है, जीवन मार्ग की दिशा को पलट देने वाला अनुभव है। अकसर हम देखते हैं कि इस बदलाव से पहले उस व्यक्ति द्वारा जितना अधिक विरोध प्रभु यीशु में उद्धार के सुसमाचार का होता है, उसके जीवन मार्ग की दिशा परिवर्तन उतनी ही चकित कर देन वाली होती है। जब दमिश्क के मार्ग पर तरशीश के शाऊल का सामना प्रभु यीशु से हुआ, तो वह मसीही विश्वासियों को सताने वाले शाऊल से पलट कर मसीह यीशु का प्रचारक पौलुस बन गया। उसके अन्दर आए इस परिवर्तन को देखकर बहुतेरों ने टिप्पणी करी: "...जो हमें पहिले सताता था, वह अब उसी धर्म का सुसमाचार सुनाता है, जिसे पहिले नाश करता था" (गलतियों 1:23)।

   सच्चे परिवर्तन का आरंभ सच्चे पश्चाताप से होता है, और वह मन, जीवन के दृष्टिकोण तथा जीवन की दिशा को बदल देता है। मसीह यीशु के अनुयायियों के लिए इसका अर्थ होता है पाप और साँसारिकता के जीवन से पलट कर मसीह यीशु की आज्ञाकारिता में उसे समर्पित जीवन व्यतीत करना।


पश्चाताप का अर्थ है पाप के प्रति इतना शर्मिंदा होना कि उसे बिलकुल छोड़ दें।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17 

बाइबल पाठ: गलतियों 1:11-24
Galatians 1:11 हे भाइयो, मैं तुम्हें जताए देता हूं, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्य का सा नहीं। 
Galatians 1:12 क्योंकि वह मुझे मनुष्य की ओर से नहीं पहुंचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला। 
Galatians 1:13 यहूदी मत में जो पहिले मेरा चाल चलन था, तुम सुन चुके हो; कि मैं परमेश्वर की कलीसिया को बहुत ही सताता और नाश करता था। 
Galatians 1:14 और अपने बहुत से जाति वालों से जो मेरी अवस्था के थे यहूदी मत में बढ़ता जाता था और अपने बाप दादों के व्यवहारों में बहुत ही उत्तेजित था। 
Galatians 1:15 परन्तु परमेश्वर की, जिसने मेरी माता के गर्भ ही से मुझे ठहराया और अपने अनुग्रह से बुला लिया, 
Galatians 1:16 जब इच्छा हुई, कि मुझ में अपने पुत्र को प्रगट करे कि मैं अन्यजातियों में उसका सुसमाचार सुनाऊं; तो न मैं ने मांस और लोहू से सलाह ली; 
Galatians 1:17 और न यरूशलेम को उन के पास गया जो मुझ से पहिले प्रेरित थे, पर तुरन्त अरब को चला गया: और फिर वहां से दमिश्क को लौट आया।
Galatians 1:18 फिर तीन बरस के बाद मैं कैफा से भेंट करने के लिये यरूशलेम को गया, और उसके पास पन्‍द्रह दिन तक रहा। 
Galatians 1:19 परन्तु प्रभु के भाई याकूब को छोड़ और प्रेरितों में से किसी से न मिला। 
Galatians 1:20 जो बातें मैं तुम्हें लिखता हूं, देखो परमेश्वर को उपस्थित जानकर कहता हूं, कि वे झूठी नहीं। 
Galatians 1:21 इस के बाद मैं सूरिया और किलिकिया के देशों में आया। 
Galatians 1:22 परन्तु यहूदिया की कलीसियाओं ने जो मसीह में थी, मेरा मुँह तो कभी नहीं देखा था। 
Galatians 1:23 परन्तु यही सुना करती थीं, कि जो हमें पहिले सताता था, वह अब उसी धर्म का सुसमाचार सुनाता है, जिसे पहिले नाश करता था। 
Galatians 1:24 और मेरे विषय में परमेश्वर की महिमा करती थीं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-46


शनिवार, 30 अगस्त 2014

सच्चा धन


   हम लोग छुट्टियाँ बिताने अलास्का गए हुए थे, और वहाँ फेयरबैंक्स के निकट प्रसिद्ध एल डोराडो सोने की खान देखने गए। उस स्थान पर हमें भ्रमण करवाने और जब वह खान आरंभ हुई थी तब लोगों द्वारा सोना निकालने के तरीकों को दिखाने के बाद, हम को एक तश्तरी, और कंकर-मिट्टी से भरा एक बोरा दिया गया जिसको छान कर हमें उसमें मिले सोने के कणों को खोजने का प्रयास करना था। बोरे में से कंकर-मिट्टी लेकर हम तश्तरी में डालने लगे और बहते पानी के नीचे उसे हिला-हिला कर निथारने लगे जिससे मिट्टी तो बह जाए पर सोने के भारी कण नीचे तश्तरी के तले पर बैठ जाएं। यद्यपि यह करने की विधि हमें विशेषज्ञों ने दिखाई और सिखाई थी, लेकिन हम कुछ खास करने नहीं पाए; कारण? इस डर से कि कहीं हम कुछ मूल्यवान ना गवाँ दें, हम व्यर्थ के कंकरों को फेंकने से बहुत हिचकिचा रहे थे।

   बाद में इस घटना के बारे में सोचते हुए मुझे बोध हुआ कि ऐसे ही हम कितनी ही व्यर्थ साँसारिक बातों को अपने जीवन में लगाए रहते हैं और इस कारण सच्चे मूल्य की अनेक बातों को पाने नहीं पाते। प्रभु यीशु के पास एक जवान व्यक्ति आया, जिसके जीवन में यह सत्य जाता था। उस व्यक्ति के लिए उसकी नाशमान साँसारिक धन-संपत्ति उसे मिलने वाले अविनाशी आत्मिक खज़ानों से अधिक मूल्यवान थी (लूका 18:18-30)। उसके इस रवैये को देख प्रभु यिशु ने टिप्पणी करी, "...धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है" (पद 24)।

   धन अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन यदि धन को लेकर हमारा दृष्टिकोण सही नहीं है और धन का संचय ही हमारे जीवन का उद्देश्य बन गया है, तो फिर वह हमें सच्चे मूल्य की वस्तुओं को जमा करने से रोकेगा। संसार की नाशमान धन-संपत्ति जमा करने के प्रयास में समय गंवाना मूर्खता है, क्योंकि यह साँसारिक धन-संपत्ति नहीं वरन प्रभु यीशु मसीह में हमारा सच्चा विश्वास ही है जो हमें परीक्षाओं में सुरक्षित रखेगा और अन्ततः हमारे लिए प्रशंसा एवं आदर तथा हम में होकर परमेश्वर के लिए महिमा का कारण ठहरेगा (1 पतरस 1:7)।

   आज आपके लिए सच्चा धन क्या है; और आप उसे कहाँ जमा कर रहे हैं? कहीं नाशमान साँसारिक धन के पीछे आप अविनाशी खज़ाने गंवाने में तो नहीं लगे हैं? - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपनी नज़रें प्रभु यीशु पर लगाए रखिए; तब साँसारिक धन-संपत्ति की चका-चौंध आपकी आँखों को आत्मिक खज़ानों के प्रति अन्धा करने नहीं पाएगी।

और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। - 1 पतरस 1:7 

बाइबल पाठ: लूका 18:18-30
Luke 18:18 किसी सरदार ने उस से पूछा, हे उत्तम गुरू, अनन्‍त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं? 
Luke 18:19 यीशु ने उस से कहा; तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक, अर्थात परमेश्वर।
Luke 18:20 तू आज्ञाओं को तो जानता है, कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना, और चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। 
Luke 18:21 उसने कहा, मैं तो इन सब को लड़कपन ही से मानता आया हूं। 
Luke 18:22 यह सुन, यीशु ने उस से कहा, तुझ में अब भी एक बात की घटी है, अपना सब कुछ बेच कर कंगालों को बांट दे; और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। 
Luke 18:23 वह यह सुनकर बहुत उदास हुआ, क्योंकि वह बड़ा धनी था। 
Luke 18:24 यीशु ने उसे देख कर कहा; धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है? 
Luke 18:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है। 
Luke 18:26 और सुनने वालों ने कहा, तो फिर किस का उद्धार हो सकता है? 
Luke 18:27 उसने कहा; जो मनुष्य से नहीं हो सकता, वह परमेश्वर से हो सकता है। 
Luke 18:28 पतरस ने कहा; देख, हम तो घर बार छोड़कर तेरे पीछे हो लिये हैं। 
Luke 18:29 उसने उन से कहा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं जिसने परमेश्वर के राज्य के लिये घर या पत्‍नी या भाइयों या माता पिता या लड़के-बालों को छोड़ दिया हो। 
Luke 18:30 और इस समय कई गुणा अधिक न पाए; और परलोक में अनन्त जीवन।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42


शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

भरपेट


   एक मित्र ने, जो सिंगापुर में रहता है, एक पुराने चीनी अभिवादन के बारे में बताया। यह पूछने की बजाए कि "आप कैसे हैं?" लोग पूछते "क्या आपने भरपेट भोजन किया?" संभवतः यह अभिवादन उस समय आरंभ हुआ था जब लोगों के पास भोजन की कमी थी और बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता था कि उन्हें अगला भोजन कब मिलेगा। जब भी भोजन उपलब्ध होता तब भरपेट भोजन कर लेने में ही बुद्धिमानी होती थी।

   प्रभु यीशु के 5000 से अधिक लोगों को दो मछली और पाँच रोटी से भरपेट भोजन कराने के पश्चात (यूहन्ना 6:1-13), वह भीड़ प्रभु यीशु के पीछे पीछे आई, क्योंकि उन्हें और भोजन मिलने की आशा थी (पद 24-26)। तब उस भीड़ से प्रभु यीशु ने कहा कि वे शारीरिक नहीं वरन आत्मिक भोजन के लिए मेहनत करें, उसकी लालसा रखें, जो उन्हें प्रभु यीशु से ही मिल सकता था: "नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। ... यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा" (यूहन्ना 6:27; 35)।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी सहायाता करें जिनके पास शारीरिक भोजन नहीं है लेकिन उससे भी बढ़कर उन्हें उस आत्मिक भोजन के बारे में बताएं जो उन्हें भीतरी शान्ति, पाप क्षमा और अनन्त जीवन प्रदान कर सकता है, अर्थात प्रभु यीशु मसीह।

   जीवन की रोटी, प्रभु यीशु मसीह आज हमें निमंत्रण दे रहा है कि हम उसके पास आएं और अपनी आत्मा की हर भूख को उससे तृप्त करें, उससे भरपेट खाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


आत्मा की प्रत्येक भूख को केवल प्रभु यीशु ही तृप्त कर सकता है।

जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस(शरीर) है। - यूहन्ना 6:51

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:24-35
John 6:24 सो जब भीड़ ने देखा, कि यहां न यीशु है, और न उसके चेले, तो वे भी छोटी छोटी नावों पर चढ़ के यीशु को ढूंढ़ते हुए कफरनहूम को पहुंचे। 
John 6:25 और झील के पार उस से मिलकर कहा, हे रब्बी, तू यहां कब आया? 
John 6:26 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्‍त हुए। 
John 6:27 नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। 
John 6:28 उन्होंने उस से कहा, परमेश्वर के कार्य करने के लिये हम क्या करें? 
John 6:29 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्वास करो। 
John 6:30 तब उन्होंने उस से कहा, फिर तू कौन का चिन्ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें, तू कौन सा काम दिखाता है? 
John 6:31 हमारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया; जैसा लिखा है; कि उसने उन्हें खाने के लिये स्वर्ग से रोटी दी। 
John 6:32 यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्वर्ग से न दी, परन्तु मेरा पिता तुम्हें सच्ची रोटी स्वर्ग से देता है। 
John 6:33 क्योंकि परमेश्वर की रोटी वही है, जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है। 
John 6:34 तब उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर। 
John 6:35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39


गुरुवार, 28 अगस्त 2014

जोश और आनन्द


   ग्यारह वर्ष पहले, आज ही के दिन, हमारा एक अच्छा मित्र दोपहर के भोजन के अवकाश में हल्की दौड़ लगाने के लिए बाहर गया, और फिर लौट कर वापस नहीं आया। कर्ट डी हॉन, जो उस समय इस पुस्तिका, Our Daily Bread के प्रबन्धन संपादक थे, उस धूप की चमक और गर्मी से भरे गुरुवार की दोपहर को हृदय-आघात का शिकार हो गए। हम में से जिन लोगों ने उनके साथ तब कार्य किया था, आज भी उनकी यादगार में उनकी कुछ निशानियाँ रखे हुए हैं।

   उदाहरणस्वरूप, मेरे दफ्तर की एक दीवार पर मैंने कर्ट से मुझे मिला अन्तिम ज्ञापन फ्रेम करके लगा रखा है। वह आज भी मुझे उनके संपादक के रूप में पूरी देख-रेख से कार्य करने की प्रवृति को याद दिलाता है - सदा इस प्रयास में संलग्न कि परमेश्वर का वचन भलि-भाँति तथा बिल्कुल सही रीति से प्रस्तुत किया जाए। मेरी एक अन्य सहयोगी ने वह कागज़ की गेंद लगा रखी है जो कर्ट ने उसकी ओर हंसी-मज़ाक करते हुए उछाली थी; वह गेंद स्मरण दिलाती है कि मुस्तैदी के साथ कार्य करते हुए भी कर्ट जीवन का आनन्द लेते रहने में कितना विश्वास रखता था।

   जब कभी हम कर्ट के बारे में बात करते हैं, हमें एहसास होता है कि हमें उनकी कमी कितनी अखरती है। हम उनके सुखद व्यक्तित्व के साथ उनकी उत्तमता प्राप्त करने की लालसा को स्मरण करते हैं। वे बड़ी मेहनत के साथ कार्य करते थे और जीवन से प्रेम करते थे। वे परमेश्वर के वचन को खराई के साथ सिखाने तथा जीवन को आनन्द के साथ जीने में विश्वास रखते थे।

   कर्ट तथा उनके जीवन के उदाहरणों को स्मरण करना तरोताज़गी भी देता है और चुनौती भी। वह हमें स्मरण दिलाता है कि हमारे प्रत्येक कार्य एवं बात को लोग देख रहे हैं और आँकलन कर रहे हैं कि हम प्रभु यीशु के लिए आनन्द के साथ हमारी निर्धारित सेवकाई कर रहे हैं कि नहीं (इफिसियों 2:10)। कर्ट के समान ही, जोश और आनन्द, क्या ये दो शब्द प्रभु यीशु के लिए आपकी भी सेवकाई को परिभाषित करते हैं? - डेव ब्रैनन


चिर स्थाई आनन्द के लिए प्रभु यीशु को सदा सर्वोपरि रखें।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: भजन 100
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो! 
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ! 
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो! 
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 33-36


बुधवार, 27 अगस्त 2014

नया सामान्य


   एक पास्टर ने, जिसने शारीरिक एवं मानसिक रीति से घायल होने वालों को सांत्वना और शान्ति प्रदान करने का प्रशिक्षण लिया था, टिप्पणी करी कि घायल लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस समय की चोट या हानि का दुख नहीं होता। इसकी बजाए, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है आगे आने वाले जीवन के साथ ताल-मेल बैठाना। जो पहले उनके लिए सामान्य होता था, वह अब नहीं रहा, इसलिए जो उनकी सहायता कर रहे हैं उन्हें उन आहत व्यक्तियों को एक नया सामान्य बैठाने में सहायक होना पड़ता है।

   हो सकता है कि यह नया सामान्य वहाँ हो जहाँ अब वे पहले के समान स्वस्थ एवं हृष्ट-पुष्ट नहीं रह सकते, या किसी निकट संबंधी का साथ जाता रहा हो, या किसी सन्तोषजनक नौकरी से हाथ धोना पड़ा हो, या किसी प्रीय जन की मृत्यु का विछोह हो, इत्यादि। ऐसी हानि के दुख की गंभीरता लोगों को पहले के जीवन से एक अलग ही प्रकार का जीवन व्यतीत करने पर मजबूर करती है, चाहे वह नया जीवन जीना उन्हें कितना भी नापसन्द क्यों ना हो।

   जिस व्यक्ति के समक्ष यह नया सामान्य आता है, उसके लिए यह समझ बैठना कि कोई भी उसकी परिस्थिति भली-भाँति नहीं समझ सकता, साधारण बात है। लेकिन यह सत्य नहीं है; प्रभु यीशु के हम मनुष्यों के साथ आकर जीवन व्यतीत करने के उद्देश्यों में से एक था हमारे जीवन और दुखों को व्यक्तिगत अनुभवों से जानना, जो उसकी वर्तमान सेवकाई में सहायक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री का लेखक प्रभु यीशु के विषय में लिखता है: "क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला" (इब्रानियों 4:15)।

   हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने पवित्रता का एक सिद्ध जीवन जीया, लेकिन वह पाप में पड़े संसार के लोगों के दुखों को भी जानता था। उसने हम लोगों के समान ही दुख उठाया, तिरिस्कृत हुआ, पीड़ा सही। इसलिए आज जब मैं और आप ऐसे अन्धकार भरे समयों से होकर निकलते हैं तो वह हमें सान्तवना और अपनी शान्ति देने तथा एक नये सामान्य को बनाने में सहायता करने के लिए तैयार एवं उपलब्ध है। - बिल क्राउडर


दुख के सागर में प्रभु यीशु आशा की स्थिर चट्टान है।

क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है। - इब्रानियों 2:18 

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:9-16
Hebrews 4:9 सो जान लो कि परमेश्वर के लोगों के लिये सब्त का विश्राम बाकी है। 
Hebrews 4:10 क्योंकि जिसने उसके विश्राम में प्रवेश किया है, उसने भी परमेश्वर की नाईं अपने कामों को पूरा कर के विश्राम किया है। 
Hebrews 4:11 सो हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्न करें, ऐसा न हो, कि कोई जन उन की नाईं आज्ञा न मान कर गिर पड़े। 
Hebrews 4:12 क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। 
Hebrews 4:13 और सृष्‍टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है वरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपरदा हैं।
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे। 
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। 
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-32