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शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

पुल


   लेखक जेम्स मिचनर का उपन्यास Centennial अमेरिका के पश्चिमी इलाके के बसाए जाने के इतिहास पर आधारित एक काल्पनिक कहानी है, जिसका नायक फ्रेन्च-कैनेडियन मूल का पास्किनेल नामक व्यक्ति है, जिसमें होकर मिचनर उस इलाके के एरापाहो जाति के मूल निवासियों और यूरोप से आकर बसने वाले लोगों की कहानी को एक बनाते हैं। जैसे जैसे यह नायक शहर के बढ़ते हुए कोलाहल और भीड़ तथा बाहर के खुले मैदानों के मध्य विचरण करता है, वह उन दोनों अत्यन्त भिन्न लोगों के मध्य संपर्क का एक माध्यम, एक पुल बन जाता है।

   मसीह यीशु के अनुयायियों के पास भी यह सुअवसर है कि वे दो बिल्कुल भिन्न प्रकार के लोगों के मध्य संपर्क का माध्यम, एक पुल बन सकें - जो प्रभु यीशु मसीह और उसमें मिलने वाले उद्धार तथा पापों की क्षमा के विषय में नहीं जानते और प्रभु यीशु के बीच। मसीही विश्वासियों की आरंभिक मण्डलियों के समय में, थिस्सलुनीके के मसीही विश्वासी अपनी मूर्ति-पूजक संस्कृति के लोगों के लिए इसी प्रकार का पुल बने; और उनके लिए प्रेरित पुलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा, "क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है" (1 थिस्सलुनीकियों 1:8)। जिस पुल को उन्होंने बनाया उसके दो घटक थे, "प्रभु यीशु का सन्देश" और उन लोगों के अपने मसीही विश्वास के जीवन का उदाहरण। उन्हें देखकर सब लोगों को स्पष्ट था कि "...तुम कैसे मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्चे परमेश्वर की सेवा करो" (पद 9)।

   जब हम अपने मसीही विश्वास के जीवन के उदाहरण तथा परमेश्वर के वचन बाइबल के सन्देश के द्वारा प्रभु परमेश्वर के बारे में लोगों को बताते हैं, तो जो प्रभु यीशु को अभी तक नहीं जानते हैं, उनके और प्रभु यीशु के मध्य में हम संपर्क बनाने वाले पुल का कार्य करते हैं। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु के सुसमाचार को अपने जीवन में जी कर दिखाईये
 और लोग आपसे प्रभु के सन्देश को भी सुनने लगेंगे।

क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें? और प्रचारक बिना क्योंकर सुनें? और यदि भेजे न जाएं, तो क्योंकर प्रचार करें? जैसा लिखा है, कि उन के पांव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं। - रोमियों 10:13-15

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 1:1-10
1 Thessalonians 1:1 पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्‍सलुनिकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है। अनुग्रह और शान्‍ति तुम्हें मिलती रहे। 
1 Thessalonians 1:2 हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
1 Thessalonians 1:3 और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं। 
1 Thessalonians 1:4 और हे भाइयो, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो। 
1 Thessalonians 1:5 क्योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन सामर्थ और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुंचा है; जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे। 
1 Thessalonians 1:6 और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आत्मा के आनन्द के साथ वचन को मान कर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे। 
1 Thessalonians 1:7 यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने। 
1 Thessalonians 1:8 क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। 
1 Thessalonians 1:9 क्योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम कैसे मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्चे परमेश्वर की सेवा करो। 
1 Thessalonians 1:10 और उसके पुत्र के स्वर्ग पर से आने की बाट जोहते रहो जिसे उसने मरे हुओं में से जिलाया, अर्थात यीशु की, जो हमें आने वाले प्रकोप से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 21-22
  • मत्ती 28


गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

नियंत्रित


   वियतनाम में पाए जाने वाले मोटे पेट वाले सूअरों से लेकर साईबीरिया में पाई जाने वाली लोमड़ी तक, मनुष्यों ने सभी प्रकार के जंगली जानवरों को नियंत्रित कर रखा है। लोगों को बन्दरों से करतब करवाना, और उनसे तथा अन्य जानवरों से विज्ञापनों एवं फिल्मों में अभिनय करवाना, हिरनों को अपने हाथों में से खाना लेना आदि अच्छा लगता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने लिखा है, "क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं" (याकूब 3:7)।

   परन्तु कुछ ऐसा भी है जिसे नियंत्रित करना मनुष्य के लिए संभव नहीं है; और इस छोटी सी चीज़ के कारण हम सभी, कभी ना कभी किसी ना किसी परेशानी में अवश्य ही पड़े हैं - हमारी जीभ। इसके विषय में याकूब आगे लिखता है, "पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है" (याकूब 3:8)। ऐसा क्यों? क्योंकि हमारे शब्दों का उच्चारण चाहे हमारी जीभ के द्वारा होता है, परन्तु उनका उदगम स्थल हमारा मन है और प्रभु यीशु ने कहा, "...क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है" (मत्ती 12:34)। और इसीलिए जीभ भली और बुरी दोनों ही प्रकार की बातों के लिए प्रयुक्त होती है (याकूब 3:9)। इस बात के लिए विद्वान, पीटर डेविड्स, ने कहा है, "एक ओर तो [जीभ] बहुत धर्मी और सदाचारी हो सकती है, परन्तु दूसरी ओर वही जीभ बहुत अशुद्ध और बुराई से भरी भी हो सकती है।"

   यदि हम अपने इस छोटे से अंग को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो क्या यह हमारे जीवन भर हमें प्रतिदिन समस्या में डालने वाली परेशानी बनकर रहेगी, हमेशा बुराई करने को तैयार (पद 10)? परमेश्वर के अनुग्रह से ऐसा नहीं है। परमेश्वर ने हमें मजबूर और असहाय नहीं छोड़ा है। यदि हम परमेश्वर को करने दें तो, जैसा भजनकार कहता है, वह हमारे मुँह पर "पहरा बैठा" कर हमारे होंठों की रखवाली कर सकता है (भजन 141:3)। परमेश्वर के लिए कुछ असंभव नहीं है; वह अनियंत्रित को नियंत्रित कर सकता है। - डेव ब्रैनन


अपनी जीभ को नियंत्रित करने के लिए अपने मन को प्रभु यीशु के नियंत्रण में समर्पित कर दें।

हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार पर रखवाली कर! मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे; मैं अनर्थकारी पुरूषों के संग, दुष्ट कामों में न लगूं, और मैं उनके स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं में से कुछ न खाऊं! - भजन 141:3-4

बाइबल पाठ: याकूब 3:1-12
James 3:1 हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत उपदेशक न बनें, क्योंकि जानते हो, कि हम उपदेशक और भी दोषी ठहरेंगे। 
James 3:2 इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है। 
James 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं। 
James 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं। 
James 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है। 
James 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है। 
James 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं। 
James 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है। 
James 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं। 
James 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं। 
James 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए। 
James 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 19-20
  • मत्ती 27:51-66

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

सौंप दिया


   मार्क ने दृढ़ता से कहा, "मैं परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता हूँ और मैं नहीं जाऊँगा।" उसकी माँ एमी का गला एक बार फिर रुँध गया, और वह अपने आँसुओं को रोकने के प्रयास करने लगी। उसका बेटा एक प्रसन्न रहने वाले लड़के से खिसिया हुआ, बदमिज़ाज और असहयोगी युवक बन गया था। जीवन एक युद्ध भूमि थी और इतवार का दिन भयावह बन गया था क्योंकि मार्क अपने परिवार के साथ चर्च जाने से इन्कार करता था। अन्ततः उसके निराश माता-पिता ने एक सलाहकार की सहायता ली जिसने उन्हें समझाया: "मार्क को अपने विश्वास की यात्रा का आरंभ स्वयं ही करना होगा। आप उसे परमेश्वर के राज्य में जबरन नहीं धकेल सकते हैं। परमेश्वर को अपना काम करने के लिए समय और स्थान दीजिए। आप बस प्रार्थना और प्रतीक्षा करते रहें।"

   एमी ने प्रार्थना और प्रतीक्षा करना आरंभ कर दिया। एक दिन परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के जो शब्द उसने पढ़े थे, वे उसके मन में गूँजने लगे। उस खण्ड में प्रभु यीशु के चेले दुष्टात्मा से ग्रसित एक लड़के की सहायता करने में असमर्थ रहे थे, परन्तु प्रभु यीशु के पास उस समस्या का समाधान था। प्रभु यीशु ने कहा: "... उसे मेरे पास लाओ" (मरकुस 9:19)। एमी के मन में आया कि यदि प्रभु यीशु उस चरम स्थिति में भी उस लड़के की सहायाता कर सकते थे और उसे चँगा कर सकते थे, तो अवश्य ही वे उसके बेटे मार्क की भी सहायता कर सकते हैं। जब एमी को यह विचार आ रहे थे उस समय कमरे की खिड़की से सूरज की रौशनी फर्श के एक भाग पर पड़ रही थी, उसे चमकदार बना रही थी। एमी ने कल्पना की कि उस रौशनी में वह और मार्क प्रभु यीशु के साथ खड़े हैं। अपने मन में ही एमी ने अपने बेटे को उस प्रभु के हाथों में सौंप दिया, जो उसके बेटे से उससे भी अधिक प्रेम करता था, और उन दोनों को वहाँ पर छोड़ कर वह स्वयं उस रौश्नी के दायरे से पीछे हट गई। एमी की ओर से अब मार्क प्रभु यीशु के हवाले था।

   प्रतिदिन एमी खामोशी से मार्क को प्रभु यीशु के हाथों में सौंप देती है, उसके लिए प्रार्थना करती है, क्योंकि उसे विश्वास है कि प्रभु यीशु मार्क के बारे में, उसकी आवश्यकताओं के बारे में और मार्क की सहायता के लिए कब, क्या, कहाँ और कैसे करना है, यह प्रभु ही सबसे बेहतर जानता है। एमी जानती है कि अपने समय में, अपने तरीके से प्रभु उसके बेटे के लिए सर्वोत्त्म करेगा। - मेरियन स्ट्राउड


प्रार्थना विश्वास की आवाज़ है कि परमेश्वर जानता है और ध्यान रखता है।

इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। - 2 तिमुथियुस 1:12

बाइबल पाठ: मरकुस 9:14-27
Mark 9:14 और जब वह चेलों के पास आया, तो देखा कि उन के चारों ओर बड़ी भीड़ लगी है और शास्त्री उन के साथ विवाद कर रहें हैं। 
Mark 9:15 और उसे देखते ही सब बहुत ही आश्चर्य करने लगे, और उस की ओर दौड़कर उसे नमस्‍कार किया। 
Mark 9:16 उसने उन से पूछा; तुम इन से क्या विवाद कर रहे हो? 
Mark 9:17 भीड़ में से एक ने उसे उत्तर दिया, कि हे गुरू, मैं अपने पुत्र को, जिस में गूंगी आत्मा समाई है, तेरे पास लाया था। 
Mark 9:18 जहां कहीं वह उसे पकड़ती है, वहीं पटक देती है: और वह मुंह में फेन भर लाता, और दांत पीसता, और सूखता जाता है: और मैं ने चेलों से कहा कि वे उसे निकाल दें परन्तु वह निकाल न सके। 
Mark 9:19 यह सुनकर उसने उन से उत्तर देके कहा: कि हे अविश्वासी लोगों, मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूंगा और कब तक तुम्हारी सहूंगा? उसे मेरे पास लाओ। 
Mark 9:20 तब वे उसे उसके पास ले आए: और जब उसने उसे देखा, तो उस आत्मा ने तुरन्त उसे मरोड़ा; और वह भूमि पर गिरा, और मुंह से फेन बहाते हुए लोटने लगा। 
Mark 9:21 उसने उसके पिता से पूछा; इस की यह दशा कब से है? 
Mark 9:22 उसने कहा, बचपन से: उसने इसे नाश करने के लिये कभी आग और कभी पानी में गिराया; परन्तु यदि तू कुछ कर सके, तो हम पर तरस खाकर हमारा उपकार कर। 
Mark 9:23 यीशु ने उस से कहा; यदि तू कर सकता है; यह क्या बात है, विश्वास करने वाले के लिये सब कुछ हो सकता है। 
Mark 9:24 बालक के पिता ने तुरन्त गिड़िगड़ाकर कहा; हे प्रभु, मैं विश्वास करता हूं, मेरे अविश्वास का उपाय कर। 
Mark 9:25 जब यीशु ने देखा, कि लोग दौड़कर भीड़ लगा रहे हैं, तो उसने अशुद्ध आत्मा को यह कहकर डांटा, कि हे गूंगी और बहिरी आत्मा, मैं तुझे आज्ञा देता हूं, उस में से निकल आ, और उस में फिर कभी प्रवेश न कर। 
Mark 9:26 तब वह चिल्लाकर, और उसे बहुत मरोड़ कर, निकल आई; और बालक मरा हुआ सा हो गया, यहां तक कि बहुत लोग कहने लगे, कि वह मर गया। 
Mark 9:27 परन्तु यीशु ने उसका हाथ पकड़ के उसे उठाया, और वह खड़ा हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 17-18
  • मत्ती 27:27-50


मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

प्रेम


   पुस्तक A General Theory of Love के लेखक लिखते हैं कि "जब भी ज्ञान और भावनाएं टकराते हैं, तो बहुधा हृदय की बात ही अधिक समझदारी वाली होती है।" उनका कहना है कि पहले माना जाता था कि मस्तिष्क को मन पर राज्य करना चाहिए, परन्तु विज्ञान अब पहचान रही है कि इसका विपरीत ही सही है; "जो हम हैं, और जो हम बन जाएंगे, कुछ सीमा तक इस बात पर निर्भर करता है कि हम किससे प्रेम रखते हैं।"

   जो परमेश्वर के वचन बाइबल से परिचित हैं वे जानते हैं कि इन लेखकों की यह बात कोई नई खोज नहीं है, वरन एक पुराना सत्य है। परमेश्वर ने जो सबसे महत्वपूर्ण आज्ञा अपने लोगों को दी उसमें मन का प्रमुख स्थान है: "तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना" (व्यवस्थाविवरण 6:5)। बाद में पुराने नियम में दी गई इस आज्ञा को उध्दत करते समय प्रभु यीशु ने इसमें ’बुद्धि’ को भी जोड़ दिया (मरकुस 12:30; लूका 10:27। जो वैज्ञनिक आज पता लगा रहे हैं उसे बाइबल सदा से ही सिखाती आई है।

   हम में से जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं वे इसके महत्व को पहचानते हैं कि वे किस से प्रेम रखते हैं। जब हम परमेश्वर की सबसे महान आज्ञा का पालन करते हैं और परमेश्वर को अपने प्रेम का विषय बना लेते हैं, तो हम इस बात के भी आश्वस्त हो जाते हैं कि अब हमारा उद्देश्य हमारी कल्पना तथा कुछ करने की हमारी अपनी क्षमता से भी कहीं अधिक बढ़कर है। जब परमेश्वर के प्रति लालसा हमारे मन पर राज्य करती है, तब हमारा मस्तिष्क उसकी सेवा करने के तरीकों पर केंद्रित रहता है, और हमारे कार्य पृथ्वी पर परमेश्वर के राज्य की बढ़ोतरी तथा स्वर्ग में उसकी महिमा के लिए होते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हर उस दिन को व्यर्थ गिनें जिसे आपने परमेश्वर से प्रेम करने में व्यतीत नहीं किया है। - ब्रदर लॉरेंस

और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे - व्यवस्थाविवरण 10:12 

बाइबल पाठ: मरकुस 12:28-34
Mark 12:28 और शास्‍त्रियों में से एक ने आकर उन्हें विवाद करते सुना, और यह जानकर कि उसने उन्हें अच्छी रीति से उत्तर दिया; उस से पूछा, सब से मुख्य आज्ञा कौन सी है? 
Mark 12:29 यीशु ने उसे उत्तर दिया, सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। 
Mark 12:30 और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। 
Mark 12:31 और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं। 
Mark 12:32 शास्त्री ने उस से कहा; हे गुरू, बहुत ठीक! तू ने सच कहा, कि वह एक ही है, और उसे छोड़ और कोई नहीं। 
Mark 12:33 और उस से सारे मन और सारी बुद्धि और सारे प्राण और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना और पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, सारे होमों और बलिदानों से बढ़कर है। 
Mark 12:34 जब यीशु ने देखा कि उसने समझ से उत्तर दिया, तो उस से कहा; तू परमेश्वर के राज्य से दूर नहीं: और किसी को फिर उस से कुछ पूछने का साहस न हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 15-16
  • मत्ती 27:1-26


सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

वचन


   परमेश्वर का वचन हमारे पास अनेकों रुप में आता है, जैसे कि परमेश्वर के वचन बाइबल पर आधारित उपदेश, परमेश्वर की आराधना और स्तुति के लिए लिखे गए गीत, बाइबल अध्ययन समूहों में मिलने वाली शिक्षाओं और व्याख्याओं द्वारा, आध्यात्म और भक्ति लेखों द्वारा, इत्यादि; ये सभी माध्यम पवित्र-शास्त्र से हमारे लिए परमेश्वर की सच्चाईयों को लेकर आते हैं। लेकिन हम अपने व्यक्तिगत बाइबल पठन एवं अध्ययन की अवहेलना नहीं कर सकते हैं।

   हाल ही में मैंने बाइबल में पुराने नियम की पुस्तक व्यवस्थाविवरण तथा नए नियम की पुस्तक मत्ती 5-7 अध्याय में दिए प्रभु यीशु के पहाड़ी सन्देश का समानान्तर परिच्छेद-दर-परिच्छेद अध्ययन किया और इस ने मेरा हृदय छू लिया। बाइबल के इन दोनों ही खण्डों में हमारे विश्वास से संबंधित नियम भी पाए जाते हैं; व्यवस्थाविवरण 5:6-21 में दस आज्ञाएं दी गईं हैं तथा मत्ती 5:3-12 में प्रभु यीशु मसीह के धन्य वचन। व्यवस्थाविवरण हमें परमेश्वर द्वारा इस्त्राएल के साथ बाँधी गई उस पुरानी वाचा को दिखाता है जिसका पालन परमेश्वर अपने लोगों के जीवन में देखना चाहता था। मत्ती में प्रभु यीशु दिखाते हैं कि कैसे उन्होंने उस व्यवस्था को पूरा करके हमारे लिए नई वाचा के सिद्धांत स्थापित किए जो हमें व्यवस्था के बन्धन से मुक्त कर देते हैं।

   अपने सभी विश्वासियों को परमेश्वर ने ना केवल अपना वचन वरन अपना पवित्र आत्मा भी दिया है, जो उनके अन्दर निवास करता है, उन्हें उस वचन को सिखाता है, जीवन व्यतीत करने की सामर्थ और शिक्षा देता है, सदाचारिता एवं पवित्रता के लिए कायल करता है। पवित्र आत्मा के इस कार्य का परिणाम होता है हमारे जीवनों में समझदारी, पश्चाताप, नवीनिकरण और प्रभु यीशु में उन्नति। मसीही धर्मशास्त्री फिलिप स्पेनर ने लिखा: " परमेश्वर का वचन हमारे जितना अधिक निकट होगा, हम विश्वास में उतने ही अधिक दृढ़ और फलदायी होंगे।" आईए हम भजनकार के साथ प्रार्थना करें: "मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं" (भजन 119:18)। - डेव एग्नर


जब परमेश्वर का वचन हमारे अन्दर बसेगा तो वह हमारे जीवनों से प्रवाहित भी होगा।

परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। वह मेरी महिमा करेगा, क्योंकि वह मेरी बातों में से ले कर तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना 16:13-14

बाइबल पाठ: भजन 119:17-24
Psalms 119:17 अपने दास का उपकार कर, कि मैं जीवित रहूं, और तेरे वचन पर चलता रहूं। 
Psalms 119:18 मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं। 
Psalms 119:19 मैं तो पृथ्वी पर परदेशी हूं; अपनी आज्ञाओं को मुझ से छिपाए न रख! 
Psalms 119:20 मेरा मन तेरे नियमों की अभिलाषा के कारण हर समय खेदित रहता है। 
Psalms 119:21 तू ने अभिमानियों को, जो शापित हैं, घुड़का है, वे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटके हुए हैं। 
Psalms 119:22 मेरी नामधराई और अपमान दूर कर, क्योंकि मैं तेरी चितौनियों को पकड़े हूं। 
Psalms 119:23 हाकिम भी बैठे हुए आपास में मेरे विरुद्ध बातें करते थे, परन्तु तेरा दास तेरी विधियों पर ध्यान करता रहा। 
Psalms 119:24 तेरी चितौनियां मेरा सुखमूल और मेरे मन्त्री हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 14
  • मत्ती 26:51-75


रविवार, 12 फ़रवरी 2017

फलदायी


   मेरा एक मित्र मोन्टाना प्रांत के मैदानों में स्थित एक फार्म में रहता है। उसके घर जाने वाला लंबा मार्ग सूखी और बंजर भूमि से होकर निकलता है। उसके घर के निकट आते समय अनेकों प्रकार की हरियाली और वनस्पति के भू-भागों को देखा जा सकता है जो आस-पास के उस सूखे और बंजर इलाके के सम्मुख एक तुलना प्रस्तुत करते हैं। इसका कारण है उसके घर के पास से बहने वाली एक नदी; उस नदी के किनारे उगने वाली वनस्पति सदा हरी-भरी बनी रहती है जबकि उस नदी से दूरी पर स्थित भूमि सूखी और बंजर रहती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में इसी बात को यिर्मयाह भविष्यद्वकता परमेश्वर पर विश्वास करने वालों पर लागू करके समझाता है कि विश्वास करने वाले जल के सोतों के पास उगने वाले वृक्ष के समान हैं जो सदा सींचा जाता है और  हरा रहता है। संसार के बहुत से लोग परमेश्वर से दूर रहने की कुम्हला देने वाली तपन और बंजर करने वाले अकाल के साथ जीवन जीना चुन लेते हैं, परन्तु जो परमेश्वर में विश्वास करते एवं विश्वास को बनाए रखते हैं वे सदा लहलहाते और फलदायी रहेंगे; अपने तथा दूसरों के लिए शांति एवं आशीष का कारण रहेंगे। परमेश्वर पर भरोसा रखने का अर्थ है उसकी जीवनदायक भलाई में अपने जड़ें जमा लेना, जहाँ से उसके प्रेम, देख-भाल और आशीष सदा हमारे जीवनों में प्रवाहित होती रहती है, हमें तर-ओ-ताज़ा करती रहती है, किसी भी विपरीत परिस्थिति में मुर्झाने या सूखने नहीं देती।

   आज पाप के कारण संसार का हाल चाहे जैसा भी हो, अन्ततः परमेश्वर सब कुछ ठीक एवं भला कर देगा। हम उस पर, उसकी योजनाओं, उसके तरीकों और उसके समय पर विश्वास बनाए रखें क्योंकि वह हमारी प्रत्येक हानि को हमारे लाभ के लिए प्रयोग करता है और हमारे हर दुःख द्वारा हमें परिपक्व बनाता है जिससे हम उसकी सामर्थ के द्वारा पाप के कारण सूखे और बंजर संसार में उसके लिए फलदायी हो सकें। - जो स्टोवैल


परमेश्वर की भलाई के सोते, प्रभु यीशु में अपनी जड़ें जमा लीजिए; 
और आपका जीवन सदा लहलहाता और फलदायी रहेगा।

क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है। वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है। - भजन 1:1-3

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:1-8
Jeremiah 17:1 यहूदा का पाप लोहे की टांकी और हीरे की नोक से लिखा हुआ है; वह उनके हृदयरूपी पटिया और उनकी वेदियों के सींगों पर भी खुदा हुआ है। 
Jeremiah 17:2 उनकी वेदियां और अशेरा नाम देवियां जो हरे पेड़ों के पास और ऊंचे टीलों के ऊपर हैं, वे उनके लड़कों को भी स्मरण रहती हैं। 
Jeremiah 17:3 हे मेरे पर्वत, तू जो मैदान में है, तेरी धन-सम्पत्ति और भण्डार मैं तेरे पाप के कारण लुट जाने दूंगा, और तेरे पूजा के ऊंचे स्थान भी जो तेरे देश में पाए जाते हैं। 
Jeremiah 17:4 तू अपने ही दोष के कारण अपने उस भाग का अधिकारी न रहने पाएगा जो मैं ने तुझे दिया है, और मैं ऐसा करूंगा कि तू अनजाने देश में अपने शत्रुओं की सेवा करेगा, क्योंकि तू ने मेरे क्रोध की आग ऐसी भड़काई जो सर्वदा जलती रहेगी। 
Jeremiah 17:5 यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है। 
Jeremiah 17:6 वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा। 
Jeremiah 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। 
Jeremiah 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 13
  • मत्ती 26:26-50


शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

जीवित


   क्या कोई मनुष्य वैधानिक रूप से मृत घोषित होने के पश्चात अधिकारिक रूप से जीवित हो सकता है? यह प्रश्न अंतर्राष्ट्रीय समाचार बन गया जब 25 वर्ष से लापता रहने वाला एक व्यक्ति सब के सामने आ गया। अपने लापता होने के समय वह बेरोज़गार था, नशे का आदि था और अपने बच्चों की देख-रेख के लिए जो पैसे उसे देने थे उसे बहुत लंबे समय से चुका नहीं पा रहा था; इसलिए उसने कहीं छुप जाने की सोची। लेकिन छुपने से बाहर आने के पश्चात उसे पता चला कि मृतकों में से लौट आना कितना कठिन है। जब वह व्यक्ति न्यायलय में गया कि उसे मृतक घोषित करने वाले फैसले को पलटवा ले, तो न्यायाधीश ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया क्योंकि वैधानिक रूप से ऐसे फैसले को तीन वर्ष के अन्दर ही चुनौती दी जा सकती थी, उसके बाद नहीं।

   लेकिन संसार के न्यायालय के लिए जो असाधारण निवेदन था, परमेश्वर के लिए वह सामान्य प्रतिदिन का काम है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पौलुस प्रेरित द्वारा इफसुस की मसीही मण्डली को लिखी गई पत्री में पाते हैं कि जब हम अपने पाप की दशा में आत्मिक रूप से मरे हुए थे, परमेश्वर ने हमें मसीह यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा के द्वारा अपने अनुग्रह से जिलाया (इफिसियों 2:1, 5)। हमारा इस प्रकार मसीह यीशु में विश्वास द्वारा जिलाया जाना हमारे लिए तो आनन्द की बात है, परन्तु परमेश्वर के लिए बहुत दुःख की तथा एक बहुत बड़ी कीमत चुकाने की बात थी, क्योंकि पापों से हमें छुटकारा दिलाने के लिए परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु मसीह को शरीर में आकर दुःख उठाने, मारे जाने, गाड़े जाने और फिर मृतकों में से जी उठने से होकर निकलना पड़ा।

   शारीरिक जीवन का प्रमाण दिखाना एक बात है, परन्तु हम मसीही विश्वासियों के सामने सदा चुनौती रहती है कि हम अपने आत्मिक जीवन के प्रमाण को संसार के लोगों के सामने रखें। मसीह यीशु में जीवित घोषित होने के पश्चात, हमें जीवित करने के इस असीम अनुग्रह और करुणा के लिए प्रभु परमेश्वर के प्रति सदा कृतज्ञ रहने चाहिए। - मार्ट डी हॉन


मसीह यीशु इसलिए मरा ताकि हम जीवित रह सकें।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - 2 कुरिन्थियों 5:15

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 11-12
  • मत्ती 26:1-25