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मंगलवार, 12 जुलाई 2016

नाम


   किसी व्यक्ति के उपनाम अकसर उस व्यक्ति के किसी गुण या शारीरिक विशेषता पर आधारित होते हैं, और उम्र भर उस व्यक्ति के साथ लगे रहते हैं। बचपन में मेरे होंठ चेहरे के अनुपात में काफी मोटे थे और मुझे चिड़ाने के लिए बच्चे मुझे "बड़े होंठोंवाला" कहा करते थे; मैं प्रसन्न हूँ कि बचपन में मेरे प्राथमिक स्कूल में मेरे सहपाठियों द्वारा दिया गया मेरा यह उपनाम मेरे साथ लगा हुआ नहीं है।

   अपने उस उपनाम के विपरीत, मैं परमेश्वर के विभिन्न गुणों और चरित्र को दर्शाने वाले, परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए, उसके अनेक नामों को बहुत पसन्द करता हूँ। परमेश्वर अद्भुत रूप से बहुआयामी तथा अनेकों गुणों को दिखाने वाला परमेश्वर है, और बाइबल में दिए गए ये नाम यही दिखाते हैं। उन नामों में से कुछ हैं:
  • एलोहिम, परमेश्वर जो ईश्वरों का ईशवर है
  • यहोवा यिरे, परमेश्वर जो प्रावधान करता है
  • एल-शद्दाई, सर्वशक्तिमान परमेश्वर
  • यहोवा राफा, चंगा करने वाला परमेश्वर
  • यहोवा शालोम, शान्ति का परमेश्वर
  • यहोवा शामा, साथ-साथ रहने वाला परमेश्वर
  • यहोवा याहवे, वाचाओं को निभाने वाला हमारा प्रेमी परमेश्वर


   इसलिए इसमें कोई विसमय की बात नहीं है कि बाइबल की नीतिवचन पुस्तक का लेखक हमें स्मरण करवाता है कि "यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है" (नीतिवचन 18:10)। जब जीवन की परिस्थितियाँ कठिन हों, आप भयभीत या असुरक्षित महसूस करें, तो परमेश्वर के इन तथा अन्य नामों पर मनन करें और उससे प्रार्थना करें। आश्वस्त रहें, प्रभु परमेश्वर अपने नाम के प्रति वफादार रहेगा। - जो स्टोवैल


परमेश्वर के नाम, जो उसके चरित्र को दर्शाते हैं, 
हमें जब भी उसकी आवश्यकता होती है, सांत्वना प्रदान करते हैं।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: नीतिवचन 18:1-10
Proverbs 18:1 जो औरों से अलग हो जाता है, वह अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिये ऐसा करता है, 
Proverbs 18:2 और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है। मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता, वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है। 
Proverbs 18:3 जहां दुष्ट आता, वहां अपमान भी आता है; और निन्दित काम के साथ नामधराई होती है। 
Proverbs 18:4 मनुष्य के मुंह के वचन गहिरा जल, वा उमण्डने वाली नदी वा बुद्धि के सोते हैं। 
Proverbs 18:5 दुष्ट का पक्ष करना, और धर्मी का हक मारना, अच्छा नहीं है। 
Proverbs 18:6 बात बढ़ाने से मूर्ख मुकद्दमा खड़ा करता है, और अपने को मार खाने के योग्य दिखाता है। 
Proverbs 18:7 मूर्ख का विनाश उस की बातों से होता है, और उसके वचन उस के प्राण के लिये फन्दे होते हैं। 
Proverbs 18:8 कानाफूसी करने वाले के वचन स्वादिष्ट भोजन की नाईं लगते हैं; वे पेट में पच जाते हैं। 
Proverbs 18:9 जो काम में आलस करता है, वह बिगाड़ने वाले का भाई ठहरता है। 
Proverbs 18:10 यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 4-6
  • प्रेरितों 17:16-34


सोमवार, 11 जुलाई 2016

कैसा हो?


   मुझे स्मरण हैं 1991 में वे टेलिविज़न समाचार रिपोर्ट्स देखना जब मॉस्को की सड़कों पर अहिंसक क्रांति घटित हो रही थी। रूस के वे नागरिक जो अब तक अपने जीवन की हर बात के लिए सरकार द्वारा निर्धारित और नियंत्रित कार्यक्रमों तथा योजनाओं के अनुसार रहा करते थे, अचानक ही स्थान स्थान पर खड़े होकर कहने लगे, "अब हम स्वतंत्र नागरिकों के समान आचरण करेंगे"; सरकार द्वारा पूर्णतः नियंत्रित अपने जीवन के विरोध में वे सड़कों पर आने लगे और सैनिक टैंकों के सामने आकर खड़े होने लगे। भवनों के अन्दर बैठे नेतृत्व करने वाले सरकारी लोगों और बाहर जमा जन समूह के चेहरों पर दिखने वाले भाव यह स्पष्ट दिखा रहे थे कि वास्तव में कौन भयभीत है और कौन स्वतंत्र है।

   फिनलैंड के टेलिविज़न पर दिखाई जा रही मॉस्को के रेड स्कुएयर में घटित होने वाले बातों को देखकर मुझे "मसीही विश्वास" को समझने का एक नया दृष्टिकोण मिला - मसीही विश्वास मानसिक विक्षेप का विपरीतार्थक शब्द है। भय से ग्रस्त मान्सिक विक्षेपित व्यक्ति हर बात में अपने भय के कारण को देखता है और उसी के अनुसार अपने जीवन को संचालित करता है। उसके आस-पास, या उसके साथ जो कुछ भी होता है, वह उसके भय को और बढ़ाता है।

   इसके विपरीत मसीही विश्वास है; मसीह यीशु पर विश्वास करने वाला व्यक्ति अपने जीवन को भय के आधार पर नहीं वरन परमेश्वर पर लाए गए उसके विश्वास के आधार पर संचालित करता है। उसके आस-पास, उसके जीवन में, चाहे कैसी भी अव्यवस्था और परेशान करने वाली परिस्थितियाँ क्यों ना हों, मसीही विश्वासी यह जानता और मानता है कि सब कुछ परमेश्वर के नियंत्रण में है, और परमेश्वर जो कुछ भी उसके जीवन में आने देगा वह उसकी भलाई ही के लिए है (रोमियों 8:28)। एक मसीही विश्वासी होने के नाते मुझे इस बात पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए कि मेरी भावनाएँ मेरी परिस्थितियों को लेकर क्या हैं, वरन मुझे हर समय इस बोध के साथ रहना चाहिए कि परमेश्वर मुझसे प्रेम करता है और मैं परमेश्वर की सन्तान होने के नाते उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण हूँ।

   कैसा हो यदि हम मसीही विश्वासी, हम जो परमेश्वर के राज्य के लोग हैं, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना द्वारा लिखी गई बात "हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है" (1 यूहन्ना 4:4) की सच्चाई को अपने जीवनों में पूर्णत्या मानकर लागू कर लें? कैसा हो यदि हम मसीही समाज में सबसे अधिक दोहराई जाने वाली प्रार्थना - परमेश्वर की इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है वैसे ही पृथ्वी पर भी हो को प्रदर्शित करने वाले जीवन जीने लग जाएं? - फिलिप यैन्सी

जब आप प्रभु परमेश्वर में अपने विश्वास को पोषित करने लगेंगे, 
स्वतः ही आपके सभी भय भूखों मरने लगेंगे।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:1-6, 4:15-19
1 John 4:1 हे प्रियों, हर एक आत्मा की प्रतीति न करो: वरन आत्माओं को परखो, कि वे परमेश्वर की ओर से हैं कि नहीं; क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता जगत में निकल खड़े हुए हैं। 
1 John 4:2 परमेश्वर का आत्मा तुम इसी रीति से पहचान सकते हो, कि जो कोई आत्मा मान लेती है, कि यीशु मसीह शरीर में हो कर आया है वह परमेश्वर की ओर से है। 
1 John 4:3 और जो कोई आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है; जिस की चर्चा तुम सुन चुके हो, कि वह आने वाला है: और अब भी जगत में है। 
1 John 4:4 हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है। 
1 John 4:5 वे संसार के हैं, इस कारण वे संसार की बातें बोलते हैं, और संसार उन की सुनता है। 
1 John 4:6 हम परमेश्वर के हैं: जो परमेश्वर को जानता है, वह हमारी सुनता है; जो परमेश्वर को नहीं जानता वह हमारी नहीं सुनता; इसी प्रकार हम सत्य की आत्मा और भ्रम की आत्मा को पहचान लेते हैं। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 1-3
  • प्रेरितों 17:1-15


रविवार, 10 जुलाई 2016

नज़रें उठाएं


   ब्राज़ील के रीयो-डी-जेनेरियो शहर के साथ लगे कोरकोवाडो पहाड़ के ऊपर 30 मीटर ऊँची और 635 टन वज़न वाली उद्धारकर्ता यीशु की मूर्ति है। यह मूर्ति अपनी बाहें फैलाए रीयो-डी-जेनेरियो शहर की ओर देख रही है और उन बाहों की चौड़ाई 28 मीटर है। रीयो-डी-जेनेरियो शहर में कहीं से भी, चाहे दिन हो या रात, अगर आप उस पहाड़ की ओर नज़रें उठाएंगे तो आपको वह मूर्ति दिखाई देगी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह केवल उद्धारकर्ता ही नहीं, वरन सृष्टिकर्ता परमेश्वर भी हैं जिसने इस समस्त सृष्टि की रचना करी है। बाइबल के भजन 121 का विषयवस्तु यही सृष्टिकर्ता प्रभु परमेश्वर है। भजनकार इस भजन में पाठकों से कहता है कि वे अपनी नज़रें पर्वतों की ओर लगाएं, परमेश्वर की ओर देखें, क्योंकि, "... मुझे सहायता कहां से मिलेगी? मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है" (पद 1-2)। खतरों और परेशानियों से भरे इस संसार में हमारे जीवन को सही मार्गदर्शन तथा आवश्यक सामर्थ देने के लिए केवल परमेश्वर ही सक्षम है।

   हम अपनी नज़रें उस प्रभु परमेश्वर की ओर उठाएं जो हमारा ध्यान रखता है (पद 3), हमारी रक्षा करता है (पद 5-6) जो हर खतरे के समय में हमारा आसरा है और हमें बुराई से बचाए रखता है तथा अनन्तकाल तक अपनी देखभाल में हमें संरक्षित रखता है (पद 7-8)। विश्वास के साथ हम हम प्रभु यीशु की ओर नज़रें उठाएं, उस प्रभु की ओर जो हमारा उद्धारकर्ता, हमारा सृष्टिकर्ता, हमारा सहायक, हमारी आशा और हमारा अनन्तकाल का निवास स्थान है। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु क्रूस पर इसलिए चढ़ाया गया ताकि वह अपने विश्वासियों को स्वर्ग में ला सके।

और बहुत देशों के लोग आएंगे, और आपस में कहेंगे: आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्वर के भवन में जाएं; तब वह हम को अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे। क्योंकि यहोवा की व्यवस्था सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा। - यशायाह 2:3

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 41-42
  • प्रेरितों 16:22-40


शनिवार, 9 जुलाई 2016

प्रश्न


   जब जीवन में त्रासदी आती है, तो उसके साथ साथा मन में प्रश्न भी आते हैं। किसी करीबी प्रीय जन को खो देने पर हम परमेश्वर से भी अनेकों तीखे प्रश्न कर सकते हैं, जैसे कि "आप ने ऐसा क्यों होने दिया?"; "यह किसका दोष था?"; "क्या आपको मेरे दुःख की कोई चिन्ता नहीं है?" इत्यादि। मेरा विश्वास कीजिए, मैं एक ऐसा पिता हूँ जिसने अपनी पुत्री को उसकी किशोरावस्था में अचानक घटी एक दुर्घटना में खोया है, और मैंने भी अपने शोक में ऐसे ही कई प्रश्न परमेश्वर से किए हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब की पुस्तक में भी ऐसे ही कई प्रश्न दर्ज हैं; वे प्रश्न जो अय्युब ने अपने दुःखों और त्रासदी के समय में अपने मित्रों के साथ बैठकर शोक करने के समय में परमेश्वर से पूछे थे। अय्युब ने अचानक आ पड़ने वाली त्रासदी में ना केवल अपना परिवार खोया था, वरन अपनी सेहत और अपनी संपदा भी गँवा दी थी। एक समय अय्युब प्रश्न करता है, "दु:खियों को उजियाला, और उदास मन वालों को जीवन क्यों दिया जाता है?" (अय्युब 3:20)। थोड़ा आगे चलकर अय्युब पूछता है, "मुझ में बल ही क्या है कि मैं आशा रखूं? और मेरा अन्त ही क्या होगा, कि मैं धीरज धरूं?" (अय्युब 6:11); और फिर अय्युब परमेश्वर से कहता है "क्या तुझे अन्धेर करना, और दुष्टों की युक्ति को सफल कर के अपने हाथों के बनाए हुए को निकम्मा जानना भला लगता है?" (अय्युब 10:3)। संसार में अनेकों लोग हैं जिन्होंने असमय और अनायास चले गए किसी प्रीय जन की कब्र पर खड़े होकर अय्युब के प्रश्नों के समान ही प्रश्न उठाए हैं।

   लेकिन अय्युब की पुस्तक के अन्त के अध्याय चौंका देने वाले हैं। उन अन्तिम अध्यायों में (अय्युब 38-41) हम पाते हैं कि परमेश्वर ने अय्युब के प्रश्नों का उत्तर दिया; लेकिन परमेश्वर का उत्तर अप्रत्याशित था। उसकी दुःखदायी परिस्थितियों के लिए परमेश्वर ने अय्युब को कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, वरन पासा पलटते हुए परमेश्वर ने अय्युब से ही प्रश्न पूछने आरंभ कर दिए - ऐसे प्रश्न जो परमेश्वर की बुद्धिमता और सार्वभौमिकता की ओर ध्यान ले जाते हैं। प्रश्न जो पृथ्वी, सितारों और समुद्र आदि में विदित उसकी अद्भुत कारिगरी पर ध्यान केंद्रित करते हैं। परमेश्वर के सभी प्रश्न केवल एक ही बात की ओर इशारा करते हैं - परमेश्वर सार्वभौम एवं सर्वशक्तिमान है, सब बातों को जानता है, सब बातों और परिस्थितियों पर अधिकार रखता है और सदा ही उन्हें नियंत्रित करता है।

   जब कभी विपरीत परिस्थितियों के कारण हमारे मनों में ऐसे प्रश्न उठें, तो हम मसीही विश्वासियों को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारा परमेश्वर एक प्रेमी पिता है, सदा हमारा भला ही चाहता है, सर्वज्ञानी है और जानता है कि वह क्या कर रहा है। - डेव ब्रैनन


प्रत्येक शोक में हमारी सबसे बड़ी सांत्वना का कारण
 यह समझ रखना है कि सब बातें परमेश्वर ही के नियंत्रण में हैं।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: अय्युब 38:1-11
Job 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया, 
Job 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है? 
Job 38:3 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे। 
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे। 
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा? 
Job 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया, 
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे? 
Job 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानों वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया; 
Job 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहिनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया, 
Job 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़े लगा दिए, कि 
Job 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21


शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

अनिश्चित समय


   कुछ वर्ष पहले आई आर्थिक मंदी के समय में अनेक लोगों की नौकरियाँ जाती रहीं; दुःख कि बात थी कि मेरे बहनोई भी उन में से एक थे। अपनी परिस्थितियों के बारे में लिखते समय मेरी बहन ने बताया कि उनके सामने अनिश्चितताएँ अवश्य थीं, परन्तु फिर भी उनके अन्दर एक शान्ति थी क्योंकि वे जानते थे कि परमेश्वर उनकी देखभाल कर रहा है।

   प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने वाले प्रत्येक जन अनिश्चितता के समय में भी शान्त और आश्वस्त रह सकते हैं क्योंकि हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर पिता की ओर से यह आश्वासन है कि हमारा परमेश्वर पिता हम से प्रेम करता है और हमारी देखभाल करता है (मत्ती 6:24-34)। हम अपनी प्रत्येक चिंता और आवश्यकता निःसंकोच, धन्यवाद के साथ उसके पास ला सकते हैं, इस भरोसे के कारण कि वह हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा और हमें अपनी शान्ति में बनाए रखेगा (फिलिप्पियों 4:6-7), जैसा कि प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को अपनी पत्री में लिखा है। जब पौलुस यह कहता है कि "परमेश्वर की शान्ति जो सारी समझ से परे है..." तो यह दिखाता है कि इस अद्भुत शान्ति को हम चाहे किसी को समझा नहीं पाएं तो भी उसके परिणामों तथा उससे मिलने वाली मन और मस्तिष्क की सुरक्षा को अनुभव अवश्य कर सकते हैं।

   हमारी यह शान्ति इस भरोसे से आती है कि हमारा प्रभु परमेश्वर हमसे प्रेम करता है, हर बात में केवल हमारा भला ही चाहता है, और वही सभी परिस्थितियों और समयों पर नियंत्रण रखने तथा उनका संचालन करने वाला सर्वशक्तिमान परमेश्वर है। केवल वही है जो हर अनिश्चित समय में भी हमारी बेचैनी को शान्त कर सकता है, हमारे मन को आशा से भर सकता है और हर चुनौती एवं परिवर्तन की स्थिति में हमें आराम से रख सकता है। - पोह फैंग चिया


जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है,
 क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: मत्ती 6:24-34
Matthew 6:24 कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; “तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते”। 
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 36-37
  • प्रेरितों 15:22-41


गुरुवार, 7 जुलाई 2016

बचाव


   लौरेन कोरनैकी इस बात से बहुत खुश है कि उसने प्राथमिक चिकित्सा तथा हृदय-आघात होने पर बचाव करने के तरीके का प्रशिक्षण लिया था; लेकिन उसे यह एहसास कदापि नहीं था कि अपने इस प्रशिक्षण को उसे इतने शीघ्र अपने एक प्रीय जन पर इस्तेमाल करना पड़ जाएगा। लौरेन के पिता अपनी कार के नीचे लेट कर कुछ मरम्मत का कार्य कर रहे थे कि जिस जैक पर कार उठाई गई थी वह फिसल गया और वे कार के नीचे आ गए। २२ वर्षीय लौरेन ने बड़ा साहस दिखाते हुए अपने पिता को कार के नीचे से खींच कर निकाला और अपने प्रशिक्षण की सहायता से उनके प्राथमिक उपचार द्वारा एंबुलेंस तथा चिकित्सकों के पहुँचने तक उन्हें जीवित रखा।

   लौरेन द्वारा मृत्यु के मुँह से किए गए अपने पिता के इस बचाव से कहीं अधिक महान और महत्वपूर्ण है प्रभु यीशु द्वारा हमें पाप के चंगुल से अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान द्वारा बचा लेना। जब प्रभु यीशु ने अपने 12 चेलों को अपनी सेवकाई के कार्य को करने के लिए भेजा, तो उन्हें यह ज़िम्मेदारी सौंपी कि वे जाकर लोगों को बताएं कि परमेश्वर लोगों को पाप के दुषपरिणामों से बचा लेना चाहता है (लूका 9:1-6)। इस प्रचार द्वारा लोगों को बचा लेना उन चेलों के लिए अपनी किसी सामर्थ से कर पाना संभव नहीं था, वरन यह कार्य उन चेलों में होकर प्रभु यीशु ही करते थे। जब चेले प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा मिलने वाले इस बचाव के बारे में लोगों को बताते और सिखाते तो जो लोग उनकी बात का विश्वास करते प्रभु यीशु उन्हें उनके पापों के भारी बोझ से बचा लेता। उन चेलों द्वारा प्रभु यीशु के नाम में किए गए सुसमाचार प्रचार और चँगाई के कार्य इस बात का प्रमाण हैं कि प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर का राज्य वास्तव में इस पृथ्वी पर आ गया है।

   आज भी संसार के अनेक जन अपने पापों के बोझ तले दबे हुए हैं, अपने ही प्रयासों और कार्यों द्वारा पापों के निवारण का मार्ग ढूँढ़ रहे हैं किंतु सही और सफल मार्ग उन्हें मिल नहीं पा रहा है। संसार के हर जन को उस के पापों के  बोझ से प्रभु यीशु बचा सकते हैं; केवल इतना करना है कि सच्चे पश्चाताप के साथ प्रभु यीशु से अपने पापों की माफी माँगकर अपना जीवन उसे सौंप देना है, उसे अपना प्रभु स्वीकार कर लेना है। जो प्रभु यीशु द्वारा सेंत-मेंत उपलब्ध करवाए गए इस बचाव द्वारा बच जाते हैं, अब उनकी ज़िम्मेदारी हो जाती है कि वे इस बचाव के बारे में औरों को भी बताएं। - मार्विन विलियम्स


जो पाप से बचा लिए गए हैं वे दूसरों को इस बचाव के बारे में बताने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

प्रभु यीशु ने कहा: "’हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।" - मत्ती 11:28-30

बाइबल पाठ: लूका 9:1-6
Luke 9:1 फिर उसने बारहों को बुलाकर उन्हें सब दुष्टात्माओं और बिमारियों को दूर करने की सामर्थ और अधिकार दिया। 
Luke 9:2 और उन्हें परमेश्वर के राज्य का प्रचार करने, और बिमारों को अच्छा करने के लिये भेजा। 
Luke 9:3 और उसने उस से कहा, मार्ग के लिये कुछ न लेना: न तो लाठी, न झोली, न रोटी, न रूपये और न दो दो कुरते। 
Luke 9:4 और जिस किसी घर में तुम उतरो, वहीं रहो; और वहीं से विदा हो। 
Luke 9:5 जो कोई तुम्हें ग्रहण न करेगा उस नगर से निकलते हुए अपने पांवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो। 
Luke 9:6 सो वे निकलकर गांव गांव सुसमाचार सुनाते, और हर कहीं लोगों को चंगा करते हुए फिरते रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 34-35
  • प्रेरितों 15:1-21


बुधवार, 6 जुलाई 2016

मार्ग


   संभवतः आपने यह उक्ति सुनी होगी, "जीवन के मार्ग में अतीत के अनुभव, भविष्य के लिए मार्गदर्शक हैं ना कि थाम कर बैठ जाने का कारण।" बीते समयों की यादों तथा अनुभवों के आधार पर जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग ढूंढ़ने की बजाए, उन यादों तथा अनुभवों में थम कर बैठ जाना काफी सरल होता है। हम सब बीते दिनों की यादों को लेकर शिथिल होकर बैठने के प्रति अतिसंवेदन शील रहते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक नबी, यिर्मयाह, जिसे परमेश्वर ने संसार भर की जातियों के लिए भविष्यद्वक्ता होने के लिए बुलाया था (यिर्मयाह 1:4-5), यरुशालेम के निकट के एक छोटे नगर में रहने वाला पुरोहित था। यिर्मयाह को परमेश्वर ने एक बहुत कठिन कार्य सौंपा - लोगों को परमेश्वर से विमुख हो जाने के कारण उन पर आने वाले परमेश्वर के न्याय के बारे में बताए, मुख्यतः यहूदा के लोगों को। अपनी इस ज़िम्मेदारी को निभाते समय यिर्मयाह ने यह स्पष्ट कर दिया कि जो सन्देश वह दे रहा है उसका अपना नहीं है, वरन उसे परमेश्वर की ओर से मिला है (यिर्मयाह 7:1-2)।

   परमेश्वर ने उसके द्वारा लोगों से कहा: "...सड़कों पर खडे हो कर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे। पर उन्होंने कहा, हम उस पर न चलेंगे" (यिर्मयाह 6:16)। परमेश्वर चाहता था कि लोग आगे बढ़ने के लिए अपने अतीत पर ग़ौर करें, ताकि उन्हीं गलतियों को पुनः ना दोहराएं। बीते समयों और अनुभवों पर विचार करने से लोगों के लिए परमेश्वर के खरे मार्गों को पहचानना, परमेश्वर की विश्वासयोग्यता तथा उसकी उपलब्ध क्षमा को जानना, और जीवन में हमारे सही मार्ग पर आगे बढ़ने की उसकी इच्छा को समझना सरल हो जाता। परमेश्वर हमें हमारे अतीत से सिखाता है कि आगे बढ़ने का सही मार्ग उसपर विश्वास करके, उसके वचन बाइबल की शिक्षाओं के मार्गदर्शन द्वारा हमें मिलता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


बीते समयों में परमेश्वर की संगति से मिले अनुभव, 
अच्छे भविष्य के लिए उसके मार्गदर्शन में चलने की इच्छा जागृत करते हैं।

प्राचीनकाल के दिनों को स्मरण करो, पीढ़ी पीढ़ी के वर्षों को विचारो; अपने बाप से पूछो, और वह तुम को बताएगा; अपने वृद्ध लोगों से प्रश्न करो, और वे तुझ से कह देंगे। - व्यवस्थाविवरण 32:7

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 6:10-20
Jeremiah 6:10 मैं किस से बोलूं और किस को चिता कर कहूं कि वे मानें? देख, ये ऊंचा सुनते हैं, वे ध्यान भी नहीं दे सकते; देख, यहोवा के वचन की वे निन्दा करते और उसे नहीं चाहते हैं। 
Jeremiah 6:11 इस कारण यहोवा का कोप मेरे मन में भर गया हे; मैं उसे रोकते रोकते उकता गया हूँ। बाज़ारों में बच्चों पर और जवानों की सभा में भी उसे उंडेल दे; क्योंकि पति अपनी पत्नी के साथ और अधेड़ बूढ़े के साथ पकड़ा जाएगा। 
Jeremiah 6:12 उन लोगों के घर और खेत और स्त्रियां सब औरों की हो जाएंगीं; क्योंकि मैं इस देश के रहने वालों पर हाथ बढ़ाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है। 
Jeremiah 6:13 क्योंकि उन में छोटे से ले कर बड़े तक सब के सब लालची हैं; और क्या भविष्यद्वक्ता क्या याजक सब के सब छल से काम करते हैं। 
Jeremiah 6:14 वे, “शान्ति है, शान्ति,” ऐसा कह कह कर मेरी प्रजा के घाव को ऊपर ही ऊपर चंगा करते हैं, परन्तु शान्ति कुछ भी नहीं। 
Jeremiah 6:15 क्या वे कभी अपने घृणित कामों के कारण लज्जित हुए? नहीं, वे कुछ भी लज्जित नहीं हुए; वे लज्जित होना जानते ही नहीं; इस कारण जब और लोग नीचे गिरें, तब वे भी गिरेंगे, और जब मैं उन को दण्ड देने लगूंगा, तब वे ठोकर खाकर गिरेंगे, यहोवा का यही वचन है। 
Jeremiah 6:16 यहोवा यों भी कहता है, सड़कों पर खडे हो कर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे। पर उन्होंने कहा, हम उस पर न चलेंगे। 
Jeremiah 6:17 मैं ने तुम्हारे लिये पहरुए बैठा कर कहा, नरसिंगे का शब्द ध्यान से सुनना! पर उन्होंने कहा, हम न सुनेंगे। 
Jeremiah 6:18 इसलिये, हे जातियो, सुनो, और हे मण्डली, देख, कि इन लोगों में क्या हो रहा है। 
Jeremiah 6:19 हे पृथ्वी, सुन; देख, कि मैं इस जाति पर वह विपत्ति ले आऊंगा जो उनकी कल्पनाओं का फल है, क्योंकि इन्होंने मेरे वचनों पर ध्यान नहीं लगाया, और मेरी शिक्षा को इन्होंने निकम्मी जाना है। 
Jeremiah 6:20 मेरे लिये जो लोबान शबा से, और सुगन्धित नरकट जो दूर देश से आता है, इसका क्या प्रयोजन है? तुम्हारे होमबलियों से मैं प्रसन्न नहीं हूँ, और न तुम्हारे मेलबलि मुझे मीठे लगते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 32-33
  • प्रेरितों 14