ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 11 जून 2019

अवस्था



      हमारे चर्च के स्तुतिगान समूह में जब मेरे पति माउथ-ऑर्गन बजाते हैं तो मैंने ध्यान किया है कि वे कभी-कभी बजाते समय अपनी आँखे बन्द कर लेते हैं। उनका कहना है कि वे यह इसलिए करते हैं जिससे उनका ध्यान बंटाने वाली किसी बात के कारण उनके बजाने में खलल न पड़े और वे पूरी एकाग्रता से बजा सकें; उनका ध्यान केवल उनके माउथ-ऑर्गन, संगीत और स्वयँ पर हो और इन सबके द्वारा वे पूरी लगाने के साथ परमेश्वर की स्तुति कर सकें।

      कुछ लोग सोचते हैं कि प्रार्थना करते समय आँखें बन्द रखना क्या आवश्यक है? क्योंकि हम कभी भी, किसी भी समय प्रार्थना कर सकते हैं, इसलिए सदा ही आँखे बन्द करना शायद संभव न हो – जैसे कि तब, जब हम कहीं टहलने निकले हैं, या बागबानी कर रहे हैं, या गाड़ी चला रहे हैं।

      जब हम परमेश्वर से वार्तालाप कर रहे हों, तो परमेश्वर के वचन बाइबल में हमारे किसी विशेष अवस्था में होने के लिए कोई नियम या अनिवार्यता नहीं है। जब राजा सुलेमान ने मंदिर के समर्पण के समय प्रार्थना की तो उसने घुटने टेक कर और अपने हाथ स्वर्ग की ओर उठाकर प्रार्थना की (2 इतिहास 6:13-14)। बाइबल में घुटने टेक कर (इफिसियों 3:14), खड़े होकर (लूका 18:10-13), औंधे मूँह होकर (मत्ती 26:39) प्रार्थना करने की अवस्थाओं का उल्लेख आया है।

      हम चाहे परमेश्वर के सामने घुटने टेकें या खड़े हों, चाहे अपने हाथ स्वर्ग की ओर उठाएँ, या परमेश्वर पर ध्यान बेहतर केंद्रित करने के लिए आँखों को बन्द करें, मुख्य बात हमारे शरीर की अवस्था नहीं, हमारे मन की दशा है। हम  जो कुछ करते हैं वह सब हमारे हृदय से ही आता है (नीतिवचन 4: 23)। इसलिए जब हम प्रार्थना करें, तो हमारे हृदय सदा ही परमेश्वर के समक्ष श्रद्धा, कृतज्ञता, और नम्रता में झुके रहें, क्योंकि हम जानते हैं कि उसकी आँखे सदा हम पर लगी रहती हैं और उसके कान हमारी प्रार्थनाओं की ओर सदा लगे रहते हैं (2 इतिहास 6:40)। - सिंडी हैस कैस्पर


नम्र हृदय की गहराइयों से ही सर्वोच्च प्रार्थना निकलती है।

सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है। - नीतिवचन 4: 23

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 6:7-9, 12-15
2 Chronicles 6:7 मेरे पिता दाऊद की यह मनसा थी कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनवाए।
2 Chronicles 6:8 परन्तु यहोवा ने मेरे पिता दाऊद से कहा, तेरी जो मनसा है कि यहोवा के नाम का एक भवन बनाए, ऐसी मनसा कर के तू ने भला तो किया;
2 Chronicles 6:9 तौभी तू उस भवन को बनाने न पाएगा: तेरा जो निज पुत्र होगा, वही मेरे नाम का भवन बनाएगा।
2 Chronicles 6:12 तब वह इस्राएल की सारी सभा के देखते यहोवा की वेदी के साम्हने खड़ा हुआ और अपने हाथ फैलाए।
2 Chronicles 6:13 सुलैमान ने पांच हाथ लम्बी, पांच हाथ चौड़ी और तीन हाथ ऊंची पीतल की एक चौकी बनाकर आंगन के बीच रखवाई थी; उसी पर खड़े हो कर उसने सारे इस्राएल की सभा के सामने घुटने टेक कर स्वर्ग की ओर हाथ फैलाए हुए कहा,
2 Chronicles 6:14 हे यहोवा, हे इस्राएल के परमेश्वर, तेरे समान न तो स्वर्ग में और न पृथ्वी पर कोई ईश्वर है: तेरे जो दास अपने सारे मन से अपने को तेरे सम्मुख जान कर चलते हैं, उनके लिये तू अपनी वाचा पूरी करता और करुणा करता रहता है।
2 Chronicles 6:15 तू ने जो वचन मेरे पिता दाऊद को दिया था, उसका तू ने पालन किया है; जैसा तू ने अपने मुंह से कहा था, वैसा ही अपने हाथ से उसको हमारी आंखों के साम्हने पूरा भी किया है।

एक साल में बाइबल:  
  • एज्रा 1-2
  • यूहन्ना 19:23-42



सोमवार, 10 जून 2019

खोज



      छोटे बच्चों की एक लोकप्रिय पुस्तक श्रंखला है “Where’s Waldo” (वाल्डो कहाँ है?)। वाल्डो एक कार्टून पात्र है और पुस्तक के प्रत्येक पृष्ठ पर बने चित्रों में वह लोगों के मध्य कहीं छिपा होता है, तथा बच्चों को उसे ढूँढना होता है। सँसार के सभी स्थानों पर, वाल्डो को खोज लेने से उनके बच्चों के चेहरे पर आने वाली मुस्कराहट से माता-पि़ता भी हर्षित होते हैं। या, जब बच्चे वाल्डो को खोजने के लिए उनकी सहायता मांगते हैं, तो बच्चों के साथ बिताए गए समय से उन्हें प्रसन्नता होती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रारंभिक कलीसिया के एक अगुवे, स्तिफ्नुस को मसीह यीशु के नाम का प्रचार करने के लिए पत्थरवाह करके मार डाला गया (प्रेरितों 7), और इसके साथ ही यरूशलेम में मसीही विश्वासियों के विरुद्ध भारी सताव आरंभ हो गया। इस सताव से बचने के लिए बहुत से मसीही विश्वासी यरूशलेम छोड़कर इधर-उधर तित्तर-बित्तर हो गए। एक अन्य मसीही अगुवा, फिलिप्पुस, उन इधर-उधर तित्तर-बित्तर हुए मसीही विशावासियों में से कुछ के पीछे सामरिया में सेवकाई के लिए गया, उसने वहाँ मसीह यीशु का प्रचार किया, और उसे बहुत अच्छे से स्वीकार किया गया। जब वह वहाँ यह कर रहा था तो परमेश्वर के पवित्र आत्मा ने उसे एक विशेष अभियान पर उसे एक “जंगल के मार्ग” पर भेजा। यह देखते हुए कि उसके प्रचार से कैसा भला प्रतिफल आ रहा था, यह एक विचित्र बात लगती है। परन्तु फिलिप्पुस के आनन्द का अंदाजा कीजिए जब उस जंगल के मार्ग पर उसकी भेंट कुश देश के खजांची के साथ हुई, जो यशायाह नबी की पुस्तक में से प्रभु यीशु मसीह के विषय जानना चाह रहा था, और फिलिप्पुस ने इस खोज में उसकी सहायता की, तथा फिर उस खज़ान्ची ने प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण करके बपतिस्मा भी ले लिया (पद 26-40)।

      बहुधा हमें भी अवसर दिया जाता है कि हम बाइबल में प्रभु यीशु मसीह के विषय खोजने में औरों की सहायता करें, जिससे वे प्रभु को और अधिक निकटता से जान सकें। जैसे माता-पिता के लिए वाल्डो को खोजने और फिलिप्पुस के लिए उस खजांची की सहायता करने से मिले आनन्द की अनुभूति थी, वैसे ही आनन्द का अनुभव हमें भी होता है जब हम उन लोगों के चेहरों पर उस मुस्कराहट, उस संतुष्टि को देखते हैं, जिनकी हम सहायता कर रहे हैं।

      अपने जीवन के दिन बिताते हुए, हम मसीही विश्वासियों को तत्पर और तैयार रहना चाहिए कि हम पवित्र आत्मा की अगुवाई में मसीह यीशु के विषय बाँटने में लोगों के सहायक बनें, उनकी खोज में उनके मार्गदर्शक हों। वे लोग चाहे हमारे परिचित हों, या जीवन में एक बार मिलने वाले हों, प्रभु से मिलने का आनन्द अविस्मरणीय होता है। - रैंडी किल्गोर


एक मसीही विश्वासी जो सबसे महान काम कर सकता है वह है, 
अपने मित्र की प्रभु यीशु मसीह को खोजने में सहायता करे।

यीशु ने उन्हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्वास करो। - यूहन्ना 6:29

बाइबल पाठ: प्रेरितों 8:26-40
Acts 8:26 फिर प्रभु के एक स्वर्गदूत ने फिलेप्पुस से कहा; उठ कर दक्‍खिन की ओर उस मार्ग पर जा, जो यरूशलेम से अज्ज़ाह को जाता है, और जंगल में है।
Acts 8:27 वह उठ कर चल दिया, और देखो, कूश देश का एक मनुष्य आ रहा था जो खोजा और कूशियों की रानी कन्‍दाके का मन्‍त्री और खजांची था, और भजन करने को यरूशलेम आया था।
Acts 8:28 और वह अपने रथ पर बैठा हुआ था, और यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्‍तक पढ़ता हुआ लौटा जा रहा था।
Acts 8:29 तब आत्मा ने फिलेप्पुस से कहा, निकट जा कर इस रथ के साथ हो ले।
Acts 8:30 फिलेप्पुस ने उस ओर दौड़ कर उसे यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्‍तक पढ़ते हुए सुना, और पूछा, कि तू जो पढ़ रहा है क्या उसे समझता भी है?
Acts 8:31 उसने कहा, जब तक कोई मुझे न समझाए तो मैं क्योंकर समझूं और उसने फिलेप्पुस से बिनती की, कि चढ़कर मेरे पास बैठ।
Acts 8:32 पवित्र शास्त्र का जो अध्याय वह पढ़ रहा था, वह यह था; कि वह भेड़ की नाईं वध होने को पहुंचाया गया, और जैसा मेम्ना अपने ऊन कतरने वालों के साम्हने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।
Acts 8:33 उस की दीनता में उसका न्याय होने नहीं पाया, और उसके समय के लोगों का वर्णन कौन करेगा, क्योंकि पृथ्वी से उसका प्राण उठाया जाता है।
Acts 8:34 इस पर खोजे ने फिलेप्पुस से पूछा; मैं तुझ से बिनती करता हूं, यह बता कि भविष्यद्वक्ता यह किस विषय में कहता है, अपने या किसी दूसरे के विषय में।
Acts 8:35 तब फिलेप्पुस ने अपना मुंह खोला, और इसी शास्त्र से आरम्भ कर के उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया।
Acts 8:36 मार्ग में चलते चलते वे किसी जल की जगह पहुंचे, तब खोजे ने कहा, देख यहां जल है, अब मुझे बपतिस्मा लेने में क्या रोक है।
Acts 8:37 फिलेप्पुस ने कहा, यदि तू सारे मन से विश्वास करता है तो हो सकता है: उसने उत्तर दिया मैं विश्वास करता हूं कि यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है।
Acts 8:38 तब उसने रथ खड़ा करने की आज्ञा दी, और फिलेप्पुस और खोजा दोनों जल में उतर पड़े, और उसने उसे बपतिस्मा दिया।
Acts 8:39 जब वे जल में से निकलकर ऊपर आए, तो प्रभु का आत्मा फिलेप्पुस को उठा ले गया, सो खोजे ने उसे फिर न देखा, और वह आनन्द करता हुआ अपने मार्ग चला गया।
Acts 8:40 और फिलेप्पुस अशदोद में आ निकला, और जब तक कैसरिया में न पहुंचा, तब तक नगर नगर सुसमाचार सुनाता गया।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 34-36
  • यूहन्ना 19:1-22



रविवार, 9 जून 2019

आराधना



      गीत गाने से मस्तिष्क में परिवर्तन आते हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि जब हम गाते हैं तो हमारी शरीर में चिन्ता और तनाव को कम करने वाले हार्मोन्स अधिक निकलते हैं। अन्य शोध में देखा गया है कि जब लोग सामूहिक गान में सम्मिलित होते हैं तो उनकी हृदय की धडकनें भी एक दूसरे के साथ लय में हो जाती हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों की मंडलियों के लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे भजनों, आत्मिक गीतों और स्तुतिगान में साथ सम्मिलित हों, और परमेश्वर के धन्यवादी बने रहें (इफिसियों 5:19-20)। और बाइबल में “स्तुति करें” 50 से भी अधिक बार दोहराया गया है।

      बाइबल के पुराने नियम खण्ड के 2 इतिहास 20 में हम परमेश्वर के लोगों द्वारा युद्ध भूमि में जाते हुए परमेश्वर की आराधना, उसका स्तुतिगान करते हुए आगे बढ़ने के द्वारा परमेश्वर पर अपना भरोसा व्यक्त करने की घटना के विषय पढ़ते हैं। यहूदा के लोगों की ओर तीन शत्रु जातियां मिलकर आक्रमण करने के लिए आईं। यहूदा के राजा यहोशापात ने घबराकर सभी लोगों को एकत्रित किया, और परमेश्वर से गहन प्रार्थना करने में उनकी अगुवाई के। उन्होंने उपवास रखा, खाना-पीना छोड़कर बस प्रार्थना करने में समय बिताया, “हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं” (पद 12)। परमेश्वर से आश्वासन और निर्देश पाकर वे अगले दिन युद्धभूमि की ओर निकल पड़े। लेकिन यहूदा की सेना की अगुवाई उनके सर्वोत्तम योद्धा नहीं वरन परमेश्वर की आराधना और स्तुति गाने वाले लोग कर रहे थे, और वे परमेश्वर का स्तुतिगान करते हुए शत्रुओं की ओर बढ़ चले। उन्हें परमेश्वर के वायदे पर भरोसा था, कि उन्हें यह युद्ध लड़ना नहीं पड़ेगा (पद 17)।

      जब वे स्तुतिगान और आराधना करते हुए यूद्ध भूमि की ओर बढ़ रहे थे, उनके विरोध में आने वाले शत्रु आपस में ही लड़ने लग गए और उन्होंने एक दूसरे को मार डाला। यहूदा के लोगों के वहाँ पहुंचने तक युद्ध समाप्त हो चुका था; यहूदा के लोगों को युद्ध भूमि में जाकर उन शत्रुओं के साथ आई ढेर सारी लूट को एकत्रित करने का कार्य शेष रह गया था। परमेश्वर ने अपने आराधना और स्तुति करने वाले, उसपर भरोसा रखने वाले लोगों न केवल बचा लिया था, वरन उन्हें बहुत पुरुस्कृत भी किया था।

      परमेश्वर चाहता है कि हम उसकी आराधना और स्तुति करें, और इसमें वह हमारी भलाई चाहता है। चाहे हम किसी युद्ध भूमि की ओर कूच कर रहे हों अथवा नहीं, परन्तु परमेश्वर की आराधना करने में हमारे विचारों, मनों, और जीवन को परिवर्तित करने की सामर्थ्य है। - एमी पीटरसन


जो मन परमेश्वर के साथ लयबद्ध है, वह उसकी आराधना और स्तुति करेगा।

और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो। और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो। - इफिसियों 5:19-20

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 20:14-22
2 Chronicles 20:14 तब आसाप के वंश में से यहजीएल नाम एक लेवीय जो जकर्याह का पुत्र और बनायाह का पोता और मत्तन्याह के पुत्र यीएल का परपोता था, उस में मण्डली के बीच यहोवा का आत्मा समाया।
2 Chronicles 20:15 और वह कहने लगा, हे सब यहूदियो, हे यरूशलेम के रहनेवालो, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यों कहता है, तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है।
2 Chronicles 20:16 कल उनका साम्हना करने को जाना। देखो वे सीस की चढ़ाई पर चढ़े आते हैं और यरूएल नाम जंगल के साम्हने नाले के सिरे पर तुम्हें मिलेंगे।
2 Chronicles 20:17 इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा।
2 Chronicles 20:18 तब यहोशापात भूमि की ओर मुंह कर के झुका और सब यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों ने यहोवा के साम्हने गिर के यहोवा को दण्डवत किया।
2 Chronicles 20:19 और कहातियों और कोरहियों में से कुछ लेवीय खड़े हो कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति अत्यन्त ऊंचे स्वर से करने लगे।
2 Chronicles 20:20 बिहान को वे सबेरे उठ कर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े हो कर कहा, हे यहूदियो, हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे।
2 Chronicles 20:21 तब उसने प्रजा के साथ सम्मति कर के कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान हो कर हथियारबन्दों के आगे आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएं, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, कि यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है।
2 Chronicles 20:22 जिस समय वे गाकर स्तुति करने लगे, उसी समय यहोवा ने अम्मोनियों, मोआबियों और सेईर के पहाड़ी देश के लोगों पर जो यहूदा के विरुद्ध आ रहे थे, घातकों को बैठा दिया और वे मारे गए।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 32-33
  • यूहन्ना 18:19-40



शनिवार, 8 जून 2019

क्षमा



      मैं जब अपने हाथों को देखती हूँ तो मुझे स्मरण हो आता है कि मैंने अपनी सगाई और विवाह, दोनों की अंगूठियाँ खो दीं हैं। मैं एक यात्रा की तैयारी करते हुए कई कार्य एक साथ करने का प्रयास कर रही थी और उसी में वे अंगूठियाँ कहीं रखी गईं, और मुझे अब तक समझ नहीं आता है कि वे गई कहाँ। मैं अपने इस लापरवाही के बार में अपने पति को बताने से बहुत घबरा रही थी, यह सोच कर कि उनपर इसका क्या प्रभाव होगा और वे क्या प्रतिक्रिया देंगे। परन्तु उनकी प्रतिक्रया मेरे प्रति प्रेम और सहानुभूति की थी न कि उन अंगूठियों को लेकर परेशान होने की। लेकिन अभी भी मुझे लगता है कि मुझे उनके इस अनुग्रह के लिए कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे मैं उसकी कीमत चुका सकूँ। परन्तु वे इस घटना को मेरे विरुद्ध याद ही नहीं रखते हैं, उसके प्रतिफल में कुछ चाहते ही नहीं हैं।

      ऐसे ही कितनी ही बार हमें अपने पाप स्मरण आते हैं और हमें लगता है कि हमें परमेश्वर से उन पापों की क्षमा पाने के प्रत्युत्तर में कुछ करना चाहिए। परन्तु परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में कहा है कि उसकी यह क्षमा और प्रेम, उसका प्रदान किया गया उद्धार, हमारे किन्ही कर्मों द्वारा नहीं परन्तु उसके अनुग्रह से है (इफिसियों 2:8-9)। परमेश्वर ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा इस नई वाचा के विषय भविष्यवाणी की थी: “और तब उन्हें फिर एक दूसरे से यह न कहना पड़ेगा कि यहोवा को जानो, क्योंकि, यहोवा की यह वाणी है कि छोटे से ले कर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे; क्योंकि मैं उनका अधर्म क्षमा करूंगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूंगा” (यिर्मयाह 31:34)। हमारा ऐसा परमेश्वर है जो क्षमा करता है और हमारे पापों को फिर कभी स्मरण नहीं करता है।

      हम अपने अतीत के विषय दुखी हो सकते हैं, परन्तु हमें परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना है और उसकी बात का विश्वास करना है कि हमारे द्वारा प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास में होकर हमारे प्रति उसका अनुग्रह और क्षमा वास्तविक हैं, हमारे जीवनों में सदा सक्रीय हैं। इस सुसमाचार के द्वारा हमें परमेश्वर का धन्यवादी और कृतज्ञ होना चाहिए, तथा औरों को बताने वाला होना चाहिए कि हमारे प्रभु परमेश्वर से मिलने वाली क्षमा सँसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है। - कीला ओकोआ


परमेश्वर का अनुग्रह और क्षमा सभी के लिए सेंत-मेंत उपहारस्वरूप उपलब्ध हैं।

क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। - इफिसियों 2:8-9

बाइबल पाठ: इब्रानियों 8:6-13
Hebrews 8:6 पर उसको उन की सेवकाई से बढ़कर मिली, क्योंकि वह और भी उत्तम वाचा का मध्यस्थ ठहरा, जो और उत्तम प्रतिज्ञाओं के सहारे बान्‍धी गई है।
Hebrews 8:7 क्योंकि यदि वह पहिली वाचा निर्दोष होती, तो दूसरी के लिये अवसर न ढूंढ़ा जाता।
Hebrews 8:8 पर वह उन पर दोष लगाकर कहता है, कि प्रभु कहता है, देखो वे दिन आते हैं, कि मैं इस्त्राएल के घराने के साथ, और यहूदा के घराने के साथ, नई वाचा बान्‍धूंगा।
Hebrews 8:9 यह उस वाचा के समान न होगी, जो मैं ने उन के बाप दादों के साथ उस समय बान्‍धी थी, जब मैं उन का हाथ पकड़ कर उन्हें मिसर देश से निकाल लाया, क्योंकि वे मेरी वाचा पर स्थिर न रहे, और मैं ने उन की सुधि न ली; प्रभु यही कहता है।
Hebrews 8:10 फिर प्रभु कहता है, कि जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्त्राएल के घराने के साथ बान्‍धूंगा, वह यह है, कि मैं अपनी व्यवस्था को उन के मनों में डालूंगा, और उसे उन के हृदय पर लिखूंगा, और मैं उन का परमेश्वर ठहरूंगा, और वे मेरे लोग ठहरेंगे।
Hebrews 8:11 और हर एक अपने देश वाले को और अपने भाई को यह शिक्षा न देगा, कि तू प्रभु को पहिचान क्योंकि छोटे से बड़े तक सब मुझे जान लेंगे।
Hebrews 8:12 क्योंकि मैं उन के अधर्म के विषय मे दयावन्‍त हूंगा, और उन के पापों को फिर स्मरण न करूंगा।
Hebrews 8:13 नई वाचा के स्थापन से उसने प्रथम वाचा को पुरानी ठहराई, और जो वस्तु पुरानी और जीर्ण जो जाती है उसका मिट जाना अनिवार्य है।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 30-31
  • यूहन्ना 18:1-18



शुक्रवार, 7 जून 2019

सुनना



      एक प्रातः मेरी बेटी ने अपना सेल-फोन, कुछ पल के लिए अपनी ग्यारह माह के बेटे को दिया कि उसका मनोरंजन हो सके, और उसके यह करने के एक मिनिट से भी कम समय में मेरे फोन की घन्टी बजी; मैंने जब अपना फोन उठाया तो दूसरी ओर से मेरे नाती की आवाज़ आई। किसी तरह से उसने फोन की ‘स्पीड-डायल’ सुविधा के माध्यम से मेरा नंबर दबा दिया था, और फिर उसके और मेरे बीच एक “वार्तालाप” चला जिसे मैं बहुत समय तक स्मरण रखूँगा। मेरे नाती को कुछ ही शब्द बोलने आते हैं, परन्तु वह मेरी आवाज़ पहचानता है और प्रतिक्रया देता है। इसलिए मैं उससे बात करता रहा और उसे बताया कि मैं उससे कितना प्रेम करता हूँ।

      अपने नाती की आवाज़ सुनकर जो आनन्द मुझे मिला, वह मुझे स्मरण करवाता है कि हमारा परमेश्वर पिता हमारे साथ संबंध बनाने और बनाए रखने के लिए कितना लालियत रहता है। परमेश्वर का वचन बाइबल दिखाती है कि आरंभ से ही परमेश्वर सक्रीय होकर मनुष्य के साथ संबंध बनाने में पहल करता आया है। जब आदम और हव्वा ने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता का पाप किया, और परमेश्वर से छिप गए, तो परमेश्वर ही उनको पुकारता हुआ आया, “तू कहाँ है?” (उत्पत्ति 3:9)।

      प्रभु यीशु मसीह में होकर भी परमेश्वर मानवजाति को खोज रहा है कि उससे एक प्रगाढ़ संबंध बना ले। क्योंकि परमेश्वर हम से प्रेम करता है, हमारे साथ संगति रखना चाहता है, इसलिए उसने प्रभु यीशु मसीह को सभी मनुष्यों के पापों के लिए क्रूस पर बलिदान होने के लिए भेजा। “जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा” (1 यूहन्ना 4:9-10)।

      यह जानना कितना भला है कि परमेश्वर हम से प्रेम करता है और उसने अपने प्रेम को प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रकट किया है, और अब वह हमारे प्रत्युत्तर की प्रतीक्षा कर रहा है। चाहे हमें समझ न भी आता हो कि उसके प्रेम के प्रत्युत्तर में हम उससे क्या कहें, फिर भी हमारा परमेश्वर पिता हमारी वाणी को सुनना चाहता है। - जेम्स बैंक्स


हमारे प्रति परमेश्वर का प्रेम प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रगट होता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-10
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना?
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं।
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे,
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया।
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।
Genesis 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।
Genesis 3:9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है?
Genesis 3:10 उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 17



गुरुवार, 6 जून 2019

परिवर्तन



      लंबे समय तक हारवर्ड विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रहे डॉ. चार्ल्स डब्ल्यू इलियट का मानना था कि साधारण लोग यदि सँसार के साहित्य से प्रतिदिन कुछ मिनिट तक भी कुछ पढ़ लेंगे तो वे मूल्यवान ज्ञान प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने 1910  में इतिहास, विज्ञान, दर्शन-शास्त्र, और कला के क्षेत्रों की साहित्यिक पुस्तकों से भाग चुनकर संकलित किए जिन्हें ‘द हारवर्ड क्लासिक्स’ नामक 50 पुस्तकों के संग्रह में प्रकाशित किया गया। प्रत्येक पुस्तक के साथ डॉ. इलियट द्वारा लिखित, पढ़ने की मार्गदर्शिका “Fifteen Minutes a Day” (प्रतिदिन पन्द्रह मिनिट) भी दी गई है, जिसमें वर्ष के प्रतिदिन के लिए पढ़ने के लिए 8-10 पृष्ठ सुझाए गए हैं।

      कैसा रहे यदि हम प्रतिदिन परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने के लिए पन्द्रह मिनिट लगाएँ? हम भजनकार के साथ कह सकते हैं, “मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला” (भजन 119:36-37)।

      पन्द्रह मिनिट प्रतिदिन का योग वर्ष के इक्यानवे घंटे बनता है। किन्तु हम जितना भी समय निर्धारित करें, उसे दृढ़ता से निभाना ही सफलता की कुंजी है। मुख्य आवश्यकता सिद्ध होने की नहीं, वरन डटे रहकर करते रहने की है। यदि हम से कभी कोई दिन या सप्ताह छुट भी जाए तो भी अध्ययन को पुनः आरंभ करने से न चूकें। जब पवित्र आत्मा हमें सिखाएगा, तो परमेश्वर का वचन हमारे मास्तिष्क से हमारे हृदय में आ जाएगा, और फिर हमारे हाथों और पैरों को  संचालित करके, हमें ज्ञानवर्धन से जीवन परिवर्तन में ले जाएगा। - डेविड मैक्कैस्लैंड


बाइबल ही एकमात्र पुस्तक है जिसे जब विश्वास के साथ पढ़ा जाता है तो, 
उसे सिखाने-समझाने के लिए उसका लेखक स्वयँ उपस्थित रहता है।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105

बाइबल पाठ: भजन 119:33-40
Psalms 119:33 हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा।
Psalms 119:34 मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा।
Psalms 119:35 अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं।
Psalms 119:36 मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे।
Psalms 119:37 मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
Psalms 119:38 तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर।
Psalms 119:39 जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर; क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं।
Psalms 119:40 देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं; अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 16



बुधवार, 5 जून 2019

जीवन



      एक वृद्ध आदमी ने अपनी पोती से कुछ कहा, जिसने फिर वह बात मुझे बताई। उस वृद्ध ने कहा “मैंने घोड़ागाड़ी से लेकर मनष्य को चाँद पर चलते हुए तक देखा है; परन्तु कभी नहीं सोचा था कि यह इतने कम समय में हो जाएगा।” जीवन छोटा है।

      हम में से कई प्रभु यीशु की ओर मुड़ते हैं क्योंकि  हम अनन्त जीवन चाहते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है, परन्तु क्या हम समझते भी हैं कि अनन्त जीवन क्या है? हमारी प्रवृत्ति है कि हम गलत वस्तुओं की लालसा करते हैं। हम कुछ बेहतर चाहते हैं, और हमें लगता है कि वह जो हम चाहते हैं बस थोड़ा सा आगे ही है। हम सोचते हैं, बस यदि मैं स्कूल पूरा करके बाहर निकल जाऊँ; बस यदि मेरे पास वह वाली नौकरी हो; बस यदि मेरा विवाह हो जाए; बस यदि मैं सेवा-निवृत्त हो जाऊँ; बस यदि...। और फिर एक दिन हमें अपने वृद्धों की कही बात की गूंज सुनाई देती है, और हम सोचने लगते हैं कि समय कब और कैसे निकल गया?

      वास्तविकता यही है कि प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास अनन्त जीवन अभी और यहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, “क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया” (रोमियों 8:2)। उसने आगे लिखा, “क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं” (पद 5)। दूसरे शब्दों में, हम मसीह यीशु के पास आ जाते हैं तो हमारी लालसाएं भी बदल जाती हैं ; और इससे हम वह प्राप्त करने पाते हैं जिसकी हमें सबसे अधिक इच्छा रहती है “शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है”(पद 6)।

      जीवन के सबसे बड़े झूठ में से एक यह है कि वास्तव में जीने के लिए हमें कहीं और होना होगा, कुछ और करना होगा, किसी और के साथ होना होगा। जब हम प्रभु यीशु मसीह में अपना जीवन प्राप्त करते हैं, तो हम जीवन के छोटा होने के अफसोस को उसके साथ के जीवन की भरपूरी के साथ अदला-बदली कर लेते हैं, अभी के लिए भी और अनन्त जीवन के लिए भी। - टिम गुस्ताफसन


अनन्त जीवन के लिए हमें, हम में प्रभु यीशु मसीह को जीने देना होगा।

और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने। - यूहन्ना 17:3

बाइबल पाठ: रोमियों 8:1-11
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं।
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया।
Romans 8:3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल हो कर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेज कर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी।
Romans 8:4 इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए।
Romans 8:5 क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं।
Romans 8:6 शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है।
Romans 8:7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है।
Romans 8:8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।
Romans 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं।
Romans 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है।
Romans 8:11 और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15