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गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

सन्देश


   रे टौमलिन्सन सन 1971 में लोगों और कंप्यूटर्स के बीच पारस्परिक क्रिया-प्रतिक्रीया पर कार्य कर रहे थे। जब उन्होंने अपने कंप्यूटर से अपने दफतर में स्थापित कंप्यूटर नेटवर्क से होकर एक अन्य कंप्यूटर को एक सन्देश भेजा तो वह विश्व का सबसे पहला ई-मेल था। आज, इस घटना के कई दशकों पश्चात, प्रतिदिन एक अरब से भी अधिक ई-मेल इधर से उधर भेजे जाते हैं। बहुत से ई-मेलों में महत्वपूर्ण सूचनाएं एवं जानकारियाँ होती हैं जो परिवारजनों, मित्रों या अन्य लोगों-जानकारों तक पहुँचानी होती हैं, लेकिन बहुत से ई-मेल अनचाहे विज्ञापनों के वाहक होते हैं और अनेक में तो विनाशकारी वायरस भी होते हैं जो ई-मेल खोलने पर उस कंप्यूटर में गड़बड़ी और खराबी ला सकते हैं, उसका अनुचित प्रयोग कर सकते हैं। इसलिए आज ई-मेल के प्रयोग से संबंधित एक नियम सा बन गया है, "यदि आप भेजेने वाले को नहीं जानते हैं या उस पर विश्वास नहीं रखते हैं तो ई-मेल को मत खोलिए।"

   परमेश्वर ने भी हमें अपने पुत्र प्रभु यीशु के रूप में एक सन्देश भेजा है, और क्योंकि परमेश्वर विश्वासयोग्य है, वह सदा ही हमारा भला ही चाहता है, इसलिए उसके सन्देश पर निसंकोच विश्वास किया जा सकता है, उसे पढ़ा जा सका सकता है। पुराने नियम के काल में परमेश्वर लोगों से अपने भविष्यद्वक्ताओं में होकर बोलता था, लेकिन बहुतेरों ने परमेश्वर के उस वचन का इन्कार किया; लेकिन उस सब कुछ का लक्ष्य था वर्तमान का सन्देश: "पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है" (इब्रानियों 1:1-2)।

   संभव है कि हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के एक शिशु के रूप में इस संसार में आने के भेद से विस्मित हों, उसे समझ ना पाएं और अपने जीवनों को पूरी तरह से उसे समर्पित करने, उसे ग्रहण करने में हिचकिचाएं; लेकिन प्रभु यीशु का जन्म, जीवन, मृत्यु और मृतकों में से पुनरुत्थान ऐतिहासिक अकाट्य सत्य हैं।

   प्रभु यीशु का जन्म परमेश्वर द्वारा भेजा गया उसके प्रेम, आशा और हमारे लिए पापों के दोष से छुटकारे का अविस्मरणीय सन्देश है। क्या आप उस भेजने वाले पर विश्वास कर के उसके सन्देश को पढ़ेंगे, उसे अपने जीवन में स्थान देंगे? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर द्वारा भेजा गया अनन्त आशीष और आशा का सन्देश आपके द्वारा पढ़े और ग्रहण किए जाने की प्रतीक्षा में है।


और हम तुम्हें उस प्रतिज्ञा के विषय में, जो बाप दादों से की गई थी, यह सुसमाचार सुनाते हैं। - प्रेरितों 13:32

बाइबल पाठ: इब्रानियों 1:1-9
Hebrews 1:1 पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। 
Hebrews 1:2 इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है। 
Hebrews 1:3 वह उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिमन के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 1:4 और स्‍वर्गदूतों से उतना ही उत्तम ठहरा, जितना उसने उन से बड़े पद का वारिस हो कर उत्तम नाम पाया। 
Hebrews 1:5 क्योंकि स्‍वर्गदूतों में से उसने कब किसी से कहा, कि तू मेरा पुत्र है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ? और फिर यह, कि मैं उसका पिता हूंगा, और वह मेरा पुत्र होगा? 
Hebrews 1:6 और जब पहिलौठे को जगत में फिर लाता है, तो कहता है, कि परमेश्वर के सब स्वर्गदूत उसे दण्‍डवत करें। 
Hebrews 1:7 और स्‍वर्गदूतों के विषय में यह कहता है, कि वह अपने दूतों को पवन, और अपने सेवकों को धधकती आग बनाता है। 
Hebrews 1:8 परन्तु पुत्र से कहता है, कि हे परमेश्वर तेरा सिंहासन युगानुयुग रहेगा: तेरे राज्य का राजदण्‍ड न्याय का राजदण्‍ड है। 
Hebrews 1:9 तू ने धर्म से प्रेम और अधर्म से बैर रखा; इस कारण परमेश्वर तेरे परमेश्वर ने तेरे साथियों से बढ़कर हर्ष रूपी तेल से तुझे अभिषेक किया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 यूहन्ना; 
  • 3 यूहन्ना; 
  • यहूदा


बुधवार, 24 दिसंबर 2014

अनुग्रह का पल


   प्रति वर्ष मैं कैमब्रिज, लण्डन में किंग्स कओलेज चैपल में होने वाली क्रिस्मस संध्या की उपासना का बी.बी.सी. द्वारा रेडियो पर प्रसारित होने वाला ’आँखों देखा हाल’ सुनना पसन्द करता हूँ। इस उपासना सभा में प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित नौ पाठ, क्रिसमस संगीत, परमेश्वर के वचन बाइबल के भागों का पढ़ा जाना, प्रार्थनाएं और सामूहिक गान सम्मिलित होते हैं। एक वर्ष मैं प्रसारणकर्ता द्वारा प्रयुक्त शब्दों से कुछ चकित हुआ; जब उपासना सभा के अन्त पर उस भव्य चर्च भवन से उपासना मण्डली के लोग बाहर निकल रहे थे, तब उस प्रसारणकर्ता ने कहा कि "अब लोग उस अनुग्रह के पल से वापस वास्तविक संसार में प्रवेश कर रहे हैं।"

   लेकिन क्या पहले क्रिसमस के दिन भी ऐसा ही नहीं हुआ था? चरवाहों ने स्वर्गदूतों द्वारा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के जन्म की घोषणा को सुना, फिर स्वर्गदूतों का एक दल परमेश्वर की स्तुति करता हुआ प्रगट हुआ। यह सब देख-सुन कर वे चरवाहे बैतलेहम गए और उन्होंने यूसुफ, मरियम और शिशु यीशु को देखा, और फिर वे सब वापस अपने कार्य को लौट गए; लेकिन उनके लौटने में एक बात अलग थी - वे चरवाहे इस बालक के बारे में लोगों को बताने से अपने आप को रोक नहीं सके। उस अनुग्रह के पल ने उन चरवाहों को बदल दिया था, और जब वे वापस अपने वास्तविक जीवन में लौट कर आए तो उस अनुग्रह को अपने मन-जीवन में साथ ले आए और प्रभु यीशु के जन्म के सुसमाचार को लोगों के साथ बाँटते गए।

   हम मसीही विश्वासियों ने भी अपने जीवन में वह अनुग्रह का पल अनुभव किया जब हमने अपने पापों से पश्चाताप कर के अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित किया तथा उसकी शिष्यता का निर्णय लिया। उस अनुग्रह के पल के अनुभव के बाद हम भी अपने अपने वास्तविक जीवन में लौट आए हैं किंतु उन चरवाहों के समान ही उस पल के अनुभव तथा आनन्द को लोगों के साथ बाँटने की ज़िम्मेदारी हमारी भी है। प्रति वर्ष यह दिन हमारे लिए केवल एक उत्सव मनाने का दिन ना हो वरन उससे भी बढ़कर अपने प्रभु यीशु में मिलने वाले उद्धार तथा पापों की क्षमा को लोगों के साथ बाँटने का समय हो। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्रिसमस के आनन्द को अपने जीवन में सदा बनाए रखें, उसे सदा लोगों के साथ बाँटते रहें।

इस से सब पर भय छा गया; और वे परमेश्वर की बड़ाई कर के कहने लगे कि हमारे बीच में एक बड़ा भविष्यद्वक्ता उठा है, और परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपा दृष्टि की है। - लूका 7:16

बाइबल पाठ: लूका 2:8-20
Luke 2:8 और उस देश में कितने गड़ेरिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्ड का पहरा देते थे। 
Luke 2:9 और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। 
Luke 2:10 तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। 
Luke 2:11 कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है। 
Luke 2:12 और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे। 
Luke 2:13 तब एकाएक उस स्वर्गदूत के साथ स्‍वर्गदूतों का दल परमेश्वर की स्‍तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया। 
Luke 2:14 कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्‍ति हो। 
Luke 2:15 जब स्वर्गदूत उन के पास से स्वर्ग को चले गए, तो गड़ेरियों ने आपस में कहा, आओ, हम बैतलहम जा कर यह बात जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है, देखें। 
Luke 2:16 और उन्होंने तुरन्त जा कर मरियम और यूसुफ को और चरनी में उस बालक को पड़ा देखा। 
Luke 2:17 इन्हें देखकर उन्होंने वह बात जो इस बालक के विषय में उन से कही गई थी, प्रगट की। 
Luke 2:18 और सब सुनने वालों ने उन बातों से जो गड़िरयों ने उन से कहीं आश्चर्य किया। 
Luke 2:19 परन्तु मरियम ये सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही। 
Luke 2:20 और गड़ेरिये जैसा उन से कहा गया था, वैसा ही सब सुनकर और देखकर परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति करते हुए लौट गए।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 यूहन्ना 3-5


मंगलवार, 23 दिसंबर 2014

शान्ति


   अपनी पुस्तक क्रिसमस 1945 में लेखक मैथ्यु लिट्ट दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद, शान्तिकाल के पहले क्रिसमस उत्सव के बारे में बताते हैं। उस समय के एक प्रमुख अखबार, ’द न्यूयॉर्क डेली न्यू’ में खबर छपी कि लोग न्यू यॉर्क बन्दरगाह पर एक विशाल नौसैनिक बेड़े के आगमन के लिए तैयार रहें: "क्रिसमस के दिन एक शक्तिशाली नौसैनिक बेड़ा आएगा जिसमें 4 युद्धपोत, 6 वायुयान वाहक पोत, 7 जंगी जहाज़ और 24 विध्वंसक जहाज़ होंगे।" लेकिन यह विशाल और शक्तिशाली बेड़ा युद्ध के लिए नहीं वरन 1000 ज़रूरतमन्द बच्चों की मेज़बानी करने के लिए आ रहा था।

   उन बच्चों के कपड़ों के नाप पहले से ही लिए जा चुके थे और उनके लिए नौसेना के गहरे नीले रंग के कोट तथा गरम टोपियाँ बनवाकर तैयार करी गईं थी ताकि जैसे ही वे बच्चे उन जहाज़ों पर आएं उन्हें वे वस्त्र भेंट किए जाएं। उस दिन वे युद्धपोत अनुकंपा के वाहक बन गए थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह नबी की पुस्तक में प्रभु यीशु मसीह के सारे संसार पर आने वाले शान्तिमय राज्य के बारे में भविष्यवाणी है: "वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीट कर हल के फाल और अपने भालों को हंसिया बनाएंगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे" (यशायाह 2:4)। क्रिसमस का यह समय हमें स्मरण दिलाता है कि शान्ति का राजकुमार प्रभु यीशु मसीह अन्ततः सारे विश्व में शान्ति तथा अनुग्रह का समय लेकर आएगा।

   अभी जब हम शान्ति के राजकुमार के प्रथम आगमन के उत्सव को मनाते हैं और दूसरे आगमन की बाट जोहते हैं, तो साथ ही इस बात को भी ना भूलें कि प्रभु यीशु ने हम मसीही विश्वासियों को अपनी शान्ति के वाहक बनाकर इस पृथ्वी पर रखा है, और उसकी इस शान्ति को हमें संसार के सभी लोगों तक पहुँचाना है। - डेनिस फिशर


संसार में सच्ची शान्ति, शान्ति के राजकुमार द्वारा ही स्थापित हो सकती है।

उसकी प्रभुता सर्वदा बढ़ती रहेगी, और उसकी शान्ति का अन्त न होगा, इसलिये वे उसको दाऊद की राजगद्दी पर इस समय से ले कर सर्वदा के लिये न्याय और धर्म के द्वारा स्थिर किए ओर संभाले रहेगा। सेनाओं के यहोवा की धुन के द्वारा यह हो जाएगा। - यशायाह 9:7

बाइबल पाठ: यशायाह 2:1-4
Isaiah 2:1 आमोस के पुत्र यशायाह का वचन, जो उसने यहूदा और यरूशलेम के विषय में दर्शन में पाया।। 
Isaiah 2:2 अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाडिय़ों से अधिक ऊंचा किया जाएगा; और हर जाति के लागे धारा की नाईं उसकी ओर चलेंगें। 
Isaiah 2:3 और बहुत देशों के लोग आएंगे, और आपस में कहेंगे: आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्वर के भवन में जाएं; तब वह हम को अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे। क्योंकि यहोवा की व्यवस्था सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा। 
Isaiah 2:4 वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीट कर हल के फाल और अपने भालों को हंसिया बनाएंगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 यूहन्ना 1-2


सोमवार, 22 दिसंबर 2014

स्मरण


   परमेश्वर की अद्भुत, प्रेर्णाशील हस्तकला द्वारा विस्मित होने के लिए आपको रात्रि के आकाश को अधिक देर तक निहारना नहीं पड़ेगा। तारापुँजों के विशाल विस्तार और हमारे अपने तारापुँज आकाशगंगा का दूधिया विस्तार हमें स्मरण दिलाता है हमारे परमेश्वर प्रभु यीशु की महान सृजन शक्ति तथा इस सब को संभाल पाने की मानव-समझ से परे क्षमता को (कुलुस्सियों 1:16-17)। जब हम रात में आकाश को निहारते हैं तो प्रतीत होता है मानों परमेश्वर के रंगमंच के दृश्य को सबसे अग्रिम पंक्ति में बैठकर देख रहे हों।

   लेकिन प्रत्येक रात्रि के इस अद्भुत दृश्य की तुलना उस दृश्य की महिमा के सामने कुछ भी नहीं है जो उसने तब दिखाई जिस रात्रि परमेश्वर ने अपने पुत्र को पृथ्वी पर भेजा। वहाँ मैदान में चरवाहे अपनी भेड़ों की रखवाली कर रहे थे कि अचानक ही आकाश स्वर्गदूतों से रौशन हो गया और उन्होंने स्वर्गदूतों को कहते सुना, "कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्‍ति हो" (लूका 2:14)। किसी दूर देश से ज्ञानी पुरुष भी उस राजा को दण्डवत करने आए, और परमेश्वर ने उनके मार्गदर्शन के लिए पूर्व दिशा में एक बहुत चमकदार तारा बना कर दिया।

   यद्यपि प्रत्येक रात्रि को "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है" (भजन 19:1), लेकिन उस घटना से पहले या बाद में परमेश्वर की महिमा आकाश में वैसी कभी नहीं प्रगट हुई जैसी उस रात को हुई थी, जिस रात इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता ने यह सार्वजनिक घोषणा करी कि वह समस्त मानवजाति से इतना प्रेम करता है कि उसे पाप के दोष से छुड़ाने के लिए स्वयं पृथ्वी पर आने के लिए तैयार है।

   अगली बार जब आप रात्रि को आकाश की ओर देखें और परमेश्वर की हस्तकला से विस्मित हों तो स्मरण रखें कि वह जो यह सब बना कर संभाले रख सकता है, उसी ने आपको भी बनाया है, वही आपको भी संभाल रहा है और वह आपको उस पर लाए गए साधारण विश्वास और पश्चाताप के द्वारा अपनी संगति तथा सहभागिता में आशीषित देखना चाहता है। - जो स्टोवैल


हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम की असाधारण महिमा प्रभु यीशु के पृथ्वी पर आगमन के द्वारा प्रगट करी गई।

क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। - कुलुस्सियों 1:16- 17

बाइबल पाठ: भजन 19:1-6
Psalms 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। 
Psalms 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। 
Psalms 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। 
Psalms 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, 
Psalms 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। 
Psalms 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 पतरस 1-3


रविवार, 21 दिसंबर 2014

मधुर वचन


   स्कॉट सदा ही अपने सास-ससुर के बीच के संबंध को सराहता था। एक दिन उसने उन से पूछ ही लिया कि वह क्या बात है जो उनके विवाहित जीवन को सफल बनाए रखती है। उसके ससुर केन ने उत्तर दिया, "उसे मधुर बनाए रखना!"

   मेरी एक सहेली मुझे, मेरे पति और अन्य मित्रों को लिखे अपने छोटे-छोटे पत्रों का अन्त सदा ही इस वाक्य के साथ करती है: "एक दुसरे के प्रति भले बने रहने को कभी नहीं भूलना"। स्कॉट के ससुर, और मेरी सहेली, दोनों ही के द्वारा दी गई ये बहुत ही अच्छी सलाह है। दैनिक जीवन की व्यस्तता और परेशानियाँ अपने जीवनसाथी या अन्य लोगों के साथ व्यवहार में बड़ी सरलता से चिड़चिड़ापन ले आती हैं। हम छोटी -छोटी बातों या गलतियों को लेकर कुड़कुड़ाने लगते हैं, और बिना सोचे-समझे कठोर तथा हानिकारक शब्द कह बैठते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में दूसरों के प्रति प्रयोग किए जाने वाले शब्दों के बारे में अनेक स्थानों पर अच्छी सलाह दी गई है; जैसे कि, "जो अपने मुंह को वश में रखता है वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है" (नीतिवचन 21:23)। वहाँ कुछ चेतावनियाँ भी दी गई हैं: "जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा" (नीतिवचन 18:21); तथा, "ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच विचार का बोलना तलवार की नाईं चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं" (नीतिवचन 12:18)। स्कॉट के ससुर केन की मधुर रखने की सलाह मुझे नीतिवचन 16:24 स्मरण दिलाती है: "मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं"।
  
 हे परमेश्वर, हमारे मनों और मूँह को ऐसे मधुर वचनों से भरें जो दूसरों के लिए आशीषमय हों। - ऐनी सेटास


दयालु मन बगीचा हैं; दयालु विचार जड़ें; दयालु वचन फूल हैं; दयालु कार्य फल।

इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। - कुलुस्सियों 3:12

बाइबल पाठ: नीतिवचन 16:19-24
Proverbs 16:19 घमण्डियों के संग लूट बांट लेने से, दीन लोगों के संग नम्र भाव से रहना उत्तम है। 
Proverbs 16:20 जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है। 
Proverbs 16:21 जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है।
Proverbs 16:22 जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है। 
Proverbs 16:23 बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है। 
Proverbs 16:24 मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 पतरस 3-5


शनिवार, 20 दिसंबर 2014

उपहार


  क्रिसमस के समय को उपहार देने का समय भी कहा जाता है। हम मित्रों तथा परिवारजनों के लिए ऐसे उपहार लेने के प्रयास करते हैं जो उन्हें पसन्द आएं, लेकिन सभी उपहार एक समान नहीं होते। कुछ उपहार एक हल्के से संकेत के साथ दिए जाते हैं, जैसे कि व्यायाम करवाने वाली मशीन या वज़न घटाने के तरीकों की पुस्तक; कुछ उपहार ऐसे होते हैं जिन्हें देने वाला स्वयं अपने लिए चाहता है। लेकिन सबसे उत्तम उपहार उनसे आते हैं जो हम से प्रेम करते हैं और जानते हैं कि हमें वास्तव में किस चीज़ की आवश्यकता है।

   पिछले क्रिसमस पर हमारे पास्टर जिम सामरा ने हमें प्रेरित किया कि हम क्रिसमस को एक अलग नज़रिए से देखें। हम यह जानते हैं कि प्रभु यीशु हमारे लिए परमेश्वर की ओर से सिद्ध उपहार हैं (रोमियों 6:23), लेकिन पास्टर जिम ने एक अन्य विचार इसके साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु के स्वर्ग से पृथ्वी पर आने को प्रभु यीशु द्वारा परमेश्वर पिता को दिए जाने वाले उपहार के रूप में भी देखा जा सकता है। प्रभु यीशु परमेश्वर पिता से बहुत प्रेम रखते हैं और जानते हैं कि परमेश्वर पिता की हार्दिक इच्छा क्या है - यही कि उनकी सृष्टि पाप के दोष से मुक्त होकर पुनः उनके साथ संगति और सहभागिता में आ जाए। अपने पृथ्वी पर आने के द्वारा प्रभु यीशु ने यह संभव कर दिया कि हम परमेश्वर के सम्मुख पवित्र और निर्दोष होकर एक उपहार के रूप में प्रस्तुत किए जाएं (कुलुस्सियों 1:22)।

   अपने आप को परमेश्वर को भावता हुआ और परमेश्वर का प्रीय उपहार के रूप में देखने से हम में यह ज़िम्मेदारी की भावना भी आती है कि हम हमारे लिए चुकाई गई कीमत के अनुरूप भी बने रहें - "ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ" (कुलुस्सियों 1:10)। - जूली ऐकरमैन लिंक


समस्त संसार को परमेश्वर के सर्वोत्त्म उपहार, प्रभु यीशु के प्रति हमारी उच्चत्तम कृतज्ञता बनी रहे।

क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है। - रोमियों 6:23

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:19-27
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे। 
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।
Colossians 1:24 अब मैं उन दुखों के कारण आनन्द करता हूं, जो तुम्हारे लिये उठाता हूं, और मसीह के क्‍लेशों की घटी उस की देह के लिये, अर्थात कलीसिया के लिये, अपने शरीर में पूरी किए देता हूं। 
Colossians 1:25 जिस का मैं परमेश्वर के उस प्रबन्‍ध के अनुसार सेवक बना, जो तुम्हारे लिये मुझे सौंपा गया, ताकि मैं परमेश्वर के वचन को पूरा पूरा प्रचार करूं। 
Colossians 1:26 अर्थात उस भेद को जो समयों और पीढिय़ों से गुप्‍त रहा, परन्तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रगट हुआ है। 
Colossians 1:27 जिन पर परमेश्वर ने प्रगट करना चाहा, कि उन्हें ज्ञात हो कि अन्यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्य क्या है और वह यह है, कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 पतरस 1-2


शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

स्पष्टवादी


   मेरा एक बड़ा ऑपरेशन होना था और उसके एक दिन पहले मैंने अपनी सहेली से बातें करते हुए उसे बताया कि मैं उस शल्यक्रीया को लेकर भयभीत हूँ। मेरी सहेली ने पूछा, "उस शल्यक्रीया की कौन सी बात तुम्हें डराती है?" मैंने उत्तर दिया, "मुझे बस इसी बात का डर लगता है कि ऑपरेशन के लिए बेहोश किए जाने के बाद मैं वापस होश में नहीं आऊँगी।" मेरा उत्तर सुनकर तुरंत ही मेरी सहेली ने मेरे लिए परमेश्वर से इन शब्दों में प्रार्थना करी: "पिता परमेश्वर आप सिंडी के भय के बारे में सब कुछ जानते हैं। कृप्या उसके मन को आश्वस्त करें और अपनी शान्ति से भरें। और साथ ही प्रभु, ऑप्रेशन के पश्चात उसे बेहोशी से भी बाहर निकाल लाएं।"

   मुझे लगता है कि जब हम अपनी प्रार्थनाओं में परमेश्वर से वार्तालाप करते हैं तो वह इस प्रकार की स्पष्टवादिता से प्रसन्न होता है। जब उस अन्धे भिखारी बरतिमाई ने प्रभु यीशु को पुकारा और प्रभु उसकी पुकार सुनकर उस के पास गए, तब प्रभु यीशु ने उससे प्रश्न किया, "तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ?" और उस अन्धे भिखारी ने प्रभु यीशु से कहा, "हे गुरू, यह कि मैं देखने लगूँ।" प्रभु यीशु ने उसे उत्तर दिया, "तेरे विश्वास ने तुझे चँगा किया है" (मरकुस 10:51-52)|

   परमेश्वर के साथ वार्तालाप में हमें बात को इधर-उधर घुमा-फिरा कर कहने की कोई आवश्यकता नहीं है। संभव है कि कभी हम दाऊद के भजनों के समान परमेश्वर से अपनी बात को कहने के लिए काव्यात्मक भाषा का प्रयोग करें, किंतु ऐसे समय भी होते हैं जहाँ हमें स्पष्टवादी होकर अपने मन की बात दो-टूक कह देनी चाहिए; जैसे कि, "परमेश्वर पिता मैं क्षमाप्रार्थी हूँ कि मैंने...." या फिर, "परमेश्वर प्रभु यीशु, मैं आपसे बहुत प्रेम करता हूँ क्योंकि आपने मेरे लिए....", इत्यादि। अपने मन की बात कहने के लिए हमारा परमेश्वर के साथ स्पष्टवादी होना हमारे विश्वास की दृढ़ता को भी दिखाता है, क्योंकि हम यह दिखा रहे हैं कि हम किसी दूरस्त काल्पनिक व्यक्तित्व या किसी विचार मात्र से नहीं वरन एक ऐसे व्यक्तित्व से बात-चीत कर रहे हैं जो वास्तविक है, हमारे आस-पास विद्यमान है, हमसे बहुत प्रेम करता है और हमारे जीवनों में सम्मिलित तथा संलग्न रहता है।

   जब हम प्रार्थना में परमेश्वर से वार्तालाप करें तो उसे यह नहीं चाहिए कि हम आकर्षक शब्दों का प्रयोग करें, या अपनी बात के व्यर्थ विवरण उसे दें; वह केवल हमारे मन की बात को हमारे मूँह से स्पष्टवादिता के साथ सुनना चाहता है क्योंकि वह तो हमें, हमारे मन को, हमारी आवश्यकताओं को, हमारी परेशानियों और हमारे जीवन से संबंधित सभी बातों को हमसे अधिक भली-भांति और हमसे पहले जानता है। - सिंडी हैस कैस्पर


हृदय की प्रार्थना एक समर्पित, विश्वासी तथा प्रार्थना से भरे हृदय से ही निकलती है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। - फिलिप्पियों 4:6 

बाइबल पाठ: मरकुस 10:46-52
Mark 10:46 और वे यरीहो में आए, और जब वह और उसके चेले, और एक बड़ी भीड़ यरीहो से निकलती थी, तो तिमाई का पुत्र बरतिमाई एक अन्‍धा भिखारी सड़क के किनारे बैठा था। 
Mark 10:47 वह यह सुनकर कि यीशु नासरी है, पुकार पुकार कर कहने लगा; कि हे दाऊद की सन्तान, यीशु मुझ पर दया कर। 
Mark 10:48 बहुतों ने उसे डांटा कि चुप रहे, पर वह और भी पुकारने लगा, कि हे दाऊद की सन्तान, मुझ पर दया कर। 
Mark 10:49 तब यीशु ने ठहरकर कहा, उसे बुलाओ; और लोगों ने उस अन्धे को बुलाकर उस से कहा, ढाढ़स बान्‍ध, उठ, वह तुझे बुलाता है। 
Mark 10:50 वह अपना कपड़ा फेंककर शीघ्र उठा, और यीशु के पास आया। 
Mark 10:51 इस पर यीशु ने उस से कहा; तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिये करूं? अन्धे ने उस से कहा, हे रब्बी, यह कि मैं देखने लगूं। 
Mark 10:52 यीशु ने उस से कहा; चला जा, तेरे विश्वास ने तुझे चंगा कर दिया है: और वह तुरन्त देखने लगा, और मार्ग में उसके पीछे हो लिया।

एक साल में बाइबल: 
  • याकूब 3-5